अमेरिका के बर्कले स्थित केलिफोर्निया विष्वविधालय में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण पर भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया अपेक्षित थी। राहुल गांधी को टोक-टोक कर शर्मसार करना भाजपा की सामरिक रणनीति है। राहुल ने भाजपा पर आरोप भी लगाया है कि “ वो तो दिन भर मेरे बारे में दुर्भावना फैलाते हैं“। लेकिन इस बार भाजपा गलत ट्रेक पर है। पहली बार पहले से एकदम अलग राहुल गांधी पूर्वाग्रहों से मुक्त, आत्मविश्वास से भरपूर संयत और संतुलित नजर आए। उन्होंने पहले से लिखी स्क्रिप्ट नहीं पढी, अलबता बर्कले में राहुल गांधी ने ”वंशवाद, अहंकारी कांग्रेस से लेकर नोटबंदी और कश्मीर समस्या तक हर सवाल का खुलकर जवाब दिया। इसके कई कारण हो सकते हैं। अमेरिका में बॉस्टन, फ्लोरिडा जैसे शहरों में काफी दिनों से रुकने और सैम पित्रोदा, शशि थरुर और मिलिंद देवडा जैसे पेशेवर टीम ने राहुल गांधी में आत्मविष्वास भरा है। और यह सब भाजपा के राहुल गांधी को “भला-बुरा“ कहने वाली टीम को अच्छा नहीं लगा। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने फौरन कह दिया राहुल ने विदेशी धरती पर “वंशवाद“ पर बोलकर देश का अपमान किया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यहां तक कह दिया, “देश में तो उनकी कोई सुनता नहीं, इसलिए विदेशों में भाषण झाड रहे हैं। स्मृति ईरानी को चर्चा में रहने की आदत है और राहुल गांधी के खिलाफ बोलना उनका पेटेंट बन गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने स्मृति ईरानी को अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लडाया था। वे हार गईं मगर इसके बावजूद उन्हें केन्द्र में मंत्री और मानव संसाधन जैसे अहम मंत्रालय का प्रभारी बनाया गया। बाद में उनसे यह मंत्रालय छीन लिया गया और उन्हें कपडा मंत्रालय दिया गया। वैंकेया नाडू के उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति चुने जाने के बाद स्मृति ईरानी को सूचना और प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। भाजपा में स्मृति ईरानी का अपना अलग रुतबा है। उनका परिवार लंबे समय से राष्ट्रीय स्वंय सेवक से जुडा हुआ है। आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेताओं के प्रोत्साहन पर ईरानी राहुल गांधी को निशाने पर लेती रही हैं। इसीलिए, मैडम ईरानी राहुल गांधी के खिलाफ बोलने में एक पल का विलंब नहीं करती। निसंदेह, स्मृति ईरानी प्रखर वक्ता है और उन्हें भाजपा का उभरता “ फीमेल फेस“ माना जाता है। अभी सुषमा स्वराज को यह जगह मिली हुई है। वे आज भी भाजपा का “दमकता“ फीमेल फेस है़ं। भाजपा स्मृति ईरानी को सुषमा के विकल्प तौर पर कल्टीवेट कर रही है। सुषमा की ही तरह सुहाग का सिंदूर और माथे पर बडी सी बिंदिया स्मृति ईरानी का सार्वजनिक मंचों पर खास अंदाज है। बतौर ग्रांड ओल्ड पार्टी (जीओपी) के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को विदेश में क्या बोलना है और कैसे बोलना है, यह उनका विशेषाधिकार है। इसके लिए उन्हें प्रतिद्धंदी दलों से सीख लेने की जरुरत नहीं है। मगर विरोधियों की इस बात में दम है कि वंशवाद भारत में ही नहीं, अमेरिका में भी है। पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश और बिल क्लिंटन परिवार इसकी मिसाल है। और अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस रेस में शामिल होने की पर है। ट्रप पुत्री इवांका ट्रप को अपना उतराधिकारी बनाने में काफी संजीदा दिख रहे हैं। राहुल अमेरिका में अगर स्थानीय राजनीतिक दलों के वंशवाद का उल्लेख करते तो उनका भाषण और ज्यादा वजनदार होता। तथापि, कांग्रेस को इस बात से खुश होना चाहिए कि भाजपाई राहुल गांधी के खिलाफ आग उगल कर उन्हें और ज्यादा प्रासंगिक बना रहे हैं। इंदिरा गांधी के समय तत्कालीन विपक्ष जितनी आग उनके खिलाफ उगलते, वे उतनी ही ज्यादा लोकप्रिय होती गईं। और यही बात राहुल गांधी के मामले में प्रासंगिक हैं। राहुल का भाष ण सारगर्भित था या नहीं, इसका फैसला जनता को करने दिया जाए। लोकतंत्र में हर आदमी को अपनी बात, अपने सलीके और सोच के मुताबिक कहने की पूरी आजादी है। इस पर तल्ख टीका-टिप्पणी करना असहिष्णुता ही है।
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