जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में सपन्न जी 20 शिखर सम्मेलन में पहली बार दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका अपनी चारसौबीसी के लिए पूरी तरह से अलग-थलग पड गया। एक तरफ दुनिया के साधन संपन्न 19 देश थे तो दूसरी तरफ अकेला अमेरिका। हर मुकाम पर हमेशा दुनिया का नेतृत्व करने वाले अमेरिका को सम्मेलन में सबसे खरी-खोटी सुननी पडी। सम्मेलन के बाहर प्रदर्शनकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जमकर नारे लगा रहे थे। हैम्बर्ग में हिंसक प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के अवरोधक तोड डाले। दुकानें लूट लीं। पुलिस ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया। हालात इस कदर बिगड गए कि अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को अपनी गतिविधियां सिकोडनी पडी। और यह सब राष्ट्रपति ट्रंप के अखकडपन और खालिस देसी सोच का परिणाम है। अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से पीछे हट चुका है। जी 20 सम्मेलन में भी अमेरिका को मनाने की भरपूर कोशिश की गई। जी 20 में शामिल 19 मुल्कों ने पेरिस जलवायु समझौत के प्रति अपनी पूरी निष्ठां व्यक्त की है। वार्ता के अंतिम दिन हालांकि गतिरोध बना रहा मगर अंतिम समय में इसे दूर कर लिया गया और फिर से सहमति बन गई। अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर होने के फैसले को मान लिया गया। सम्मेलन के साझा बयान में कहा गया “ हम अमेरिका के पेरिस समझौते से बाहर होने के फैसले को स्वीकार करते हैं“। हैम्बर्ग शिखर सम्मेलन में शामिल 19 देश के नेताओं ने इस बात पर भी प्रतिबद्धता जताई कि समझौता अब बदला नहीं जा सकता। बहरहाल, पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका की बेदखली के अलावा हैम्बर्ग शिखर सम्मेलन की दो घटनाओं ने पूरी दुनिया का ध्यानआकर्षित किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की पुत्री इवांका ट्रप का सम्मेलन में अपने पिता की जगह लेना काबिलेगौर रहा। ऐसा पहली बार हुआ है। इससे पता चलता है कि राष्ट्रपति की पुत्री इवांका ट्रंप और उनके पति जारेड कुशनेर का व्हाइट हाउस में कितना दखल है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने भी पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। सिक्किम सीमा विवाद को लेकर एक माह से भी अधिक समय से चीन और भारत के बीच जबरदस्त तनाव व्याप्त है। इस मुलाकात से ठीक पहले चीन ने कहा था कि मौजूदा माहौल वार्ता के अनुकूल नहीं है। इसके बावजूद चीनी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री ने एक-दूसरे की तारीफ के कसीदे पढे। बहरहाल, हर अंतरराष्ट्रीय मंच की बैठक की तर्ज पर इस बार भी जी 20 के नेता अपना-अपना कूटनीतिज्ञ कौशल दिखाने में ज्यादा मशगूल रहे। ट्रंप-मोदी और पुतिन की तिगडी पर पूरी दुनिया की निगाहें थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रुस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन का “ गोल्डन हैंडशेक“ भी काबिलेगौर रहा। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में रुस पर हैंकिग के आरोपों ने व्हाइट हाउस और क्रेमलिन के बीच रिश्तों में खटास पैदा कर दी थी। इसी वजह ट्रंप-पुतिन मुलाकात पर सबकी नजरें थी। इस मुलाकात के कारण ही सीरिया में युद्ध विराम पर भी सहमति बन पाई है। जी 20 के हैम्बर्ग शिखर सम्मेलन में वैश्विक संसाधनों के समान बंटवारे पर भी जोर रहा है। हैम्बर्ग में प्रदर्शनकारी संसाधनों के न्यायपूर्ण और समान बंटवारे की जोर-शोर से मांग कर रहे थे। पेरिस जलवायु समझौते को अमली जामा पहनाने के लिए यह बेहद जरुरी है। अमेरिका के इस समझौते से हटने के बाद इसे लागू करने में संसधान आडे आ सकते हैं। मगर अमेरिकी मदद को कैसे पाटा जाएगा, इसकी स्पष्ट रुपरेखा नहीं बनाई गई है। हैम्बर्ग शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उठाए गए आतंकवाद के मुद्दे पर भी सहमति बनी है और इसके खात्मे के लिए प्रतिबद्धता जताई गई है। चीन भी इस मुद्दे पर सहमत है। भारत के लिए यह बडी उपलब्धि है।
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