केन्द्र में सत्ता संभालते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपन पूरा ध्यान “स्मार्ट सिटी“, “ डिजिटल इंडिया“, “स्किल इंडिया” और “मेक इन इंडिया“ पर फोक्स किया था। मगर अब जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मोदी सरकार यह सब पीछे छोडकर फिर “जय श्री राम“ और हिंदू धर्म की प्रधान संरक्षक और सेवक के रुप में अपनी छवि बनाने में जी-जान से लगी हुई है। वजह साफ हैः विकास के नाम पर वोट मांगने के लिए तथ्य और आंकडे, तर्क-वितर्क पेश करने पडते हैं मगर धार्मिक मुद्दे उछालने के लिए आंकडों की जरुरत ही नहीं पडती। वैसे भी भारत की जनता धर्मभीरु मानी-जाती है और वह जल्द ही पाखंड से गुमराह हो जाती है। देश में पाखंडी स्वंय-भू बाबाओं का मकडजाल भी इसी कारण पनप रहा है। इन दिनों भाजपा की हर जनसभा में पूरी ताकत से “जय श्री राम“ के नारे बुलंद किए जा रहे हैं। जाहिर यह सब मतदाताओं के धुव्रीकरण के मकसद से किया जा रहा है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जल्द विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इसके बाद मई, 2018 में कर्नाटक और फिर मध्य प्रदेश , राजस्थान, छतीसगढ, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में विधानसभा के चुनाव होने हैं। मई 2019 में लोकसभा चुनाव। इस स्थिति में मई 2019 तक राजनीतिक दलों को एक के बाद-दूसरे चुनाव के लिए कमर कसनी पडेगी। अगले कुछ महीनों में राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारकों को दम भरने की फुर्सत नहीं मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भाजपा के स्टार प्रचारक के तौर पर उभरे हैं। गुजरात के अलावा योगी हिमाचल प्रदेश में भी चुनावी जनसभाएं संबोधित कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही उत्तर प्रदेश के भगवाकरण की कवायद षुरु हो गई है। यहां तक कि ऐतिहासिक धरोहरों और षैक्षणिक माहौल का भी भगवाकरण किया जा रहा है। उत्तर प्रदेष में योगी सरकार मदरसों को षैक्षणिक जगत की राश्ट्रीय मुख्य धारा में लाने की जी-तोड कोषिष कर रही है। राज्य सरकार ने मदरसों के पाठयक्रम में बदलाव करते हुए अब एनसीआरटी की किताबें पढाने का निर्णय लिया है और मदरसों में गणित और विज्ञान के विशय भी पढाए जाएंगें। य्ोगी सरकार ने यह भी स्पश्ट कर दिया है कि एनसीआरटी पाठयक्रम के बाद कुरान और महजबी पुस्तकों के साथ-साथ आधुनिक षिक्षा की पुस्तकें मदरसों में उपलब्ध होंगी। उत्तर प्रदेष में लगभग 19000 मान्यता प्राप्त और 560 एडिड मदरसे हैं और इनमें एनसीआरटी की जगह मदरसा बोर्ड द्वारा निर्धारित किताबें और पाठयक्रम पढाए जाते हैं। इससे मदरसों में षिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड रहे थे। योगी सरकार का यह कदम काबिलेतारीफ है। देष के अधिकतर स्कूलों में एनसीआरटी की किताबें पढाई जाती है। एनसीआरटी की किताबों का स्तर अन्यों से काफी बेहतर माना जाता है। बहरहाल, सवाल यह है कि अब तक मदरसों में एनसीआरटी की किताबें क्यों नहीं पढाई गई? पूर्व की सरकारें इस मामले में क्यों बेबस या निश्क्रिय रहीं? राज्य में एक बार पहले भी भाजपा सरकार सतारूढ रह चुकी है। मदरसों में एनसीआरटी की किताबें पढाने पर किसी कि ऐतराज नहीं होना चाहिए मगर भगवा पार्टी का मुसलमानों के प्रति जो नजरिया है, इसके दृश्टिगत योगी सरकार की नीयत पर सवाल किया जा रहा है। अल्पसंख्यंकों को आषंका है कि एससीआरटी की किताबें के माध्यम भगवा पार्टी ऐतिहासिक घटनाओं को तोड-मरोड कर पेष करने की कोषिष कर सकती है। पहले भी ऐसे प्रयास हो चुके हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेष और छतीसगढ में ऐसे प्रयास हो चुके हैं। केन्द्र में भाजपा की सरकार है और एनसीआरटी मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन काम करता है। षिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव लाना, निसंदेह, राश्ट्रहित में है मगर इसका सियासी हित के लिए भुनाना बेहद दुखद है।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






