आसा राम बापू से लेकर, गणेशनन्द थिर्थपादा उर्फ श्री हरि, महेन्द्र गिरी, स्वामी नित्या नंद, हरियाणा के रामपाल और सिरसा डेरे के गुरमीत राम रहीम तक सलाखों के पीछे पहुंचने के बावजूद “स्वंयभू“ बाबाओं का मायावी संसार फैलता ही जा रहा है। भारत में “स्वंयभू“ बाबाओं“ की घृणित और असामाजिक हरकतों का आलम यह है कि सांसारिक भोग-विलास में संलिप्त स्वंभू “गॉड“ रिश्तोँ की मर्यादाओं तक का सम्मान नही करते हैं मगर उनके करोडों भक्त इस पर भी उनमें गहरी आस्था जताते हैं़। सिरसा डेरे के संचालक गुरमीत राम रहीम और उनकी कथित दत्तक पुत्री के बीच मर्यादाहीन संबंधो ने तो सारी हदें ही पार कर दी थीं। यह बात खुद दत्तक पुत्री के पति कह रहे हैं। पहले भी कहते थे मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। केरल के थिरुवनंतपुरम में लगातार यौन शोषण से आजिज आ चुकी 23 वर्षीय युवती द्वारा बलात्कारी स्वामी गणेशानन्द थिर्थपादा का जनानांग काट कर उससे सजा देना यौन शोषण की पराकाष्ठा उजागर करता है। दिल्ली पुलिस अधिकारी की विवादित राधे मां की अनन्य भक्ति के समक्ष वर्दी और कुर्सी की मर्यादा भी फीकी पड गई। सियासी नेताओ के वरदहस्त से मायावी बाबाओं संसार खूब फलता-फूलता है। 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने संत शोभन सरकार के कहने पर गढा हुआ सोना मिलने की आस में 19वीं शताब्दी के राव राम बख्श सिंह के महल की खुदाई करवा डाली मगर सोना नहीं मिला। संत को सपना आया था कि महल के किसी हिस्से में सोने का खजाना दबा पडा है। इससे सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। याद करें कुछ समय पहले पूरे देश को सालों से इराक में लापता 39 भारतीय युवकों के मामले में जलालत का सामना करना पडा। सरकार बार-बार कहती रही सभी 39 युवक मोसुल के निकट बंदूश जेल में बंद है जबकि मीडिया ने वहां जाकर खुलासा किया कि जेल तो कबकि खंडहर बन चुकी है। सरकार साधन संपन्न है मगर फिर भी वस्तु स्थिति का पता नहीं लगा सकी जबकि इसके मंत्री-संतरी इन युवकों का पता लगाने कई बार इराक जा चुके थे।तमाम रुकावटों के बावजूद मीडिया ने एक बारगी में ही वस्तु स्थिति का पता लगा लिया। हरियाणा का मीडिया भी काफी पहले से सिरसा डेरे की असामाजिक गतिविधियों का भांडा फोड रहा था। इसके लिए सिरसा के एक पत्रकार को अपनी जान भी गंवानी पडी। इसके बावजूद मीडिया डरा नहीं और डेरे की समाज और कानून विरोधी हरकतों का पर्दाफाश करता रहा। सिरसा डेरे के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को अपनी शिष्याओं से बलात्कार के लिए सजायाफ्ता होने के बाद अब नित नए राज-दर-राज खुल रहे है। ताजा सूचना है कि प्रवर्तन निदेशालय को सिरसा डेरे से संबंधित एक हार्ड डिस्क मिली है। इसमें गुरमीत राम रहीम के हवाला कारोबार के प्रमाण मिले हैं। भारत में पुलिस और जांच एजेसिंयों की कार्यशैली बेहद कमजोर है और विश्वनिययता नाम की तो कोई चीज है ही नहीं। समूचा जांच तंत्र सियासी नेताओं की अंगुलियों पर नाचता है। यही कारण है कि “भगौडी“ हनीप्रीत इंसा न्यूज चैनल को तो मिल जाती है मगर पुलिस को नहीं। भारतीय समाज और व्यवस्था को समय रहते सचेत रहने की आदत नहीं है। हर छोटी-बडी तात्कालिक घटना के प्रति हमारी प्रतिक्रिया “सांप निकल गया, हम लाठी पीटते रह गए“ जैसी