शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

India Need To Learn From Mexico

मंगलवार को भूकंप  ने मेक्सिको सिटी को हिला कर रख दिया।  7.1  तीव्रता वाले भूकंप से 237 लोग मारे गए , 1900 से अधिक जख्मी हुए और सैंकडों इमारतें  जमीदोंज हो गई हैं। इसे इतफाक ही कहा जाए कि मेक्सिको सिटी के लोग मंगलवार को 32 साल पहले ठीक इसी दिन 1985 में आए प्रलयकारी भूकंप की बरसी मना रहे थे और भूकंप का कैसे सामना किया जाए, इसकी मॉक ड्रिल की जा रही थी। 1985 के भूकप में 45,000 के करीब लोग मारे गए थे और 30,000 से ज्यादा घायल हुए थे। तब भूकंप ने मेक्सिको सिटी में भारी तबाही मचाई थी। दो सप्ताह पहले 8 सितंबर् को भी मेक्सिको के दक्षिण-पूर्व  कियापास इलाके में 8.2 तीव्रता  का भूकंप आया था और इस त्रासदी में कम-से-कम 100 लोग मारे गए थे। इस भूकंप को सदी का सबसे तीव्र माना गया था। कियापास को  भूकंप की  दृष्टि  से मेक्सिको का सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। मेक्सिको घोडे की नाल सरीखे पैसेफिक रिंग आफ फायर में स्थित है। इस क्षेत्र का बाहरी किनारा  प्रशांत  महासागर से शुरु होता है। यह क्षेत्र एशिया के पूर्वी तट से अमेरिका के पश्चिम  तट तक फैला हुआ है। दुनिया के 90 फीसदी भूकंप इसी इलाके मे आते हैं और इनमें 80 फीसदी खासे तीव्रता वाले होते हैं। मेक्सिको के अलावा जापान, इकवाडोर, चिली, अमेरिका, कनाडा समेत कई लातीनी अमेरिकी देश   पैसेफिक रिंग आफ फायर में पडते हैं। भू-विज्ञानियों के अनुसार प्रशांत  महासागर के नीचे  जमीन के अंदर कई तरह की टेक्टोनिक प्लेटें है जो अक्सर आपस में टकराने से उर्जा  पैदा करती है और इससे भूंकप आते हैं। बहरहाल, बार-बार भूकप से पीडित देशों  ने इस प्राकृतिक  आपदा से सुरक्षित रहने के तौर-तरीके अपना लिए हैं। मैक्सिको ने भी 1985 की भूकंप त्रासदी से सीख लेकर इससे निपटने  के पुख्ता तौर-तरीके अपनाए और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। मेक्सिको में हर भवन का भूकंप रोधी निर्माण कानूनन अनिवार्य है। 1985 में भूकंप से तबाह हुए  मेक्सिको सिटी का काया कल्प किया गया है। पुरानी इमारतों को भूकंप रोधी बनाया गया है। दूर-संचार व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया गया और प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए संकट मोचन व्यवस्था तैयार की गई। भूकंप की चेतावनी देने वाले अलार्म  लगाए गए हैं। यह बात दीगर है कि मंगलवार को अलार्म बजा ही नहीं या भूचाल में इसकी आवाज सुनाई नहीं दी। इन सब प्रबंधों के कारण ही 2012 और मंगलवार को आए भूकंप से जान-माल का उतना नुकसान नहीं हुआ, जितना 1985 में हुआ था। भारत को मेक्सिको से सीख लेनी चाहिए। भारत की तरह मेक्सिको में भी  घूसखोरी  का बोलबाला है और दलाल,  घूसखोर  नौकरशाही और सियासी  नेताओं  का मजबूत गठजोड सार्वजनिक योजनाओं का अधिकांश   पैसा बीच में भी हडप जाता है। मेेक्सिको में नशीले पदार्थों  का कारोबार चरम पर है। इसी कारण अमेरिका के  राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप मैक्सिको के साथ अपनी सीमा पर वॉल बनाना चाहते है। तथापि, मेक्सिको ने भूकंप से बचने के लिए कारगर उपाय किए हैं। भारत में कई क्षेत्र भूकंप की दृष्टि  से काफी संवेदनशील है। राजधानी दिल्ली के अलावा, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर  को अति संवेदनशील माना गया है।  उतर भारत में औसतन हर दिन भूकंप के तीन झटके महसूस किए जाते हैं। दिल्ली, शिमला, धर्मशाला समेत उत्तर भारत के कई शहर तबाही के मुहाने पर खडे  हैं।  शिमला का बेतरतीब निर्माण इस क्षेत्र में भूकंप की दृष्टि  से सबसे संवेदनशील बताया गया है।  भू-वैज्ञानियोँ  ने हिमालय की तलहटी में बसे क्षेत्रों  में उच्च तीव्रता वाले भूकंप की चेतावनी दे रखी है। अप्रैल, 2015 में नेपाल में आए भूकंप को भी इसी कडी का सिला माना जा रहा है। निसंदेह, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को टाला नहीं जा सकता मगर इससे होने वाले जानमाल के नुकसान को जरुर कम किया जा सकता है। समय रहते संभल जाने में ही लोगों की भलाई है।