सोमवार, 18 सितंबर 2017

जापानी रंग में रंगा गुजरात

जापान के प्रधानमंत्री   शिंजो आबे  की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण ंसंबंधों और सामरिक-आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है। शिंजो आबे के स्वागत के लिए पूरा गुजरात जापानमय हो गया । शिंजो अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का उदघाटन करने के लिए विशेष  तौर पर गुजरात आए थे। उनके स्वागत के लिए अहमदाबाद में सडकों को मखमल की तरह सजाया गया। जापानी अतिथियों की आवभगत के लिए खान-पान की विषेश व्यवस्था की गई और कई नए ठिकाने सामने आए। ऑटोमोबाइल उधोग और इससे जुडी अनेक परियोजनाओं ने गुजरात का कायाकल्प किया है। हर तरफ परिवर्तन की लहर चल रही है। नई-नई चीजें सामने आ रही हैं और काफी कुछ बदल रहा है। बदलाव की इस प्रकिया में जापान की झलक भी गुजरात में नजर आ रही  हैं। ऑटोमोबाइल उधोग में काम करने के लिए बहुत सारे जापानी गुजरात में हैं और इसीलिए जापानी व्यंजनों की लोकप्रियता भी बढी है।  साणंद के निकट एक होटल ने तो अपना नाम तक बदल डाला। इस साल फरवरी में  होटल ”कृश्ण लीला“ से बदलकर “ला टोक्यो“ हो गया और व्यजनों का अपना पूरा मैन्यू ही बदल डाला। इससे पता चलता है कि गुजरात में जापान के सहयोग से विकास की बयार बह रही है। प्रधानमंत्री षिंजो आबे ने न केवल बुलेट ट्रैन प्रोजेक्ट का ही उदघाटन किया बल्कि इस परियोजना के लिए नाम मात्र के ब्याज पर पचास साल के लिए 88,000 करोड रु का ऋण भी दिया है।  1.10 लाख करोड रु की लागत से बनने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना 2022 में पूरी होगी। इस ट्रेन के षुरु होने से अहमदाबाद-मुंबई  के बीच  508 किलोमोटर लंबी यात्रा दो घंटे में पूरी कर ली जाएगी। षिंजो आबे के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत और जापान के संबंध और प्रगाढ हुए हैं। अहमदाबाद यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री षिंजो और मोदी ने खुली जीप में आठ किलोमीटर लंबा रोड षो भी किया।  षिंजो ने भारत और जापान की दोस्ती को दो सागरों का संगम बताकर अपनी यात्रा से इसे और मजबूती दी है। बुलेट ट्रेन परियोजना के अलावा षिंजो और मोदी के बीच एषिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडॉर पर भी चर्चा  हुई। भारत और जापान दोनों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण  परियोजना है और इसे चीन के ”वन बेल्ट, वन रोड” का तोड बता जा रहा है। चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से भारत और जापान दोनों ही चिंतित है। चीन के सरकारी मुख समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में माना है कि जापान के समक्ष  एषिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडॉर का प्रस्ताव रखकर भारत, चीन के  ”वन बेल्ट, वन रोड”  की काट कर रहा है। 40 अरब डॉलर की  एषिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडॉर परियोजना का प्रमुख मकसद अफ्रीकी देषों के विकास में भागीदार बनना है। इस परियोजना में जापान तीस अरब डॉलर का निवेष करेगा और भारत दो अरब डॉलर देगा। इस धन से अफ्रीका में स्थानीय सामुदायिक परियोजनाओं के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। चीन ने पिछले कुछ समय से अफ्रीका में अपना प्रभुत्व बढाकर भारत और जापान दोनों को कूटनीतिक चुनौती दी है। भारत और जापान दोनों चीन की तरह खुद को विकासषील पॉवर के रुप में दिखाना चाहते हैं। चीन का वनवेल्ट, वन प्रोजेक्ट वैष्विक स्तर की योजना है और इसके माध्यम से चीन ने यूरोप से मध्य-पूर्व  और अफ्रीका तक निवेष और आधारभूत ढांचे का विस्तृत  रोडमैप तैयार कर रखा है। भारत और जापान मिलकर एक अलग मॉडल तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं।  भारत और जापान में सामरिक-आर्थिक सहयोग काफी हद तक  चीन की विस्तारवादी भूख को रोक सकता है। भारत-जापान सहयोग से चीन पहले ही तिलमिलाया हुआ है। जापानी प्रधानमंत्री की ताजा भारत यात्रा से चीन और बौखला गया है।  भारत और जापान के बीच इस गहरी दोस्ती की “जय“।