होती है। न तो पीछे देखते हैं और न ही आगे। पहले भारत को “सपेरों का देश “ माना जाता था, अब मायावी बाबाओं का। धर्मभीरु भारतीय जनमानस की “ चमत्कारों“ और दैवीय शक्ति में गहरी आस्था है। कष्टोँ और मुसीबतों से हताश जनमानस इनके निवारण के लिए “चमत्कारों“ का सहारा लेता है। केरल की युवती भी इसी चमत्कार की आस में बाबा की हवस का शिकार बनी। आसाराम, राम पाल और गुरमीत राम रहीम की साध्वी और साधिकाएं भी इसी “चमत्कार“ की चकाचौंध में अपना सर्वस्व गंवा बैठी। आखिर यह सिला कब तक चलता रहेगा। डिजिटेलाइजेशन और ग्लोबल विलेज के जमाने में यह सब कानूनन प्रतिबंधित होना चाहिए।
समय रहते सचेत जाएं
आसा राम बापू से लेकर, गणेषनन्द थिर्थपादा उर्फ श्री हरि, महेन्द्र गिरी, स्वामी नित्या नंद, हरियाणा के रामपाल और सिरसा डेरे के गुरमीत राम रहीम तक सलाखों के पीछे पहुंचने के बावजूद “स्वंयभू“ बाबाओं का मायावी संसार फैलता ही जा रहा है। भारत में “स्वंयभू“ बाबाओं“ की घृणित और असामाजिक हरकतों का आलम यह है कि सांसारिक भोग-विलास में संलिप्त स्वंभू “गॉड“ रिष्तों की मर्यादाओं तक का सम्मान नही करते हैं मगर उनके करोडों भक्त इस पर भी उनमें गहरी आस्था जताते हैं़। सिरसा डेरे के संचालक गुरमीत राम रहीम और उनकी कथित दत्तक पुत्री के बीच मर्यादाहीन संबंधो ने तो सारी हदें ही पार कर दी थीं। यह बात खुद दत्तक पुत्री के पति कह रहे हैं। पहले भी कहते थे मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। केरल के थिरुवनंतपुरम में लगातार यौन षोशण से आजिज आ चुकी 23 वर्शीय युवती द्वारा बलात्कारी स्वामी गणेषनन्द थिर्थपादा का जनानांग काट कर उससे सजा देना षोशण की पराकाश्ठा उजागर करता है। दिल्ली पुलिस अधिकारी की विवादित राधे मां की अनन्य भक्ति के समक्ष वर्दी और कुर्सी की मर्यादा भी फीकी पड गई। सियासी नेताओ के वरदहस्त से मायावी बाबाओं संसार खूब फलता-फूलता है। 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने संत षोभन सरकार के कहने पर गढा हुआ सोना मिलने की आस में 19वीं षताब्दी के राव राम बख्ष सिंह के महल की खुदाई करवा डाली मगर सोना नहीं मिला। संत को सपना आया था कि महल के किसी हिस्से में सोने का खजाना दबा पडा है। इससे सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। याद करें कुछ समय पहले पूरे देष को सालों से इराक में लापता 39 भारतीय युवकों के मामले में जलालत का सामना करना पडा। सरकार बार-बार कहती रही सभी 39 युवक मोसुल के निकट बंदूष जेल में बंद है जबकि मीडिया ने वहां जाकर खुलासा किया कि जेल तो कबकि खंडहर बन चुकी है। सरकार साधन संपन्न है मगर फिर भी वस्तु स्थिति का पता नहीं लगा सकी जबकि इसके मंत्री-संतरी इन युवकों का पता लगाने कई बार इराक जा चुके थे। तमाम रुकावटों के बावजूद मीडिया ने एक बारगी में ही वस्तु स्थिति का पता लगा लिया। हरियाणा का मीडिया भी काफी पहले से सिरसा डेरे की असामाजिक गतिविधियों का भांडा फोड रहा था। इसके लिए सिरसा के एक पत्रकार को अपनी जान भी गंवानी पडी। इसके बावजूद मीडिया डरा नहीं और डेरे की समाज और कानून विरोधी हरकतों का पर्दाफाष करता रहा। सिरसा डेरे के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को षिश्याओं से बलात्कार के लिए सजायाफ्ता होने के बाद अब नित नए राज-दर-राज