शाहिर लुधियानवी की एक पुरानी गजल है,“ रहने को घर नहीं, सारा जहान हमारा“। दुनिया भर में शरणार्थियों की यही स्थिति है। सुरक्षित ठिकाना ढूंढते- ढूंढते शरणार्थी दुनिया भर की खाक छानते फिरते हैं मगर हर जगह उन्हें दुत्कारा जाता है। रणार्थियों से भारत परेशान है। यूरोप तो और ज्यादा परेशान है और अब अमेरिका भी। भारत में बसे और निरंतर पलायन कर रहे रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों का मामला देश की शीर्ष अदालत पहुंच चुका है। सोमवार को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बडा खतरा बताया है। सरकार ने भारत आ रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण देने से साफ मना कर दिया है। सरकार के इस स्टैंड से तीस-चालीस साल से भारत में बसे रोंहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों पर भी वापस धकेले जाने का खतरा मंडरा रहा है। भारत में रोंहिंग्या मुसलमान 1980 और 1990 से रह रहे हैं। 1980 में भारत में आए रोंहिंग्या मुसलमानों को देश में बसे लगभग चार दशक हो चुके हैं। इस स्थिति में अगर रोंहिंग्या मुसलमानों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और सुरक्षा एजेंसिंयों पर भी आती है। सुरक्षा एजेंसियों ने उन रोंहिंग्या मुसलमानों पर नजर क्यों नहीं रखी जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं? रोंहिंग्या मुसलमान अधिकतर जम्मू, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के आस-पास इलाकों में रहते हैं। दरअसल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता रोंहिंग्या मुसलमानों का आतंकी चेहरा है। म्यांमार ने भी रोंहिंग्या पर आतंकी हमलों में संलिप्त होने का आरोप लगाया है। इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने कुछ समय पहले यह दावा किया था कि दक्षिण एशिया में उसके आतंकी काफी सक्रिय हैं। आईएस के इन सदस्यों के बांग्लादेश -म्यांमार में मौजूद होने के संकेत दिए गए थे। रक्षा विशेषज्ञों का आकलन है कि आईएस की जडें रोंहिंग्या मुसलमानों में हो सकती हैं। बांग्लादेश में आतंकी हमलों ने इस बात की पुष्टि की है। रोहिंग्या की अराकन रक्षा सेना का प्रमुख कमांडर कराची में पैदा हुआ था। सऊदी अरब में शिक्षा-दीक्षा लेने के बाद वह आईएस के दक्षिण एशिया संगठन का संचालन पर रहा है। रोहिंग्या अराकन रक्षा सेना भी इसी का हिस्सा है। बहरहाल, भारत ने हमेशा शरणार्थियो का स्वागत किया है हालांकि नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र की किसी भी शरणार्थी संधि पर हस्ताक्षर नहीं करा रखें हैं। 1980 और 1990 के दषक में भारत ने रोंहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों का खुले दिल से स्वागत किया था मगर तब स्थिति और थी। इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन का कोई वजूद नहीं था। निसंदेह, आईएस अथवा अल कायदा जैसे आतंकी संगठन बांग्ला देश और म्यांमार से आ रहे रोंहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों में अपनी जडें जमा रहे हैं, मगर इसमें उन रोंहिंग्या मुसलमानों का क्या दोष जो तीस-चालीस साल से भारत में रह रहे हैं। किसी भी व्यक्ति को इस बिला पर आतंकी करार नहीं दिया जा सकता कि वह मुसलमान है। तथापि, इस सच्चाई को नकारा नही जा सकता कि अगर शांतिप्रिय म्यांमर रोंहिंग्या मुसलमानों को बसाने के लिए तैयार नहीं है, फिर भारत उन्हें क्यों बसाए? रोंहिंग्या मुसलमान श रणार्थियो को लेकर भारत की नीति पहली बार स्पष्ट दिखाई दे रही है। मोदी सरकार किसी भी स्थिति में रोंहिंग्या मुसलमान शरणार्थियो को बसाने के लिए तैयार नही है। रोंहिंग्या शरणार्थियों पर बांग्लादेश और म्यांमार में भी तनातनी चल रही है। म्यांमार चीन के ज्यादा करीब है, इसलिए चीन से मध्यस्था के लिए कहा गया है। म्यांमार और चीन की दोस्ती भी एक अहम पहलू है। रोंहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने रोंहिंग्या शरणार्थियों को शरण न देने की भारत की नीति की कडी आलोचना की है। भारत को इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरुरत है।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






