सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

पाकिस्तान का नया पैंतरा

पाकिस्तान को अब याद आया है कि “ आतंक की आग से खेलते-खेलते वह खुद भी बुरी तरह से जल चुका है“ और अब आतंकी उसके गले में लिपटा वह सांप है जो उसे ही डस रहा है।  पाकिस्तान के विदेश   मंत्री ख्वाजा आसिफ ने माना है कि जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठन अब मुल्क के लिए बोझ बन गए हैं और इनसे मुल्क पीछा छुडाना चाहते हैं। न्यूयार्क में एशिया सोसायटी के एक कार्यक्रम में आसिफ ने कहा कि “पाकिस्तान में ऐसे लोग हैं जो मुल्क और क्षेत्र के लिए संकट बन सकते हैं। ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के फलने-फूलने के लिए अमेरिका को दोषी  ठहराया है। अमेरिका पर पलटवार करते हुए पाकिस्तान के विदेश  मंत्री ने स्मरण कराया कि अस्सी के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ अमेरिका ने पाकिस्तान का जमकर इस्तेमाल किया था। और तब पाकिस्तान के आतंकी अमेरिका के हीरो हुआ करते थे । उन्हें व्हाईट हाउस  में खिलाया-पिलाया जाता था। इस स्थिति में  लश्कर  -ए-तैयबा, हक्कानी नेटवर्क  और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठनों के लिए पाकिस्तान के अकेले दोषी  नहीं माना जा सकता। संक्षेप में पाकिस्तान के विदेश  मंत्री के कहने का तात्पर्य यह है कि पाकिस्तान में अस्सी के दशक से आतंकी संगठनों को पाला-पोसा जा रहा है।  पाकिस्तान में चार साल बाद पहली बार विदेश  मंत्री बनाया गया है। नवाज  शरीफ की सरकार में कोई फुल टाइम विदेश  मंत्री नहीं था। शरीफ के उत्तराधिकारी  शाहिद खाकन अब्बासी द्वारा ख्वाजा आसिफ को विदेश  मंत्री बनाकर विदेश  नीति को और कारगर और सशक्त बनाया जा रहा है। आतंक के मामले में विदेशों  में पाकिस्तान की जो फजीहत हो रही है, पाकिस्तान उसमें सुधार लाना चाहता है। संयुक्त  राष्ट्र  संघ  में पाकिस्तान द्वारा  कश्मीरी  महिला की जगह गाजा पट्टी की महिला दिखाए जाने और भारत की विदेश  मंत्री सुशमा स्वराज द्वारा आतंक पर आईना दिखाए जाने से इस्लामाबाद की खासी भद्द हो चुकी है। इन सब बातों के  मद्देनजर   ही पाकिस्तान के विदेश  मंत्री अब आतंकियों के लिए अमेरिका पर दोष  मढ कर अपनी छवि को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। पाकिस्तानी सत्ता गलियारों में अब इस सच्चाई को माना जा रहा है कि पिछले 15-20 सालों में पाकिस्तान को तालिबान और अल-कायदा को लेकर बहुत नुकसान उठाना पडा है और अब इस्लामिक स्टेट ने सर उठाना  शुरु कर दिया है। इन आतंकी संगठनों के लिए तो अमेरिका को दोषी  नहीं ठहराया जा सकता। भारत के खिलाफ आतंक को प्रायोजित करने के कारण भी पाकिस्तान को खासा नुकसान उठाना पड रहा है। इस मामले में चीन भी लंबे समय तक उसका बचाव नहीं कर पाएगा। इन हालात में पाकिस्तान को लग रहा है कि अगर समय रहते आपने घर को व्यवस्थित नहीं किया गया तो बहुत देर हो जाएगी। यही सब भांप कर पाकिस्तान ने अपनी विदेश  नीति में बदलाव किया है। पाकिस्तान का आतंक  के प्रति क्या रवैया रहता है, पूरी दुनिया की इस पर नजर है।  भारत और अफगानिस्तान में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों की बढती संलिप्तता पर भी दुनिया की पैनी नजर है। पाकिस्तान भले ही दुनिया को दिखाने के लिए यह दावा करे कि सरकार ने जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगा रखा है और सईद हाफिज को दरकिनार किया गया है  मगर सच्चाई यह है कि सईद हाफिज सरेआम भारत के खिलाफ आग उगलता है। सईद हाफिज एक नए राजनीतिक दल बनाने की फिराक में भी है। और अगर ऐसा होता है तो भारत के लिए यह बहुत बडा खतरा होगा। बहरहाल, पाकिस्तान के नेता देश  के बाहर जो बातें कहते हैं, स्वदेश  लौटते ही उनसे पलट जाते हैं। अपनी छवि सुधारने के लिए विदेश  नीति में बदलाव करने से बहुत ज्यादा हासिल नहीं किया जा सकता। कथनी से ज्यादा करनी बोलती है।