पुरान जमाने में बच्चों को अक्सर ”भेडिया आया,,,, भेडिया आया” की कहानी सुनाई जाती थी। इस कहानी का निचोड था कि एक गडरिया कैसे अक्सर भेडिया आया,,, चिल्ला-चिल्ला कर गांव के लोगों को मूर्ख बनाया करता था। मगर जिस दिन वास्तव में भेडिया आया और गडरिया उसी अंदाज में मदद के लिए चिल्लाया, कोई भी यह सोच कर उसकी मदद करने नहीं आया कि हमेशा की तरह इस बार भी वह लोगों को मूर्ख बनाया रहा है। कोरियाई प्रायद्धीप में “ अमेरिका और उत्तर कोरिया“ के बीच जारी “ युद्ध की सनक“ भी ”भेडिया आया” कहानी की तरह लगती है। उत्तर कोरिया मिसाइलें दागने से बाज नहीं आ रहा है और बडी ताकतें प्योंगयांग को धमकाने से। इस साल फरवरी से अब तक उत्तर कोरिया 22 मिसाइलें दाग चुका है और 15 परमाणु परीक्षण कर चुका है। जुलाई के पहले सप्ताह उत्तर कोरिया ने पहली बार इंटरकॉटिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया था। यह सिला लंबे समय से जारी है। हर मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका उत्तर कोरिया को धमकाता है और युद्धकी धमकी दी जाती है। पूरी दुनिया इस जमीनी सच्चाई को जानती है इस बार परंपरागत युद्ध की जगह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होगा और इस तरह का युद्ध पूरी दुनिया में भारी तबाही ला सकता है। अमेरिका कितना भी ताकतवर क्यों न हो, वह भी परमाणु हथियारों की जद से बच नहीं सकता। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच युद्ध ं कोरियाई प्रायद्धीप (दक्षिण कोरिया, जापान) तक ही सीमित नहीं रहेगा। चीन और रुस भी इसमें शामिल हो सकते हैं। रुस ने आज तक युद्ध में हमशा अमेरिकी हमले से पीडित का साथ दिया है। सीरिया में असली लडाई राष्ट्रपति बसद अल-असाद और बागियों के बीच नहीं, अलबत्ता अमेरिका और रुस के मध्य है। चीन की उत्तर कोरिया से सुरक्षा संधि है। इसके तहत उत्तर कोरिया पर अगर कोई भी देश पहले आक्रमण करता है तो चीन हर हाल में उसका साथ देगा। चीन और उत्तर कोरिया को भाई-भाई माना जाता है। द्धितीय विश्व युद्ध के बाद जब कोरिया जापान के उपनिवेशवाद से आजाद हुआ था तो यह दो भागों में बंट गया था। दक्षिण पर अमेरिकी सेनाओं का कब्जा था, इसलिए वह उसके साथ हो लिया। उत्तर कोरिया के पहले नेता किम इल सुंग चीन में पैदा हुए थे, वहीं पले-पढे और धारा प्रवाह चीनी भाषा बोलते थे। उन्होने चीन को चुना और साम्यवाद का रास्ता अपनाया। तथापि चीन और उत्तर कोरिया के मौजूदा शासक किम जोंग उन के बीच वैसे मधुर रिश्ते नहीं है, जैसे उनके दादा के समय में हुआ करते थे। किम जोंग उन को आज तक चीन आने का न्यौता तक नहीं दिया गया है। चीन किम जोंग उन से इस बात के लिए भी नाराज है कि बार-बार मना करने के बावजूद उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण से बाज नहीं आ रहा है। इसीलिए चीन ने अब संजीदगी से संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए प्रतिबंध लगाने शुरु कर दिए हैं। पिछले सप्ताह चीन ने उत्तर कोरिया को निर्यात की जा रही ऑयल सप्लाई रोक दी थी और वीरवार को चीन ने प्योंगयंाग से बिजनेस करने पर प्रतिबंध लगा दिया। उत्तर कोरिया का 90 फीसदी कारोबार चीन से किया जाता है। इन प्रतिबंधों से चीन किम जोंग उन को नकेल डालना चाहता है। मगर इस बार मुकाबला दो “सनकी“ शासकों के बीच है। सनकी कुछ भी कर सकते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का आकलन है कि युद्ध में परमाणू हथियारों के इस्तेमाल से धरती के तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस अथवा 18 डिग्री फॉरेनहाइट की गिरावट आ सकती है। इससे यूरोप और अमेरिका और अधिक ठंडा हो जाएगा और मौजूदा चक्री फसलों पर इसका बहुत बुरा असर पडेगा। परमाणु युद्ध के और भी घातक परिणाम होंगें जिनकी कल्पना तक नहीं की जा सकती। भेडिया कब आएगा, और आएगा भी या नहीं, यह देखना अभी बाकी है।
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