प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों से नए भारत (न्यू इंडिया) के निर्माण का वायदा किया है। ऐसा भारत जहां हर छोटे-बडे, अमीर-गरीब, युवा-उम्रदराज, हर महिला और पुरुष की आकांक्षाएं पूरी हों और उन्हें खुशाहल जीवन का भरपूर सुख मिले। 71वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री ने “ नए भारत“ के इस वायदे को पूरा करने के लिए 2022 की समय सीमा तय की है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने “भारत छोडो“ आंदोलन की 75वीं वर्शगांठ पर भी देषवासियों से अगले पांच साल में भारत छोडो आंदोलन के जज्बे से काम करते हुए “भारत जोडो” का आहवान किया था। देश का प्रधानमंत्री अगर “नए भारत“ के निर्माण का वायदा करता है, तो करोडों लोगों की उम्मीदों को पंख लगना स्वभाविक है। पर सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री अगले पांच साल में इस संकल्प को पूरा कर पाएंगें या यह वायदा भी “ सौ दिन में काला धन स्वदेश लाने“, देश में आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान को मुंहतोड जवाब देने और “ अच्छे दिन“ लाने के वायदे जैसे ही साबित होंगे? निसंदेह, मोदी सरकार ने नोटबंदी और बेनामी संपत्ति कानून को सख्ती से लागू किया है और काली कमाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। महंगाई भी पहले की अपेक्षा कम हुई है। अगर अच्छे दिन नहीं आए, तो आम आदमी के इतने बुरे दिन भी नहीं है। इन सब तथ्यों से प्रधानमंत्री के संकल्प को बल मिल रहा है। जमीनी सच्चाई भी “नए भारत” के निर्माण के माकूल है। भारत इस समय दुनिया का युवातम मुल्क है और उसके पास युवा शक्ति का अथाह भंडार है। देश की 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से कम आयु वालों की है। चीन समेत दुनिया का कोई भी मुल्क इस मामले में भारत का प्रतिद्धंद्धी तक नही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोश (आईएमएफ) का आकलन है कि भारत इस समय दुनिया की तेजी से आगे बढती एकमात्र अर्थव्यवस्था है। अगले दो वर्षों में भारत की विकास दर 7.2 और 7.7 के आसपास रहेगी। विकास की यह दर चीन और अन्य ब्रिक्स मुल्कों से काफी ज्यादा है। पीडब्ल्यूसी (प्राइसवाटरहाउकूपर्स) का आकलन है कि मौजूदा विकास दर से 2025 तक भाात 15.7 खरब डालर जीडीपी के साथ दुनिया की चौथी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। 2050 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद 44.1खरब डालर को भी पार कर जाएगा। तब भारत 34.1 खरब डालर वाली अमेरिकी अर्थव्यवस्था से भी बडा बन जाएगा । इन आंकडों से भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद बेशुमार क्षमताओं की झलक मिलती है। मगर तीव्र विकास के तब तक कोई मायने नहीं जब तक देश का सबसे कमजोर और पिछडा आदमी भी विकास से समग्र तौर पर लाभान्वित न हो पाए। इसके लिए इन्कलूसिव ग्रोथ अपरिहार्य है। पिछले कई सालों से सरकार इन्कलुसिव ग्रोथ की बात तो कर रही है मगर इसे संजीदगी से लागू नहीं किया जा सका है। देश में हर साल पहले भी सूखा पडता है और फिर बरसात में भारी पानी बरसने के कारण बाढ आती है। इससे खडी फसलों को खासा नुकसान पहुंचता है। देष के समक्ष इस तरह की कई चुनौतियां हैं जिनका हर साल आम आदमी का साबका पडता है मगर आजादी के सात दषक में भी इन सम्स्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। हर नागरिक को स्वास्थय सुविधा मुहैया कराना और स्वच्छता दूसरी बडी चुनौती है। इनसे देष आज भी जूझ रहा है। प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान का अच्छा असर पडा है मगर स्वास्थय क्षेत्र में देष अभी काफी पीछे है। षहर हो या गांव चौबीस घंटे बिजली सप्लाई और घर-घर में षुद्ध पीने का पानी आज तक मुहैया नहीं हो पाया है। मोदी सरकार ने चौबीस घंटे की बुजली सप्लाई का वायदा कर रखा है। तीन साल में भी यह पूरा नहीं हो पाया है। गरीबी, भुखमरी, सामाजिक-आर्थिक असमानता जस की तस है। नए भारत को इन विसंगतियो से मुक्त होना चाहिए।
यह ब्लॉग खोजें
ब्लॉग आर्काइव
- अप्रैल (2)
- मार्च (1)
- सितंबर (2)
- अगस्त (2)
- जुलाई (3)
- जून (2)
- मई (2)
- अप्रैल (4)
- मार्च (9)
- फ़रवरी (7)
- जनवरी (6)
- दिसंबर (11)
- नवंबर (7)
- अक्टूबर (4)
- सितंबर (10)
- अगस्त (22)
- जुलाई (2)
- जून (11)
- मई (12)
- अप्रैल (7)
- मार्च (6)
- फ़रवरी (1)
- दिसंबर (5)
- नवंबर (4)
- अक्टूबर (5)
- सितंबर (17)
- अगस्त (33)
- जुलाई (28)
- जून (21)
- मई (30)
- अप्रैल (20)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (23)
- जनवरी (23)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (22)
- अक्टूबर (22)
- सितंबर (19)
- अगस्त (22)
- जुलाई (21)
- जून (19)
- मई (20)
- अप्रैल (19)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (20)
- जनवरी (19)
- दिसंबर (22)
- नवंबर (21)
- अक्टूबर (21)
- सितंबर (21)
- अगस्त (16)
- जुलाई (15)
- जून (20)
- मई (18)
- अप्रैल (21)
- मार्च (20)
- फ़रवरी (21)
- जनवरी (24)
- दिसंबर (25)
- नवंबर (27)
- अक्टूबर (23)
- सितंबर (27)
- अगस्त (35)
- जुलाई (22)
Copyright 2015 | Chander M Sharma . Blogger द्वारा संचालित.