खुल रहे है। ताजा सूचना है कि प्रवर्तन निदेषालय को सिरसा डेरे से संबंधित एक हार्ड डिस्क मिली है। इसमें गुरमीत राम रहीम के हवाला कारोबार के प्रमाण मिले हैं। भारत में पुलिस और जांच एजेसिंयों की कार्यषैली बेहद कमजोर है और विष्वनीयता नाम की तो कोई चीज है ही नहीं। समूचा जांच तंत्र सियासी नेताओं की अंगुलियों पर नाचता है। यही कारण है कि “भगौडी“ हनीप्रीत इंसा न्यूज चैनल को तो मिल जाती है मगर पुलिस को नहीं। भारतीय समाज और व्यवस्था को समय रहते सचेत रहने की आदत नहीं है। हर छोटी-बडी तात्कालिक घटना के प्रति हमारी प्रतिक्रिया “सांप निकल गया, हम लाठी पीटते रह गए“ जैसी होती है। न तो पीछे देखते हैं और न ही आगे। पहले भारत को “सपेरों का देष“ माना जाता था, अब मायावी बाबाओं का। धर्मभीरु भारतीय जनमानस की “ चमत्कारों“ और दैवीय षक्ति में गहरी आस्था है। कश्टों और मुसीबतों से हताष जनमानस इनके निवारण के लिए “चमत्कारों“ का सहारा लेता है। केरल की युवती भी इसी चमत्कार की आस में बाबा की हवस का षिकार बनी। आसाराम, राम पाल और गुरमीत राम रहीम की साध्वी और साधिकाएं भी इसी “चमत्कार“ की चकाचौंध में अपना सर्वस्व गंवा बैठी। आखिर यह सिला कब तक चलता रहेगा। डिजिटेलाइजेषन और ग्लोबल विलेज के जमाने में यह सब कानूनन प्रतिबंधित होना चाहिए।
समय रहते सचेत जाएं
आसा राम बापू से लेकर, गणेषनन्द थिर्थपादा उर्फ श्री हरि, महेन्द्र गिरी, स्वामी नित्या नंद, हरियाणा के रामपाल और सिरसा डेरे के गुरमीत राम रहीम तक सलाखों के पीछे पहुंचने के बावजूद “स्वंयभू“ बाबाओं का मायावी संसार फैलता ही जा रहा है। भारत में “स्वंयभू“ बाबाओं“ की घृणित और असामाजिक हरकतों का आलम यह है कि सांसारिक भोग-विलास में संलिप्त स्वंभू “गॉड“ रिष्तों की मर्यादाओं तक का सम्मान नही करते हैं मगर उनके करोडों भक्त इस पर भी उनमें गहरी आस्था जताते हैं़। सिरसा डेरे के संचालक गुरमीत राम रहीम और उनकी कथित दत्तक पुत्री के बीच मर्यादाहीन संबंधो ने तो सारी हदें ही पार कर दी थीं। यह बात खुद दत्तक पुत्री के पति कह रहे हैं। पहले भी कहते थे मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। केरल के थिरुवनंतपुरम में लगातार यौन षोशण से आजिज आ चुकी 23 वर्शीय युवती द्वारा बलात्कारी स्वामी गणेषनन्द थिर्थपादा का जनानांग काट कर उससे सजा देना षोशण की पराकाश्ठा उजागर करता है। दिल्ली पुलिस अधिकारी की विवादित राधे मां की अनन्य भक्ति के समक्ष वर्दी और कुर्सी की मर्यादा भी फीकी पड गई। सियासी नेताओ के वरदहस्त से मायावी बाबाओं संसार खूब फलता-फूलता है। 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने संत षोभन सरकार के कहने पर गढा हुआ सोना मिलने की आस में 19वीं षताब्दी के राव राम बख्ष सिंह के महल की खुदाई करवा डाली मगर सोना नहीं मिला। संत को सपना आया था कि महल के किसी हिस्से में सोने का खजाना दबा पडा है। इससे सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। याद करें कुछ समय पहले पूरे देष को सालों से इराक में लापता 39 भारतीय युवकों के मामले में जलालत का सामना करना पडा। सरकार बार-बार कहती रही सभी 39 युवक मोसुल के निकट बंदूष जेल में बंद है जबकि मीडिया ने वहां जाकर खुलासा किया कि जेल तो कबकि खंडहर बन चुकी है। सरकार साधन संपन्न है मगर