गुरुवार, 20 जुलाई 2017

बरसात में साजिश की “उमस“

मैदानी इलाकों में बरसात में उमस जितनी परेशान करती है, उससे कहीं ज्यादा पहाडों में उफनती नदियां और नाले जनजीवन को बाधित करते हैं। और अगर भारी बारिश  में अपेक्षाकृत शान्तचित  लोग-बाग सडक पर उतर आएं तो समझ लीजिए मामला अति गंभीर है। पिछले एक सप्ताह से भी ज्यादा समय से देश  का अग्रणी सेब उत्पादक क्षेत्र  शिमला जिला अपनी “बिटिया“ के नृषंस बलात्कार और जघन्य हत्या पर खौल रहा है। कोटखाई तहसील की बीपीएल (बिलो पावर्टी लाइन) परिवार से संबंधित सोलह वर्षीय  गुडिया चार जुलाई को स्कूल छूटने से पहले ही घर के लिए अकेले रवाना हुई। और यही उसके जीवन की सबसे बडी भूल साबित हुई । दो दिन बाद छह जुलाई को गुडिया का शव मुख्य सडक से लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर बरामद हुआ। इस मासूम की बलात्कार के बाद जघन्य हत्या कर दी गई। तफतीश  से पता चला कि स्कूल से घर लौटते समय गुडिया को एक गाडी चालक ने लिफ्ट दी थी। गाडी मे पांच और लोग भी थे और सब-के-सब नशे  मे धुत थे। पुलिस के मुताबिक लडकी  के साथ रास्ते में ही इन सभी ने पहले बारी-बारी बलात्कार किया और फिर जान से मार दिया। उसके नग्न  शव के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही  समूचा हिमाचल दहल गया। पुलिस की जांच का आलम यह था कि इस इस जघन्य आपराधिक घटना के एक सप्ताह तक भी अपराधियों को पकडा नहीं जा सका। जन दबाव पडने पर खानापूर्ति के लिए आनन-फानन में 13 जुलाई को पुलिस ने छह आरोपियों को पकडा। इममे दो नेपाली मूल के और दो पौडी गढवाल के थे। हत्या-बलात्कार के प्रमुख आरोपी वाहन चालक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बुधवार 19 जुलाई को इस प्रकरण के नेपाली मूल के एक आरोपी की कोटखाई पुलिस हिरासत में ही गला घोंटकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद जनाक्रोश   सातवें आसमान पर पहुंच गया। क्षुब्ध जन सैलाब ने थाने पर हमला बोल दिया और इसे आग लगा दी। जनता को इस बात का जबरदस्त गुस्सा था कि सबूत मिटाने की गर्ज  से पुलिस की मदद से ही आरोपी की हत्य की गई। पुलिस की इस बात पर कौन विष्वास करेगा कि आरोपियों में किसी बात पर झगडा हुआ और पुलिस की मौजूदगी में ही थाने में एक आरोपी ने दूसरे की  हत्या कर दी। पुलिस की तफ्तीश  में पहले ही कई छेद हैं।  लड्की के साथ सडक से महज दो सौ मीटर की दूरी पर सामूहिक बलात्कार किया जाता रहा। वह चीखी-चिल्लाती रही मगर किसी को उसकी आवाज तक सुनाई नहीं दी। दो दिन तक सडक के समीप उसकी लाश  पडी रही मगर, किसी भी जानवर ने उसे छुआ तक नहीं। लोगों को पूरा भरोसा है कि लडकी से किसी सुरक्षित स्थान पर बलात्कार किया गया और बाद में उसकी लाश  को सडक के समीप जंगल में फेंक दिया   गया। आशंका  है कि असली अपराध क्षेत्र के कुछ रसूखदार लोग हैं और पुलिस उन पर हाथ डालने से पीछे हट रही है। एक जमाने में ठाकुर राम लाल इस क्षेत्र का नुमाइंदगी किया करते थे। डाक्टर वाईएस परमार के बाद वे राज्य के मुख्यमंत्री बने और बाद में आंध्र प्रदेश  के राज्यपाल भी रहे। इस हलके में वे खासे लोकप्रिय थे और उन्होंने एक बार इसी हलके से मौजूदा और  तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भी पराजित किया था। ठाकुर राम लाल के रहते इस हलके को हिमाचल का “जेएंडके“ कहा जाता था। कोटखाई के साथ-साथ जुब्बल भी इस विधानसभा हलके का हिस्सा है।  ठाकुर राम लाल के पोते रोहित ठाकुर अब इस हलके की नुमाइंदगी कर रहे हैं। भाजपा से पूर्व मंत्री नरेन्द्र बरागटा इस हलके की नुमाइंदगी कर चुके हैं। बहरहाल, गुडिया प्रकरण ने वीरभद्र सरकार को कटघरे में खडा कर दिया है। शिमला जिला कांग्रेस का गढ माना जाता है। मगर इस प्रकरण से कांग्रेस के इस गढ में विपक्ष ने गहरी सेंध लगाई है।