लगातार मिसाइल परीक्षण कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीर चुनौती देते-देते उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन रोके भी नहीं रुक रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ प्रतिबंध-दर-प्रतिबंध और अमेरिका धमकी-दर- धमकी दे रहा है और उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण लगातार जारी हैं। हर धमकी और प्रतिबंध के बाद तानाशाह किम जोंग उन और ज्यादा आक्रामक होता जा रहा है। यह सिला लंबे समय से जारी है और इससे न केवल कोरियाई प्रायद्धीप, अलबत्ता पूरी दुनिया में हडकंप मचा हुआ है। उत्तर कोरिया की हर मिसाइल परीक्षण के साथ ग्लोबल स्टॉक मार्केट में भूचाल सा आ जाता है और शेयर औंधे मुंह लुढक जाते हैं। कोरियाई प्रायद्धीप पहले भी युद्ध की विभीषिका झेल चुका है। 1950 में किम जोंग उन के दादा किम इल सुंग ने दक्षिण कोरिया पर हमला किया था। तब अमेरिका ने दक्षिण कोरिया का साथ दिया था और चीन ने उत्तर कोरिया का। रुस ने भी उत्तर कोरिया का ही साथ दिया था। यह संघर्ष तीन साल तक जारी रहा और 27 जुलाई, 1953 तक युद्ध विराम होते-होते जान-माल का भारी नुकसान हो चुका था। तीन साल के बाद युद्ध के समाप्त होने पर पूरे कोरियाई प्रायद्धीप मे सिर्फ तबाही नजर आती थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का आकलन था कि इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए थे, एक लाख से ज्यादा बच्चे अनाथ हो गए थे और एक करोड से अधिक लोगो को विस्थापित होना पडा था। उत्तर कोरिया की राजधानी व्योंगयांग पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी । राजधानी में एक भी इमारत सही सलामत नहीं बची थी। युद्ध विराम तो हो गया मगर दोनो देशों मे कोई शांति संधि नहीं हुई। दोनो को एक-दूसरे से दूर रखने के लिए विसैन्यीकृत (डिमिलिटराइज्ड) क्षेत्र जरुर बनाया गया मगर आज यही दुनिया में हथियारों से लैस सबसे बडा क्षेत्र है। शांति संधि नहीं होने के कारण तकनीकी तौर दोनों देश पिछले 64 साल से तनावपूर्ण माहौल में एक-दूसरे का सामना कर रहे हैं। और बडी ताकतों ने कोरियाई प्रायद्धीप में अपनी-अपनी उपस्थिति दर्ज कर माहौल को और ज्यादा बिगाड रखा है। पचास के दशक और 2017 की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है। उत्तर कोरिया परमाणु बमों और मिसाइलों से बडी न्यूक्लियर पॉवर बन चुका है। उत्तर कोरिया के पास 60 लाख की सेना है और यह दुनिया की चौथी सबसे बडी सेना है। इसी माह के शुरु में उत्तर कोरिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर दावा किया कि यह मिसाइल अमेरिका के अलास्का तक हमला करने मे सक्षम है। उत्तर कोरिया अपनी जिद पर अडा है और अमेरिका अपनी। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक दिन पहले ही धमकी दी है कि उत्तर कोरिया को पूर तरह से तबाह करने का समय आ गया है। रक्षा विशेषज्ञो का कहना है कि अगर युद्ध हुआ तो उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया पर चंद मिनटों में मिसाइलें दाग कर तबाही मचा सकती है। चंद सैकंडों में करोडों लोगों को सुरक्षित ठिकानों में ले जाना कतई मुमकिन नहीं है। बहरहाल, उत्तर कोरिया को परमाणु बम तकनीक पाकिस्तान से स्मगल की गई है और किम जोंग उन को न्यूक्लियर पॉवर बनाने में पाकिस्तान की अहम भूमिका है। भारत के लिए यह स्थिति खतरनाक है। चीन, पाकिस्तान का भी जिगरी दोस्त है और उत्तर कोरिया का भी। चीन की विस्तारवादी नीति से भारत को कहीं ज्यादा बडा खतरा है। पाकिस्तान इस मामले में चीन का खुलकर समर्थन कर रहा है। भारत इस समय चौतरफा दुश्मनों से घिरा हुआ है। नेपाल, म्यांमार और श्री लंका अब चीन के ज्यादा करीब हैं और चीन इन मुल्कों की हर तरह से मदद कर रहा है। अगर खुदा-ना-खास्ता पाकिस्तान में भी किम जोंग उन जैसा तानाशाह सत्ता में आता है, तो भारत को भी कोरियाई प्रायद्धीप जैसे तनावपूर्ण माहौल का सामना करना पड सकता है। युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है और यह सिर्फ भारी तबाही लाता है।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