फिर भी वस्तु स्थिति का पता नहीं लगा सकी जबकि इसके मंत्री-संतरी इन युवकों का पता लगाने कई बार इराक जा चुके थे। तमाम रुकावटों के बावजूद मीडिया ने एक बारगी में ही वस्तु स्थिति का पता लगा लिया। हरियाणा का मीडिया भी काफी पहले से सिरसा डेरे की असामाजिक गतिविधियों का भांडा फोड रहा था। इसके लिए सिरसा के एक पत्रकार को अपनी जान भी गंवानी पडी। इसके बावजूद मीडिया डरा नहीं और डेरे की समाज और कानून विरोधी हरकतों का पर्दाफाष करता रहा। सिरसा डेरे के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को षिश्याओं से बलात्कार के लिए सजायाफ्ता होने के बाद अब नित नए राज-दर-राज खुल रहे है। ताजा सूचना है कि प्रवर्तन निदेषालय को सिरसा डेरे से संबंधित एक हार्ड डिस्क मिली है। इसमें गुरमीत राम रहीम के हवाला कारोबार के प्रमाण मिले हैं। भारत में पुलिस और जांच एजेसिंयों की कार्यषैली बेहद कमजोर है और विष्वनीयता नाम की तो कोई चीज है ही नहीं। समूचा जांच तंत्र सियासी नेताओं की अंगुलियों पर नाचता है। यही कारण है कि “भगौडी“ हनीप्रीत इंसा न्यूज चैनल को तो मिल जाती है मगर पुलिस को नहीं। भारतीय समाज और व्यवस्था को समय रहते सचेत रहने की आदत नहीं है। हर छोटी-बडी तात्कालिक घटना के प्रति हमारी प्रतिक्रिया “सांप निकल गया, हम लाठी पीटते रह गए“ जैसी होती है। न तो पीछे देखते हैं और न ही आगे। पहले भारत को “सपेरों का देष“ माना जाता था, अब मायावी बाबाओं का। धर्मभीरु भारतीय जनमानस की “ चमत्कारों“ और दैवीय षक्ति में गहरी आस्था है। कश्टों और मुसीबतों से हताष जनमानस इनके निवारण के लिए “चमत्कारों“ का सहारा लेता है। केरल की युवती भी इसी चमत्कार की आस में बाबा की हवस का षिकार बनी। आसाराम, राम पाल और गुरमीत राम रहीम की साध्वी और साधिकाएं भी इसी “चमत्कार“ की चकाचौंध में अपना सर्वस्व गंवा बैठी। आखिर यह सिला कब तक चलता रहेगा। डिजिटेलाइजेषन और ग्लोबल विलेज के जमाने में यह सब कानूनन प्रतिबंधित होना चाहिए।
समय रहते सचेत जाएं
आसा राम बापू से लेकर, गणेषनन्द थिर्थपादा उर्फ श्री हरि, महेन्द्र गिरी, स्वामी नित्या नंद, हरियाणा के रामपाल और सिरसा डेरे के गुरमीत राम रहीम तक सलाखों के पीछे पहुंचने के बावजूद “स्वंयभू“ बाबाओं का मायावी संसार फैलता ही जा रहा है। भारत में “स्वंयभू“ बाबाओं“ की घृणित और असामाजिक हरकतों का आलम यह है कि सांसारिक भोग-विलास में संलिप्त स्वंभू “गॉड“ रिष्तों की मर्यादाओं तक का सम्मान नही करते हैं मगर उनके करोडों भक्त इस पर भी उनमें गहरी आस्था जताते हैं़। सिरसा डेरे के संचालक गुरमीत राम रहीम और उनकी कथित दत्तक पुत्री के बीच मर्यादाहीन संबंधो ने तो सारी हदें ही पार कर दी थीं। यह बात खुद दत्तक पुत्री के पति कह रहे हैं। पहले भी कहते थे मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। केरल के थिरुवनंतपुरम में लगातार यौन षोशण से आजिज आ चुकी 23 वर्शीय युवती द्वारा बलात्कारी स्वामी गणेषनन्द थिर्थपादा का जनानांग काट कर उससे सजा देना षोशण की पराकाश्ठा उजागर करता है। दिल्ली पुलिस अधिकारी की विवादित राधे मां की अनन्य भक्ति के समक्ष वर्दी और कुर्सी की मर्यादा भी फीकी पड गई। सियासी नेताओ के वरदहस्त से मायावी बाबाओं संसार खूब फलता-फूलता है। 