बुधवार, 12 जुलाई 2017

श्रद्धालुओं की “अमर यात्रा“

सोमवार को  दक्षिण कश्मीर  के अनंतनाग में अमरनाथ की यात्रा से लौट रहे श्रद्धालुओं पर आतंकी हमले ने इस पवित्र यात्रा की सुरक्षा पर फिर सवाल खडे किए हैं। इस आतंकी हमले में पांच महिलाओं समेत सात लोग मारे गए और 19 लोग घायल हो गए। घायलों में कुछ पुलिसकर्मी भी  शामिल है। आतंकियों का निशाना भरी बस में सवार  गुजरात और महाराष्ट्र  के  56 तीर्थयात्री थे। मगर बस चालक की बहादुरी से 47  तीर्थयात्रियों की जाने बच गईं।  भारी गोलीबारी के बीच चालक बस को दो किलोमीटर तक चलाते हुए समीपवर्ती सैन्य कैंप तक सुरक्षित ले गया। समूचा देश  इस मुसलमान बस चालक की बहादुरी को कोटि-कोटि सलाम कर रहा है।  15 साल पहले 1 अगस्त, 2000 को भी आतंकियों ने  अमरनाथ श्राइन बोर्ड के पहलगाम स्थित बैस कैंप पर हमला किया था और इसमें 45 तीर्थयात्री मारे गए थे। खुफिया एजेंसियों ने अमरयात्रा यात्रा के दौरान आतंकी हमले की पहले ही चेतावनी दे रखी थी। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन  लश्कर  के आतंकियों ने यह हमला करवाया है। सरकार ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और राज्य पुलिस के लगभग एक लाख जवान तैनात कर रखे हैं।  फिर भी आतंकी हमला हो गया। सुरक्षा एजेसिंयां इस बात का पता लगाने में जुट गईं है कि भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद आखिर सुरक्षा की चूक हुई तो कहां हुई? इस तीर्थयात्रा का संचालन अमरनाथ श्राइन बोर्ड  करता है। राज्यपाल इस बोर्ड के अध्यक्ष है। जम्मू-कश्मीर  में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि “इस हमले से कश्मीरियों  का सिर  शर्म से झुक गया है। यह हमला कश्मीरी  लोकचार के खिलाफ है। कश्मीरी  अपने अतिथियों की सुरक्षा की पूरी गारंटी लेते हैं“।  यही बात अलगाववादी नेताओं ने भी कही है। तथापि मुख्यमंत्री और अलगाववादी नेता  यह बात भूल गए है कि लोकाचार सभ्य समाज के लिए होता है, हैवान-शैतानों के लिए नहीं। आतंकियों का कोई दीन-ईमान नहीं होता।  इस हमले की चौतरफा निंदा हो रही है। यहां तक कि कश्मीर  के अलगाववादी नेताओं ने भी हमले की तीखी निंदा की है। सोषल मीडिया पर जाने-माने लेखक चेतन भगत ने कहा है “ जब जुनैद की हत्या हुई थी, तो मीडिया ने कहा था कि उसे मुसलमान होने की वजह से मारा गया। तो फिर ये क्यों न कहा जाए कि जो लोग हमले में मरे हैं, उन्हें हिन्दू होने की वजह से मारा गया है“। और यही सच्चा ई भी है। आतंकी यह बार भली-भांति जानते हैं कि हिंदू ही अमरनाथ की तीर्थयात्रा करते हैं। लोगों को इस बात का ज्यादा गुस्सा है कि भाजपा की केन्द्र और राज्य में सरकारे होते हुए भी  तीर्थयात्रियों पर  आतंकी हमले जारी है। विपक्ष में रहते हुए भाजपा तीर्थयात्रिओं की फुलप्रूफ सुरक्षा मुहैया कराने की बडी-बडी बातें किया करती थी। विरोधस्वरुप भाजपा के गढ जम्मू में आज बंद जरुर रखा गया। लोगों को इस बात का ज्यादा गुस्सा है कि अगर सउदी अरब  मस्जिद पर आत्मघाती आतंकी हमले को विफल कर सकती है तो भारतीय सुरक्षा एजेसिंयां ऐसा क्यों नहीं कर सकती। इसी साल रमजान माह  जून में  सउदी अरब की सुरक्षा एजेसिंयों ने  मक्का में अत्मघाती हमले को विफल कर दिया था।  अवाम के लिए यह दुखद स्थिति है कि तीर्थयात्री  न तो सुकून से कैलाश  मानसरोवर की  यात्रा कर पा रहे हैं और न ही अमरनाथ की यात्रा। कश्मीर  में हालात सामान्य नहीं हैं। घाटी में आए दिन सुरक्षा बलों पर ही आतंकी हमले हो रहे हैं। अगर सुरक्षा बल अपनी ही सुरक्षा नहीं कर सकते है, तो अवाम की सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जा सकती है। यही यक्ष प्रष्न अवाम को खाए जा रहा है। आखिर देश  किस ओर जा रहा है? अब बहुत हो गया। बडे-बडे दावे करना बंद कीजिए और कुछ करके दिखाए।