लोकतंत्र में निष्पक्ष , निर्भीक एवं स्वतंत्र चुनाव के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड का होना अवश्यंभावी माना जाता है। चुनाव लड रहे सभी राजनीतिक दलों को भी वही सुविधा मिलनी चाहिए जो सत्तारूढ दल को उपलब्ध होती है। और सरकारी खहाने को लुटाने की कतई अनुमति नहीं होनी चाहिए। सरकारी खजाने को लूटाकर सता पाना लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। भारत में सत्तारूढ दल को प्रतिद्धंद्धी दलों की तुलना में ज्यादा एडवांटेज मिलती है। चुनाव समीप आए नहीं, सत्तारुढ दल सरकारी खजाने को लुटाने में कोई कसर नहीं छोडते हैं। इसी साल के अंत में हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव होने हैं। गुजरात विधानसभा की टर्म 20 जनवरी, 2018 और हिमाचल प्रदेश विधानसभा की टर्म 7 जनवरी, 2018 को खत्म हो रही है। अगले साल 2018 के शुरू में पूर्वोतर नगालैंड, मेघालय विधानसभा के चुनाव होने हैं, फिर कर्नाटक विधानसभा के। नगालैंड, त्रिपुरा और मेघालय विधानसभा की टर्म मार्च 2018 और कर्नाटक विधानसभा की मई, 2018 में ख्त्म हो रही है। अगले साल के उत्तरार्ध में राजस्थान, मध्य प्रदेश , छतीसगढ और मिज़ोरम विधानसभाओं के चुनाव कराए जाने हैं। मिजोरम विधानसभा की टर्म दिसंबर 2018 को राजस्थान, मध्य प्रदेश एव़ं छतीसगढ विधनसभाओं की टर्म जनवरी 2019 में ख्त्म हो रही है। इस हिसाब से अगला पूरा साल विधानसभा चुनाव कराते ही बीत जाएगा। साल 2017 भी कमोवेश विधानसभा चुनाव कराने में ही चला जाएगा। इस साल के शुरु में पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश , मणिपुर और गोवा विधानसभाओं के चुनाव कराए गए थे और अब गुजरात और हिमाचल पदेश में चुनाव कराए जाने हैं। मई, 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं। एक के बाद दूसरे चुनाव कराने से न केवल निर्वाचन आयोग और सरकारी मशीनरी पर, अलबत्ता देश के वित्तीय संसाधनों पर भी खामख्वाह का बोझ पड रहा है। देश में मतदाताओं को रिझाने की राजनीतिक दलों की रिवायत ने विभिन्न राज्यों की माली हालत खस्ता करके रख दी है। चुनाव की बेला पर बडी-बडी परियोजनाओं और उदार वित्तीय पैकेज देने की रिवायत है मगर चुनाव होते ही इस तरह की उदार वित्तीय सहायता अता-पता तक नहीं मिलता है। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य के लिए 1.25 खरब करोड की विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। इसमें 54,713 करोड रु राष्ट्रीय राज मार्ग के लिए थे। इस विशाल राशि के अलावा 13,820 करोड रु प्रधानमंत्री सडक योजना के तहत आवंटित किए गए थे। इस तरह बिहार को राष्ट्रीय राज मार्ग के लिए ही तब 68,533 करोड रु आवंटित थे। इस हिसाब से राज्य के राष्ट्रीय राज मार्ग अब तक चकाचक हो जाने चाहिए थे मगर ऐसा नही हुआ है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पडा था और नीतिश कुमार-लालू यादव का महागठबंधन सत्ता में आया था। इसलिए यह पैकेज राज्य को नहीं मिला। निष्कर्ष यह है कि सत्ता पाने के लिए सरकारी खजाने का इस्तेमाल किया जाता है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान यात्रा के दौरान एक दिन में 15,100 करोड रु की परियोजनाओं का शिलान्यास किया। जाहिर है यह सब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को सामने रखकर राजनीतिक लाभ के लिए किया गया है। हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी सत्तारूढ दल मतदाताओं को लुभाने के लिए दोनों हाथों से सरकारी खजाना लुटा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश की माली हालत बेहद खराब है। सरकार को अपने रोजमर्रा के खर्चें पूरा करने के लिए भी कर्जा लेना पड रहा है। विधानसभा चुनाव की बेला पर पंजाब और उतर प्रदेश की तत्कालीन सरकारों ने भी मतदाताओं को रिझाने के लिए खुले हाथ से खजाना लुटाया था। पंजाब की वित्तीय हालात इस कद्र खराब थी कि अकाली-भाजपा सरकार जमीन-जायदाद बेच कर अपने खर्चे पूरे कर रही थी। यह सब कानूनन बंद होना चाहिए और चुनाव में लेवल प्लेइंग फील्ड सुनिश्चित होनी चाहिए।
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