शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

मूल मुद्दों से भटकना

मशहूर  शायर फैज अहमद फैज का लोकप्रिय शेर है, “और भी गम है जमाने में मोहब्बत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा“। दुनिया भर में  मोहब्बत के प्रतीक ताजमहल पर मौजूदा विवाद इस शेर को और ज्यादा प्रासंगिक करता है। जनसेवा सरकार और शासक दल के नुमाइंदों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए मगर अफसोस समकालीन  शासक ऐसा करने की बजाए अनावश्यक  मुद्दों को उछाल कर जनता का ध्यान बंटाने में मशगूल रहते  हैं। जन समस्याओं का समय बद्ध निदान करने में विफल रहने पर मुद्दों से ध्यान हटाना तो कोई समकालीन सियासतदानों से सीखे। भगवा सरकार के सत्ता में आते ही ऐतहासिक प्रसंगों और धरोहरों को मिटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ताजमहल से लेकर टीपू सुल्तान की महत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश  में दिमाग बुखार की महामारी से बच्चों के बेमौत मरने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। सौ दिन में राज्य की सभी सडकों को गड्डों से मुक्त करने का वायदा  छह माह में भी पूरा नहीं हो पाया है। पांच साल में पूरा हो जाएगा, इसकी भी उम्मीद कम ही है। मगर  उत्तर प्रदेश  में  धरोहरों को मिटाना योगी आदित्यनाथ सरकार की उच्च  प्राथमिकता  है।    सबसे पहले मुगल सराय रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर दीन दयाल उपाध्याय कर दिया। फिर ताजमहल को महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की अधिकृत सूची  से हटा दिया गया । और अब भाजपा के बडबोले विधायक संगीत सोम ने ताजमहल को “भारतीय संस्कृति पर धब्बा“ बताकर बडा बवाल खडा कर दिया है। बवाल बढने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्पष्टीकरण  देने के लिए आगे आकर कहना पडा कि ताजमहल तो मोहब्बत का मेमिसाल स्मारक है। वीरवार को योगी आदित्यनाथ ने ताज महल में झाडू लगाकर “स्वच्छता अभियान“ का आगाज भी किया।  ताज महल में पहली बार “जय श्री रामः के नारे भी गूंजे। योगी ने ताज महल को लगभग चार सौ करोड रु की सौगात भी दी। अभी ताजमहल विवाद की आग ठंडी भी हुई नहीं कि  राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद के बंगलुरु में संबोधन पर भी सवाल खडे किए जा रहे हैं।  राष्ट्रपति  कोविंद ने बुधवार को कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए टीपू सुल्तान की तारीफ की।  टीपू सुल्तान को महान योद्धा बताते हुए राश्ट्रपति ने कहा है उन्होंने अग्रेजों से लडते हुए वीरगति प्राप्त की थी। उन्होंने यह भी कहा कि टीपू सुल्तान ने ंमैसूृर रॉकेट को विकसित करने में अहम योगदान दिया था। इसी रॉकेट के बाद यूरोप ने इसका इस्तेमाल किया। राष्ट्रपति के कथन भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता के माफिक नहीं है, इसलिए पार्टी ने फौरन कह दिया राष्ट्रपति के मुंह में शब्द डाले गए। भाजपा टीपू सुल्तान को क्रूर शासक बता रही है। केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगडे तो टीपू सुल्तान को बलात्कारी और हत्यारा करार दे चुके हैं। उनके इस बयान पर खासा बवाल मचा हुआ है। कर्नाटक सरकार 10 नंवबर को टीपू सुल्तान जयंती मना रही है। भाजपा इसका मुखर विरोध कर रही है। बहरहाल, खोखले और थोथे मुद्दों को उछाल कर चुनाव तो जीते जा सकते हैं मगर जन समस्याएं हल नहीं की जा सकती। और अगर जन समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं निकाला जाता, जनता दंडित करने का मादा भी रखती है। निसंदेह, उत्तर प्रदेश  के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताजमहल जाकर विवाद को ठंडा करने का काम किया है। मगर आलोचकों के इस कथन में वजन है कि योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सबसे पहले पार्टी के उन लोगों के मन-मष्तिष्क  को भी स्वच्छ करना चाहिए, जो वैमनस्य और नफरत फैलाने का कोई अवसर नहीं चूकते। देश  की 60 फीसदी आबादी दो वक्त की रोजी-रोटी के लिए जूझ रही है। इन लोगों को रोजगार और जन सुविधाओं की दरकार है और  गौण मुद्दे उछालना, अवाम के जले पर नमक छिडकने जैसा है।