अपनी इकलौती बेटी की हत्या के लिए सीबीआई अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए नोएडा के डेंटल सर्जन तलवार दंपती को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। सीबीआई कोर्ट नेे तलवार दंपत्ति को परिस्थिति जान्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या का दोषी माना था। दिल्ली से सटे नोएडा में डेंटिस्ट दंपत्ति राजेश और नुपुर तलवार की 13 साल की बेटी आरुषि की 15 मई, 2008 की रात को बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस बच्ची का गला रेता गया था। एक दिन बाद नौकर हेमराज का शव तलवार दंपत्ति के पडोसी की छत से बरामद हुआ था। इस हत्याकांड की जांच में कई मोड आए। नोएडा पुलिस की शुरुआती जांच में नौकरों को हत्या के लिए जिम्मेदार माना गया। फिर कहा गया पिता राजेश तलवार ने आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक हालात में देखा था, इसीलिए गुस्से में हत्या कर दी। जांच सीबीआई के सुपुर्द की गई और केन्द्रीय जांच एजेंसी ने 30 माह बाद ठोस साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अपनी क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सीबीआई को फिर से जांच के आदेश दिए गए। और फिर सीबीआई की जांच पर अदालत ने 2013 को परिस्थिति जान्य साक्ष्यों पर तलवार दंपति को अपनी बेटी की हत्या का दोषी माना और आरुषि के पिता राजेश और माता नुपुर तलवार को उम्र कैद की सजा सुनाई । तब से दोनों गाजियाबाद के निकट डासना जेल में सजा काट रहे हैं। अब हाई कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बेटी की हत्या के आरोपों से मुक्त कर दिया है। मां-बाप के लिए अपनी संतान की हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने से बडी सजा हो ही नहीं सकती। हाई कोर्ट ने तलवार दंपति को भले ही हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया हो मगर सवाल अभी भी जस का तस है कि आरुषि और हेमराज की हत्या किसने की थी और क्यों? आरुषि हत्याकांड ने न केवल दिल्ली-नोएडा, अलबत्ता पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था। भला कोई माता-पिता अपनी इकलौती संतान का खून करने की सोच भी कैसे सकते हैं ? आरुषि हत्याकांड पर फिल्म तक बन चुकी है और किताबें तक लिखी जा चुकी हैं मगर ह्त्या का रहस्य आज भी बरकरार है । इस हत्याकांड ने इस सच्चाई को फिर उजागर किया है कि सीबीआई जांच में ऐसी कोई विलक्षणता नही है जिससे इसकी विश्वनीयता औरों से अलग नजर आए। आरुषि हत्याकंाड को छोड भी दें, तो भी सीबीआई अभी तक ऐसा कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई है। हिमाचल प्रदेश के कोटखाई गुडिया बलात्कार एवं हत्या कांड में सीबीआई को बार-बार हाई कोर्ट की फटकार सुननी पड रही है। तीन माह से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी सीबीआई हाई कोर्ट में स्टेट्स रिपोर्ट तक पेश नहीं कर पाई है। भारत में प्रॉसिक्यूशन एजेंसियों की जांच पर जब-तब सवाल उठते रहे हैं। आरुषि मामले में जांच में भी कई खामियां थी हैं। एक किताब में इन सब का विस्तार से खुलासा किया गया है। अदालत में सीबीआई ने कहा था कि आरुषि की हत्या पिता राजेश ने गोल्फ स्टिक से की थी मगर यह बात बच्चा भी बता देगा कि स्टिक से गला नहीं रेता जाता। अगर राजेश तलवार दोषी थे, फिर मामले की क्लोजर रिपोर्ट क्यों पेश की गई? सीबीआई ने 143 गवाहों की सूची पेश की थी मगर अदालत में सिर्फ 39 ही पेश किए। सीबीआई जांच में और भी कई खामियां हैं जिनका मुआयना करने के बाद स्पष्ट हो जाता है कि इस ह्त्याकांड की न तो गहनता से तफ्तीश की गई थी और न ही पूरी संजीदगी से। सीबीआई आज तक जिस तरह मामले-दर-मामले की जांच कर रही है, उससे अदालत की यह टिप्पणी सौ फीसदी सही प्रासंगिक होती है कि यह एजेंसी “पिंजरे में बंद सरकारी तोता है“। बहरहाल, देश की अंतरात्मा को यह सवाल बराबर कचोटता रहेगा कि 13 वर्षीय आरुषि को किसने मारा ?
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