सोमवार, 14 अगस्त 2017

चीनियों को मिर्ची क्यों लगी?

भारत और चीन के बीच डोकलाम सीमा विवाद हल कूटनीतिज्ञ् प्रयासों से निकल सकता है। डोकलाम को लेकर हालांकि चीन को भारत के स्टैंड से मिर्ची लगी हुई है मगर बीजिंग गीदडभभकियां देने के अलावा और कुछ कर भी नहीं सकता । सामरिक हालात उसके पक्ष में नहीं हैं। इसीलिए, चीन ने भारत को अपने सैनिक सौ मीटर पीछे हटाने की  पेशकश  करके विवाद को सुलझाने के प्रति लचीला रुख दिखाया है। भारत ने  इस पेशकश  को  नहीं माना है और चीन से अपने सैनिक अढाई सौ मीटर पीछे हटाने को कहा है। चीन ने ऐसा करने से मना कर दिया है। इससे विवाद को खत्म करने के कूटनीति प्रयास को फिलहाल झटका लगा है मगर दोनों देशों  के बीच देर-सबेर इस बात पर सहमति बनने की संभावना बनी हुई है। इस बीच एक और सकारात्मक संकेत चीनी नौसेना ने दिए हैं। चीनी नौसेना के एक अधिकारी ने कहा है कि भारतीय नौसेना के साथ  उसका कोई विवाद नहीं है और दक्षिण चीन सागर में अब तक भारत का स्टैंड सकारात्मक रहा है। विशाल  भारतीय महाद्धीप को ड्रग और अवैध हथियारों के समुद्री तस्करों से मुक्त कराने में  चीनी नीसेना, भारतीय नौसेना से सक्रिय योगदान की उम्मीद रखती है। डोकलाम सीमा विवाद पर तनावपूर्ण  माहौल के  मद्देनजर  चीनी नौसेना का यह बयान काफी महत्वपूर्ण  है। वैसे चीनी सेना के साथ-साथ वहां की अवाम डोकलाम विवाद को लेकर भारत से क्षुब्ध है। चीनी मीडिया के एकतरफा प्रायोजित प्रचार से चीन के लोगों को यही गलतफहमी है कि सारा विवाद भारत ने खडा कर रखा है और चीन की इसमें कोई भूमिका नहीं है। चीन में भारत जैसी “अभिव्यक्ति की स्वत्रंतता“ नहीं है और वहां जनता को वही पढाया और बताया जाता है जो कम्युनिस्ट सरकार चाहती है। तथापि सोशल मीडिया से चीन का यह परिदृष्य काफी बदला है हालांकि इस पर भी वहां कडे प्रतिबंध हैं। चीन के सिचुआन क्षेत्र में आठ अगस्त को आए 7.1 तीव्रता वाले भूंकप पर प्रधानमंत्री की संवेदनाओं को भी लोगों ने डोकलाम विवाद से जोडा है और तल्ख प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। इस त्रासदी में कम-से-कम 20 लोग मारे गए और 430से ज्यादा घायल हुए हैं। अधिकतर लोगों ने मोदी से डोकलाम विवाद पर ध्यान देने की नसीहत दी है और कहा कि इसका हल ही पीडित परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी। डोकलाम विवाद को बातचीत से सुलझाना चीन की सामरिक विवशता है। डोकलाम से कहीं ज्यादा चीन के लिए दक्षिण चीन सागर मायने रखता है। यह क्षेत्र न केवल तेल और गैस से समृद्ध है, अलबता सामरिक  दृष्टि  से भी अहम है। दुनिया का आधे से ज्यादा मर्चेंट ट्रेड का आवागमन भी इसी क्षेत्र से होता है और वैश्विक  एक तिहाई समुद्री ट्रैफिक भी इसी सागर से गुजरता है। भारतीय उपमहाद्धीप से मल्लाका जलडमरुमध्य के रास्ते पूर्वी एशिया के लिए बडी मात्रा में तेल निर्यात भी बरास्ता  दक्षिण चीन सागर रुट से ही किया जाता है। इस निर्यात का आयतन स्वेज नहर के रास्ते से तीन गुना और पनामा नहर से पंद्रह गुना ज्यादा है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि चीन के लिए  दक्षिण चीन सागर का कितना महत्व है। चीन उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच जारी मिसाइल मल्ल युद्ध में भी बुरी तरह से उलझा हुआ है। चीन, उत्तर कोरिया का सबसे बडा मित्र है और दोनों के बीच सैन्य सहयोग संधि है। अमेरिका अगर पहले आक्रमण करता है तो सैन्य सहयोग संधि के मुताबिक  चीन को  उत्तर कोरिया का  साथ देना होगा। यानी चीन को अमेरिका से भी युद्ध करना होगा। कोरियाई प्रायद्धीप में हालात डोकलाम से कही ज्यादा खराब हैं और वहां कभी भी युद्ध छिड सकता है। चीन के लिए एक साथ अमेरिका और भारत से युद्ध करना आसान नहीं है। बहरहाल, चीन और भारत में बातचीत और कूटनीतिज्ञ प्रयास ही डोकलाम विवाद का एकमात्र हल है।