पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ के आतंकियों पर ताजा बयान से भारत को इतराने की जरुरत नहीं है। अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति प्राप्त करने और दुनिया को यह दिखाने के लिए यह बयान जारी किया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने माना है कि लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पाल-पोसकर अपने ही पांव पर कुल्हाडी चला रहा है। आतंकी संगठनों की सरपरस्ती से पाकिस्तान को पूरी दुनिया में फजीहत झेलनी पड रही है। पाक विदेश मंत्री का यह भी कहना है कि सरकार को अविलंब आतंकी संगठनों पर नकेल डालनी चाहिए। अगर ऐसा नही किया गया तो पाकिस्तान अलग-थलग पड जाएगा। शुक्र है पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने माना तो सही कि उसकी सरजमीं से लश्कर-ए-तैयबा और जैेश -ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन फल-फूल रहे हैं और सरकार बाकायदा आतंकियों को चारा डाल रही है। अब तक तो इस्लामाबाद इस बात से ही मुकर रहा था कि लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे संगठन आतंकी है और पाकिस्तान उन्हें पाल-पोस रहा है। पाकिस्तान विदेश मंत्री का यह बयान चीन के शियामेन में सपन्न ब्रिक्स सम्मेलन द्वारा जारी घोषणा पत्र के दो दिन बाद आया है। ब्रिक्स घोषणा पत्र में लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे दस आतंकी संगठनों को शांति के लिए बहुत बडा खतरा बताया गया है और इनके खिलाफ कडी कार्रवाई करने को कहा गया है। ब्रिक्स के अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पाकिस्तान को कई बार चेता चुके हैं कि वह आतंकी संगठनों को पालने-पोसने से बाज आए। चीन ने ब्रिक्स सम्मेलन में पाकिस्तान, लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का घोषणा पत्र में शामिल नहीं होने देने के लिए खूब हाथ-पांव मारे थे मगर इस बार उसकी नहीं चली। पिछले साल गोवा में सपन्न ब्रिक्स सम्मेलन में चीन लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का नाम घोषणा पत्र से बाहर रखने में सफल रहा था। ब्रिक्स के घोषणा पत्र में क्योंकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी सहमति और हस्ताक्षर है, इस स्थिति के दृष्टिगत चीन के लिए अब लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का बचाव करना मुश्किल हो जाएगा। चीन अब तक लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी संगठनों को आत्की बताने से बच रहा था। इसीलिए पाकिस्तान अब लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की बात उछाल रहा है। पाकिस्तान की किसी भी बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता। दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान भले ही लश्कर -ए-तैयबा और जैश -ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का आडंबर करे मगर अमल में वह कुछ नहीं करेगा। 1993 मुंबई बम हमले के मास्टरमाइंड ग्लोबल टेर्रिस्ट डॉन दाउद इबाहिम को पाकिस्तान जिस तरह से शरण दिए हुए है, उससे पाकिस्तान की बदनीयत का पता चलता है। दाउद मुंबई में 257 लोगों की हत्याओं के लिए वांछित है। वीरवार को 24 साल बाद इस मामले में अदालत का फैसला आया है मगर हमले के प्रमुख साजिशकर्ता दाउद आज भी कानून की जद से बाहर है। दाउद के प्रमुख गुर्गे अबु सलेम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है जबकि दो आरोपियों को मृत्यु दंड दिया गया है। पुर्तगाल से संधि के तहत अबु सलेम फांसी से बच गया। भारत को अबु सलेम को पुर्तगाल से पत्यर्पण करने के लिए वहां की सरकार को सलेम को फांसी की सजा न देने का वायदा करना पडा था। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भी माना है कि दाउ द इब्राहिम पाकिस्तान में ही है मगर वह यह सूचना भारत के साथ साझा करने के लिए कतई तैयार नहीं है। दाउद तो क्या पाकिस्तान अपने पडोसी भारत से किसी भी तरह का सहयोग करने के लिए तैयार नहीं है। कहते हैं, “ कुत्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं होती“। पाकिस्तान भी कुत्ते की पूंछ की तरह है। आतंक को पालना-पोसना और चारा डालना उसकी सामरिक विवशता है। ब्रिक्स, भारत, अमेरिका समेत दुनिया लाख कोशिश कर ले, पाकिस्तान अपनी बेजा हरकतों से बाज नहीं आएगा। भारत को इसी सच्चाई के साथ अपनी कूटनीति बनानी होगी।
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