राज्यसभा की नौ सीटों के लिए आठ अगस्त को हुए चुनाव में गुजरात की एक सीट पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई है। और यह सीट है कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की। इस सीट पर मुकाबला इस कद्र कांटेदार है कि कांग्रेस और भाजपा में एक-एक वोट के लिए मारी-मारी हुई है। नतीजतन, देर शाम तक भी इस सीट के परिणाम घोषित नहीं हो पाए थे। पार्टी प्रत्याशी की नैया पार लगाते-लगाते कांग्रेस की सांसें फूल गईं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल पार्टी में सोनिया और राहुल के बाद तीसरे नंबर के नेता माने जाते है। कांग्रेस में उनकी मर्जी के बगैर पत्ता भी हिलता नहीं है। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने के लिए उनकी अनुमति लेनी पडती है। अहमद पटेल ने इस बार गुजरात से पांचवी बार बतौर कांग्रेस प्रत्याशी राज्यसभा चुनाव लडा। आज तक उन्होंने इतना कडा और कांटेदार मुकाबला नहीं देखा जितना इस बार उन्हें झेलना पडा। भाजपा ने उनकी एक समय निश्चित मानी जाने वाली जीत को बेहद कांटेदार बना दिया। गुजरात से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मंगलवार को चुनाव हुए। राज्यसभा सदस्य विधानसभा सदस्यों द्वारा चुना जाता है। गुजरात में 181 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 57 सदस्य थे। छह विधायक पार्टी छोड गए। इससे कांग्रेस की सदस्य संख्या 51 रह गई है। इनमें बागी नेता शंकर सिंह वघेला और उनके पुत्र महेन्द्र सिंह भी है़। कुछ और विधायक वघेला समर्थक हैं और इन सभी ने राजपूत के पक्ष में कॅास वोटिंग की है। अहमद पटेल आसानी से जीत जाते अगर भाजपा ने कांग्रेस के बागी हुए पार्टी के मुख्य सचेतक बलवंत सिंह राजपूत को अपना तीसरा उम्मीदवार न बनाया होता। इसीलिए अहमद पटेल का चुनाव दिलचस्प हो गया। जीत के लिए प्रत्येक प्रत्याशी को फर्स्ट पेफरेंस के 45-45 वोट की दरकार थी। भाजपा के दोनों प्रत्याशी - राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी- की जीत सुनिश्चित करने के बाद भाजपा ने अपने 31 सरप्लस वोट तीसरे उम्मीदवार राजपूत को स्थानातंरित कर दिए और उन्हें जीत के लिए 14 सदस्यों के समर्थन की जरुरत थी। इन वोटों को हासिल करने के लिए भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी की। राजपूत कांग्रेस से बगावती शंकर सिंह वघेला के करीबी माने जाते हैं और भाजपा ने भी इसी बिला पर उन्हें अपना तीसरा प्रत्याशी बनाया था। इस स्थिति में वघेला की भूमिका निर्णायक मानी गई। वघेला ने मंगलवार को वोट डालने के बाद ऐलान कर दिया कि अहमद पटेल की हार तय है। वघेला कांग्रेस नेतृत्व से इसलिए नाराज हैं क्योंकि पार्टी ने उन्हें पंजाब में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की तरह गुजरात में कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने से इंकार कर दिया। बहरहाल, गुजरात में इस बार राज्यसभा चुनाव खासा विवादित रहा है। कांग्रेस ने अपने सदस्यों को पोचिंग से बचाने के लिए क्या कुछ नहीं किया। अपने 43 विधायकों को मंगलवार तक पहले बंगलुरु और बाद में आनन्द में छिपाकर रखा । मंगलवार को वोटिंग के बाद कांग्रेस ने अपने दो विधायकों की वोट को लेकर भारी बवाल खडा किया। राज्यसभा में मतदान करने के बाद संबंधित विधायक द्वारा अपने वोट को पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाने की परंपरा है। कांग्रेस के दो विधायकों ने अपना वोट कांग्रेस एजेंट को भी दिखाया और भाजपा को भी। क्रॉस वोटिंग से क्षुब्ध कांग्रेस शिकायत लेकर निर्वाचन आयोग तक चली गई। पीछे-पीछे भाजपा भी पहुंच् गई। बहरहाल, जीत कांग्रेस की होती है या भाजपा की, पर इतना तय है कि इस प्रक्ररण ने लोकतंत्र की जंगहंसाई करवाई है।
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