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने संत षोभन सरकार के कहने पर गढा हुआ सोना मिलने की आस में 19वीं षताब्दी के राव राम बख्ष सिंह के महल की खुदाई करवा डाली मगर सोना नहीं मिला। संत को सपना आया था कि महल के किसी हिस्से में सोने का खजाना दबा पडा है। इससे सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। याद करें कुछ समय पहले पूरे देष को सालों से इराक में लापता 39 भारतीय युवकों के मामले में जलालत का सामना करना पडा। सरकार बार-बार कहती रही सभी 39 युवक मोसुल के निकट बंदूष जेल में बंद है जबकि मीडिया ने वहां जाकर खुलासा किया कि जेल तो कबकि खंडहर बन चुकी है। सरकार साधन संपन्न है मगर फिर भी वस्तु स्थिति का पता नहीं लगा सकी जबकि इसके मंत्री-संतरी इन युवकों का पता लगाने कई बार इराक जा चुके थे। तमाम रुकावटों के बावजूद मीडिया ने एक बारगी में ही वस्तु स्थिति का पता लगा लिया। हरियाणा का मीडिया भी काफी पहले से सिरसा डेरे की असामाजिक गतिविधियों का भांडा फोड रहा था। इसके लिए सिरसा के एक पत्रकार को अपनी जान भी गंवानी पडी। इसके बावजूद मीडिया डरा नहीं और डेरे की समाज और कानून विरोधी हरकतों का पर्दाफाष करता रहा। सिरसा डेरे के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को षिश्याओं से बलात्कार के लिए सजायाफ्ता होने के बाद अब नित नए राज-दर-राज खुल रहे है। ताजा सूचना है कि प्रवर्तन निदेषालय को सिरसा डेरे से संबंधित एक हार्ड डिस्क मिली है। इसमें गुरमीत राम रहीम के हवाला कारोबार के प्रमाण मिले हैं। भारत में पुलिस और जांच एजेसिंयों की कार्यषैली बेहद कमजोर है और विष्वनीयता नाम की तो कोई चीज है ही नहीं। समूचा जांच तंत्र सियासी नेताओं की अंगुलियों पर नाचता है। यही कारण है कि “भगौडी“ हनीप्रीत इंसा न्यूज चैनल को तो मिल जाती है मगर पुलिस को नहीं। भारतीय समाज और व्यवस्था को समय रहते सचेत रहने की आदत नहीं है। हर छोटी-बडी तात्कालिक घटना के प्रति हमारी प्रतिक्रिया “सांप निकल गया, हम लाठी पीटते रह गए“ जैसी होती है। न तो पीछे देखते हैं और न ही आगे। पहले भारत को “सपेरों का देष“ माना जाता था, अब मायावी बाबाओं का। धर्मभीरु भारतीय जनमानस की “ चमत्कारों“ और दैवीय षक्ति में गहरी आस्था है। कश्टों और मुसीबतों से हताष जनमानस इनके निवारण के लिए “चमत्कारों“ का सहारा लेता है। केरल की युवती भी इसी चमत्कार की आस में बाबा की हवस का षिकार बनी। आसाराम, राम पाल और गुरमीत राम रहीम की साध्वी और साधिकाएं भी इसी “चमत्कार“ की चकाचौंध में अपना सर्वस्व गंवा बैठी। आखिर यह सिला कब तक चलता रहेगा। डिजिटेलाइजेषन और ग्लोबल विलेज के जमाने में यह सब कानूनन प्रतिबंधित होना चाहिए।
समय रहते सचेत जाएं
आसा राम बापू से लेकर, गणेषनन्द थिर्थपादा उर्फ श्री हरि, महेन्द्र गिरी, स्वामी नित्या नंद, हरियाणा के रामपाल और सिरसा डेरे के गुरमीत राम रहीम तक सलाखों के पीछे पहुंचने के बावजूद “स्वंयभू“ बाबाओं का मायावी संसार फैलता ही जा रहा है। भारत में “स्वंयभू“ बाबाओं“ की घृणित और असामाजिक हरकतों का आलम यह है कि सांसारिक भोग-विलास में संलिप्त स्वंभू “गॉड“ रिष्तों की मर्यादाओं तक का सम्मान नही करते हैं मगर उनके करोडों भक्त इस पर भी उनमें गहरी आस्था जताते हैं़। सिरसा डेरे के संचालक गुरमीत राम रहीम और उनकी कथित दत्तक पुत्री के बीच