राज्यसभा चुनाव में नोटा (नन ऑफ दी अबॉव ऑप्शन ) के विकल्प पर सुप्रीम कोर्ट की ताजा व्यवस्था से कांग्रेस के साथ अन्य दलों को भी झटका लग सकता है। कांग्रेस द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वीरवार को साफ-साफ कहा कि राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प मे कोई खोट नहीं है। न्यायालय ने कांग्रेस को तीन साल बाद नोटा के विकल्प का विरोध करने पर फटकार भी लगाई है। मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने जनवरी 2014 में नोटा संबंधी अधिसूचना जारी की थी और कांग्रेस को तब इसके विरोध की जरुरत नहीं पडी। अब क्यों? दरअसल, गुजरात से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए आठ अगस्त को मतदान होना है। राज्यसभा चुनाव संबंधी अधिसूचना में यह भी कहा गया कि मतदान में भी विधायकों को नोटा का विकल्प दिया जाएगा। अभी तक राज्यसभा चुनाव में इस विकल्प की जरुरत ही नहीं पडी थी। अमूमन, राज्यसभा के चुनाव में विधायक पार्टी उम्मीदवार को ही वोट डालते रहे हैं। और मतदान खुले में किया जाता है। गुजरात में नोटा के विकल्प से कांग्रेस का लाल-पीना स्वभाविक है। कांग्रेस को इस बात का डर है कि पार्टी छोड गए छह विधायक उसके व्हिप का उल्लघंन कर सकते हैं और इससे उसके उम्मीदवार अहमद पटेल की जीत की संभावना पर असर पड सकता है। गुजरात में राज्यसभा चुनाव की घोषणा होते ही कांग्रेस के दिग्गज नेता शंकर सिंह वघेला ने पार्टी छोड दी और उनके साथ पांच अन्य विधायक भी पार्टी छोड चुके हैं। इससे 182-सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या घटकर 51 ही रह गई है। कांग्रेस ने अहमद पटेल को पांच वी बार अपना उम्मीदवार बनाया है। पटेल के चुनाव को चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए भाजपा ने कांग्रेस छोडकर बाहर आए बलवंत सिंह राजपूत को अपना तीसरा उम्मीदवार बनाया है। राजपूत ने जैसे ही कांग्रेस छोड दी, भाजपा ने तुरंत उन्हें अपना तीसरा उम्मीदवार बना लिया। राजपूत कांग्रेस के मुख्य सचेतक भी थे। राजपूत के तीसरी सीट के लिए चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस के लिए मुश्किलें खडी हो गई हैं। भाजपा अपने सरप्लस वोट राजपुत के पक्ष में डलवा सकती है और नोटा के विकल्प से कांग्रेस का खेल बिगाड सकती है। इसीलिए कांग्रेस ने नोटा के विकल्प को रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली मगर यहां से भी पार्टी को निराशा ही हाथ लगी। भाजपा कौ पोचिंग से भयभीत कांग्रेस ने अपने 44 विधायकों को कर्नाटक के एक रिजार्ट में छिपा लिया मगर केन्द्र के लंबे हाथों ने यहां भी काग्रेस का पीछा नहीं छोडा। आयकर अधिकारियों ने रिजार्ट पर छापा मार कर इसके मालिक और कर्नाटक के उर्जा मंत्री को ही घेर लिया। गुजरात में अहमद पटेल को धूल चटवाकर भाजपा कांग्रेस को और कमजोर करना चाहती है। अहमद पटेल न केवल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव हैं, अलबत्ता कांग्रेस में राहुल गांधी के बाद उनका ही सिक्का चलता है। पटेल इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के साथ भी काम कर चुके और उन्हें राजनीतिक जोड-तोड का लंबा अनुभव है। अहमद पटेल की पराजय से कांग्रेस में सोनिया और राहुल गांधी की स्थिति और कमजोर हो सकती है। गुजरात में वघेला प्रकरण से राहुल गांधी के नेतृत्व के खिलाफ पहले ही बगावत के सुर उठ रहे हैं। इस साल के अंत में हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविन्द्र सिंह सुक्खू खेमों में बुरी तरह से बंटी हुई हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं को इस बात का मलाल है कि चुनाव सिर पर होने के बावजूद राहुल गांधी इस मामले को संभाल नहीं पाए हैं। और अगर गुजरात के राज्यसभा चुनाव में काग्रेस हार गई तो हिमाचल प्रदेश में भी बगावत हो सकती है। बहरहाल, नोटा का मामला इतना अहम नहीं है जितना कांग्रेस नेतृत्व के राजनीतिक प्रबंध की लगातार विफलता। अहमद पटेल की पराजय इसे और तल्ख बना सकती है।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






