मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था (फ्री मार्केट इकॉनॉमी) में बडी मछली कैसे छोटी मछलियों को साबुत निगल जाती है, भारत के समृद्धतम उधोगपति मुकेश अंबानी का रिलायंस जियो इसकी ताजा मिसाल है। शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज की एनुअल जनरल मीटिंग में मुकेश अंबानी ने जियो फोन का अनावरण किया। ग्राहकों को लंबे समय से इस फोन का इंतजार था। जियो का यह फोन ग्राहकों को मुफ्त में मिलेगा और वह भी अनलिमिटेड 4जी डेटा के साथ। ग्राहकों को बतौर सिक्योरिटी 1500 रु जमा कराने पडेंगे जोकि तीन साल पूरा होने पर वापस कर दिए जाएंगे। कंपनी का दावा है कि जियो फोन में वे सारे फीचर्स मौजूद हैं, जो बाजार में तीन से साढे चार हजार रु कीमत वाले स्मार्टफोन में उपलब्ध हैं। इसे कहते हैं “हींग लगे न फटकरी, रंग आए चोखा“। बिजनेस हो तो ऐसा। कंपनी को ग्राहकों से अरबों की फंडिंग मिल जाएगी और तीन साल तक ग्राहक भी पक्के । किसी कंपनी के पास ग्राहकों का विशाल आधार तो वह कई अन्य स्त्रोतों से आय जुटा सकती है। रिलायंस कंपनी भी, संभवतय, इसी फंडे पर काम कर रही है। जियों फोन और नई स्कीमें बाहर आते ही बाजार में भारती एयरटेल और आइडिया सेल्युलर के शेयर औंधे मुंह गिर गए। एयरटेल के शेयर्स में साढे तीन फीसदी और आइडिया सेल्युलर के शेयर्स में साढे छह फीसदी की गिरावट आई। ,मुकेश के भाई अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन के शेयर्स तीन फीसदी गिरे। शुक्रवार को ही मुकेश अंबानी ने रिलायंस के शेयरधारकों को देश का अब तक का सबसे बडा डिविडेंट भी दिया। इससे पता चलता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज कितनी बुलंदियों पर है। वीरवार को रिलायंस द्वारा जारी पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में कंपनी के शुद्ध लाभ में 9 फीसदी का इजाफा दिखाया गया था। यह विशेषज्ञों के आकलन से कहीं ज्यादा था। रिलायंस का पेट्रोकेमिक्ल्स और ऑयल-गैस खोज का कारोबार चरम पर है। रिलायंस जियो के टेलिकॉम सेक्टर में कदम रखते ही उधोग में खलबली मची हुई है, खासकर अब तक घरेलू मार्केट में लीडर माने जानी वाली एयरटेल और आइडिया सेल्युलर जैसी कंपनियां परेशान हैं। अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशन का तो धंधा हौ चौपट हो गया है और कंपनी भारी घाटे में चल रही है। यद्यपि मुकेश अंबानी की जियो पर भी मुफ्त स्कीमों से भारी वित्तीय बोझ पड रहा है मगर कंपनी की मजबूत वित्तीय के कारण जियो बाजार में लंबे समय तक बने रहने में सक्षम है। एयरटेल का कहना है कि कॉल कनेक्शन चार्जेज से किसी तरह का फायदा होने की बजाए रिलायंस को हर तिमाही 550 करोड रु का नुकसान हो रहा है। रिलायंस जियो का आरोप है कि एयरटेल मोबाइल टर्मिनेशन चार्जेज से ही भारी मुनाफा कमा रही है और अब तक दो बडी टेलिकॉम कंपनियां ग्राहकों से 1.2 लाख करोड रु की अतिरिक्त कमाई कर चुकी हैं। कंपनियों का नाम लिए बगैर रिलायंस का आरोप है कि इस राशि मेंसे नंबर एक कंपनी ने 73,385 करोड रु और तीसरे स्थान वाली कंपनी ने 45,940 करोड रु अतिरिक्त वसूले हैं। निसंदेह, मनमाने चार्जेज लगाकर अब तक टेलिकॉम कंपनी ग्राहकों का जमकर शोषण कर रही थी। आम ग्राहक को इस बात की कोई जानकारी नहीं होती है कि देष की रेगुलेटर एजेंसी ”ट्राई“ ने टेलिकॉम सर्वसिस के लिए क्या-क्या चार्जेज तय कर रखे हैं। कंपनियां जो वसूलती है, ग्राह्क चुपचाप उसे मान लेते हैं। रिलायंस जियो के आने से स्थिति काफी तक बदल गई है। अब कंपनियां मीडिया में विज्ञापनों के माध्यम से ग्राहकों को बता रही है कि उनके साथ अब तक कैसी-कैसी ठगी की गई है। तथापि, इस गला काट प्रतिस्पर्धा में सबसे बडा खतरा इस बात का है कि बडी मछली छोटी को निगल सकती है और अंततोगत्वा बाजार में उसका एकाधिकार हो सकता है। यह स्थिति और भी खराब है।
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