मर्यादाहीन संबंधो ने तो सारी हदें ही पार कर दी थीं। यह बात खुद दत्तक पुत्री के पति कह रहे हैं। पहले भी कहते थे मगर किसी ने उनकी नहीं सुनी। केरल के थिरुवनंतपुरम में लगातार यौन षोशण से आजिज आ चुकी 23 वर्शीय युवती द्वारा बलात्कारी स्वामी गणेषनन्द थिर्थपादा का जनानांग काट कर उससे सजा देना षोशण की पराकाश्ठा उजागर करता है। दिल्ली पुलिस अधिकारी की विवादित राधे मां की अनन्य भक्ति के समक्ष वर्दी और कुर्सी की मर्यादा भी फीकी पड गई। सियासी नेताओ के वरदहस्त से मायावी बाबाओं संसार खूब फलता-फूलता है। 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने संत षोभन सरकार के कहने पर गढा हुआ सोना मिलने की आस में 19वीं षताब्दी के राव राम बख्ष सिंह के महल की खुदाई करवा डाली मगर सोना नहीं मिला। संत को सपना आया था कि महल के किसी हिस्से में सोने का खजाना दबा पडा है। इससे सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। याद करें कुछ समय पहले पूरे देष को सालों से इराक में लापता 39 भारतीय युवकों के मामले में जलालत का सामना करना पडा। सरकार बार-बार कहती रही सभी 39 युवक मोसुल के निकट बंदूष जेल में बंद है जबकि मीडिया ने वहां जाकर खुलासा किया कि जेल तो कबकि खंडहर बन चुकी है। सरकार साधन संपन्न है मगर फिर भी वस्तु स्थिति का पता नहीं लगा सकी जबकि इसके मंत्री-संतरी इन युवकों का पता लगाने कई बार इराक जा चुके थे। तमाम रुकावटों के बावजूद मीडिया ने एक बारगी में ही वस्तु स्थिति का पता लगा लिया। हरियाणा का मीडिया भी काफी पहले से सिरसा डेरे की असामाजिक गतिविधियों का भांडा फोड रहा था। इसके लिए सिरसा के एक पत्रकार को अपनी जान भी गंवानी पडी। इसके बावजूद मीडिया डरा नहीं और डेरे की समाज और कानून विरोधी हरकतों का पर्दाफाष करता रहा। सिरसा डेरे के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को षिश्याओं से बलात्कार के लिए सजायाफ्ता होने के बाद अब नित नए राज-दर-राज खुल रहे है। ताजा सूचना है कि प्रवर्तन निदेषालय को सिरसा डेरे से संबंधित एक हार्ड डिस्क मिली है। इसमें गुरमीत राम रहीम के हवाला कारोबार के प्रमाण मिले हैं। भारत में पुलिस और जांच एजेसिंयों की कार्यषैली बेहद कमजोर है और विष्वनीयता नाम की तो कोई चीज है ही नहीं। समूचा जांच तंत्र सियासी नेताओं की अंगुलियों पर नाचता है। यही कारण है कि “भगौडी“ हनीप्रीत इंसा न्यूज चैनल को तो मिल जाती है मगर पुलिस को नहीं। भारतीय समाज और व्यवस्था को समय रहते सचेत रहने की आदत नहीं है। हर छोटी-बडी तात्कालिक घटना के प्रति हमारी प्रतिक्रिया “सांप निकल गया, हम लाठी पीटते रह गए“ जैसी होती है। न तो पीछे देखते हैं और न ही आगे। पहले भारत को “सपेरों का देष“ माना जाता था, अब मायावी बाबाओं का। धर्मभीरु भारतीय जनमानस की “ चमत्कारों“ और दैवीय षक्ति में गहरी आस्था है। कश्टों और मुसीबतों से हताष जनमानस इनके निवारण के लिए “चमत्कारों“ का सहारा लेता है। केरल की युवती भी इसी चमत्कार की आस में बाबा की हवस का षिकार बनी। आसाराम, राम पाल और गुरमीत राम रहीम की साध्वी और साधिकाएं भी इसी “चमत्कार“ की चकाचौंध में अपना सर्वस्व गंवा बैठी। आखिर यह सिला कब तक चलता रहेगा। डिजिटेलाइजेषन और ग्लोबल विलेज के जमाने में यह सब कानूनन प्रतिबंधित होना चाहिए।






