सडकों पर हिंसा का नंगा नाच। सभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद । सरकारी दफतर, मार्केट और व्यापारिक संस्थान भी बंद। न बसें चलीं और न ही रेल सेवाएं। व्यस्ततम सडकें भी सूनसान और मार्केट्स भी। गुंडागर्दी से भयभीत घरों में दुबके लोग। असुरक्षा का भय इतना कि जान बचाने के लिए घर-बार छोड सुरक्षित स्थानों के लिए लोगों का पलायन। यह नजारा हिंसा और आतंक से पीडित कश्मीर घाटी का नहीं है, अलबत्ता गत शुक्रवार को हरयाणा के खुबसूरत शहर पंचकूला का था । सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के पांच करोड से भी अधिक भक्तों के “भगवान“ गुरमीत राम रहीम इंसा को अदालत द्वारा दोषी पाए जाने से क्षुब्ध डेरा प्रेमियों ने शुक्रवार को आगजनी और हिंसा का जो तांडव मचाया, उस पर:“राम“ और “रहीम“ की आत्मा भी रोती होगी। अदालत का फैसला आने के फौरन बाद मात्र चार घंटे की आगजनी और हिंसा में 25 लोगों कौ मौत हो चुकी थी, दो सौ से ज्यादा घायल हो चुके थे। पंजाब के बरनाला में टेलिफोन एक्सचेंज को आग लगा दी गई। बठिंडा में पावर स्टेशन को फूक दिया गया। मलोट में रेलवे स्टेशन जला दिया गया। मानसा में आयकर विभाग में तोड-फोड की गई। कई जगह कर्फ्यू लगा दिया गया है। डेरा प्रेमियों ने सबसे ज्यादा भडास मीडियाकर्मियों पर निकाली। किसी की बहन से बलात्कार किए जाने पर लोग-बाग सडकों पर उतर आते हैं। मगर डेरा प्रेमियों को न्यायपालिका में भी विश्वास नहीं है। डेरा की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि उनके साथ अन्याय हुआ है। अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दो महिला अनुयायियों का यौन उत्पीडन करने के लिए दोषी पाया है। अगले सोमवार को उन्हें सजा सुनाई जाएगी। नियमानुसार, अदालत द्वारा दोषी पाए जाने पर मुजरिम को फौरन हिरासत में लेकर जेल भेज दिया जाता है। डेरामुखी को भी फैसले आने के बाद हिरासत में ले लिया गया और उन्हें कडी सुरक्षा में रखा गया है। 15 साल की सुनवाई के बाद पिछले सप्ताह ही पंचकूला स्थित अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 25 अगस्त की तारीख मुकरर्र की थी। अदालत का फैसला आने के बाद डेरा प्रेमियो द्वारा उपद्रव मचाने की भी पूरी-पूरी आशंका थी। इसी आशंका के मद्देनजर राज्य सरकार ने पंचकूला में काफी पहले से धारा 144 लगा दी गई थी। इसके बावजूद हजारों की संख्या में डेरा प्रेमी पंचकूला में तीन दिन से डेरा डाले हुए थे जबकि धारा 144 लागू होने पर पांच से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते हैं। प्रशासन की अकुशलता से क्षुब्ध पंजाब और हरयाणा हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए पुलिस के डीजीपी को बर्खास्त करने की बात कही है। 1948 में शाह मस्ताना ने डेरा सच्चा सौदा की नींव रखी थी। 1990 में गुरमीत सिंह ने गद्दी संभाली और तब से डेरा सच्चा और विवाद का चोला-दामन का साथ रहा है। 1998 में बेगू गांव के एक बच्चे की डेरा के वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। तब खबर छापने वाले अखबार को डेरा समर्थकों ने धमकाया था। इस पर डेरा को माफी मांगनी पडी थी। 2002 में डेरा प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह का कत्ल कर दिया गया था और आरोप डेरा सच्चा सौदा पर लगे थे। 2002 में ही डेरा की एक साध्वी ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर यौण शोषण का आरोप लगाया था। 2002 में ही सिरसा के पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति की डेरा के खिलाफ लिखने पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 2007 में डेरामुखी ने गुरु गोविंद सिंह की वेशभूषा धारण कर सिखों से सीधा टकराव मोल लिया था। और भी कई मामले हैं जिन्हें लेकर डेरा विवादों में रहा है। बहरहाल, डेरा प्रेमियों के हिंसक उपद्रव ने एक बार फिर राज्य सरकार की किरकिरी हुई है।एक बार फिर न्यायपालिका मदद को आगे आई। हाई कोर्ट ने डेरा प्रमियों के उपद्रव से हुए नुकसान की भरपाई डेरा की संपत्ति बेचकर वसूलने के आदेश दिए हैं।
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