तेल की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल का अप्रत्याशित ऊंचे दामों पर बिकना आम आदमी के “बुरे दिन“ लाने जैसा है। तीन साल में अच्छे दिन लाने का वायदा करते-करते सरकार ने भारी करों का बोझ लाद कर आम आदमी की कमर ही तोड दी है। तीन साल में पेट्रोल और डीजल के दाम उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। बुधवार को मुंबई में पेट्रोल 79.48 रु और दिल्ली में 70.38 रु प्रति लीटर बिक रहा था। इससे पहले अगस्त, 2014 में मुबंई में पेट्रोल 80.60 रु और दिल्ली में 72. 51 रु प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर बिका था। मगर 2014 और 2017 में बहुत बडा अंतर है। 2014 में कच्चे तेल (क्रूड) की अंतरराष्ट्रीय कीमत 6291.91 रु प्रति बैरल थी। अब यह घटकर 3392.90 रु प्रति बैरल रह गई है। तीन साल मे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 46 फीसदी की गिरावट आई है मगर इस दौरान देश में पेट्रोल और डीजल में अनुपातिक गिरावट नहीं आई । पूरी दुनिया में 2013 के बाद से पेट्रोल और डीजल ं 56 फीसदी सस्ता हुआ है मगर भारत में सस्ता होने तो दीगर रहा, दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल की कीमतें 60 रु लीटर से नीचे नहीं आई जबकि इस दौरान तेल की अंतरराश्ट्रीय कीमत 103 डालर प्रति बैरल से गिरकर 35 डालर प्रति डालर पर आ चुकी थी। सरकार का तर्क है कि अमेरिका में हार्वे-इरमा तूफान के कारण तेल उत्पादन प्रभावित हुआ है और कीमतों में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल 18 फीसदी और डीजल 20 फीसदी महंगा हुआ है। सितंबर में भारत को कच्चे तेल के दाम सिर्फ पांच फीसदी ज्यादा देने पडे थे। सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढना अथवा उत्पादन में गिरावट का असली कारण नही है। पेट्रोल और डीजल के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि के लिए सरकार की “ राजस्व भूख“ जिम्मेदार है। पिछले तीन साल में केन्द्र सरकार एक दर्जन से अधिक बार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढा चुकी है। नवंबर 2014 और् जनवरी 2016 के दरम्यान ही सरकार नौ बार एक्साइज डयूटी बढा चुकी है हालांकि इस दौरान तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों मे 46 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। अगस्त 2014 में पेट्रोल पर प्रति लीटर एक्साइज डयूटी 9,48 थी। 2017 में यह बढते- बढते 21.48 रु प्रति लीटर हो गई। यानी तीन साल में 126 फीसदी की वृद्धि। अगस्त 2014 में डीजल पर एक्साइज 3.56 रु प्रति लीटर थी मगर इस समय यह 17,33 फीसदी है। यानी 387 फीसदी का इजाफा। एक्साइज ड्यूटी के अलावा पेट्रोल और डीजल पर राज्यों द्वारा अलग से वैट वसूला जा रहा है। इस समय दिल्ली में पेट्रोल पर 14.96 रु और डीजल पर 8,67 प्रति लीटर वैट वसूला जा रहा है। पंजाब में पेट्रोल पर 37.5 फीसदी और डीजल पर 17.29 फीसदी वैट वसूला जा रहा है। दुनिया के किसी भी देश में पेट्रोल और डीजल पर इतनी भारी-भरकम कर वसूले नहीं जाते हैं। पडोसी पाकिस्तान में भी पेट्रोल और डीजल भारत से कहीं ज्यादा सस्ता है। 2014 में 57 रु प्रति लीटर की तुलना में इसा साल अगस्त में वहां पेट्रोल के दाम 41.06 लीटर रु थे। पेट्रोल की मूल लागत 26.86 रु और डीजल 26 रु प्रति लीटर है। बाकी सब सरकार, आयल कंपनियों और डीलर्स का मुनाफा है। 16 जून से पेट्रोल-डीजल के रोजाना दाम तय हो रहे हैं। तब से पेट्रोल के दाम प्रति लीटर पाच रु बढ चुके है और सरकार जनता से 1.15 लाख करोड रु वसूल चुकी है। मोटी कमाई करने के लिए ही पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है। केन्द्र एक्साइज डयूटी बढाकर पैसे कमाती रहेगी, राज्य वैट लगाकर। अपने शाही खर्चे पूरा करने के लिए टैक्स-दर-टैक्स लगाकर जनता को लूटने का सिला बंद हो जाना चाहिए। अगर सरकार अच्छे दिन नहीं ला सकती, बुरे दिन लाने से तो बचे।
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