सोमवार, 3 जुलाई 2017

गोभक्ति के नाम पर गुंडागर्दी

गुजरात के साबरमती से हमेशा  देश  को अनुकरणीय संदेश  मिलता रहा है। अहमदाबाद के निकट साबरमती नदी के किनारे महात्मा गांधी का आश्रम आज भी बापू के आदर्शों   को तरोताजा करता है। महात्मा गांधी ने इस आश्रम में बारह साल गुजारे थे। इसी आश्रम के कारण उन्हें सामरमती का संत भी कहा जाता है। आश्रम के सौ साल पूरे होने पर वीरवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  साबरमती में थे। इस अवसर पर मोदी ने “बेलगाम“ तथाकथित गो-रक्षकों को फटकारने के लिए न केवल साबरमती को चुना, अलबत्ता “ गोभक्त साबरमती के संत“ को भी उद्धृत  किया। गोभक्ति के नाम पर हो रही हत्याओं की भर्त्सना करने के लिए  प्रधानमंत्री ने गांधीवादी आचार्य विनोबा भावे का भी सहारा लिया। मोदी ने कहा,“ गोभक्ति के नाम पर हत्याएं स्वीकार नही है। महात्मा गांधी भी कभी इससे सहमत नहीं होते। महात्मा गांधी गाय के अनन्य भक्त थे। अपनी पुस्तक “हिंद स्वराज“ में गोरक्षा पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था,“ मै गाय को पूजता हूं। गाय हिंदुस्तान की रक्षा करने वाली है। गाय कई तरह से उपयोगी है और इसे मुसलमान भी कबूल करेंगे“। इसके साथ ही महात्मा गांधी ने यह भी कहा था “ जैसे मैं गाय को पूजता हूं। वैसे ही  मनुष्य  को भी पूजता हूं। जिस तरह गाय उपयोगी है, उसी तरह  मनुष्य भी, फिर चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, उपयोगी हैं। तो फिर क्या गाय को बचाने के लिए मैं मुसलमान से लडूंगा? उसे मारूंगा़? ऐसा करने से मैं गाय और मुसलमान दोनों का  दुश्मन  हो जाऊंगा“। महात्मा गांधी को  उद्धृत करके प्रधानमंत्री गोभक्तों को यही समझाना चाहते थे कि हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा , “ हम कैसे लोग हैं गाय के नाम पर इंसान को मारते हैं। इंसान की हत्या करना कैसी गो-रक्षा है?  मुसलमानों की हत्या करके गाय की रक्षा करना भी उतना ही बडा पाप है, जितना गाय की हत्या करना। तथापि, प्रधानमंत्री की फटकार के बाद देश  में गोभक्ति के नाम पर हो रही ह्त्याएं बंद हो जाएंगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसके विपरीत भगवा पार्टी से जुडे संगठन प्रधानमंत्री की इस बात को “इस कान से सुन दूसरे से बाहर निकाल“ देंगे। शुक्रवार को इसकी एक बानगी सामने आई।  विश्व  हिंदू परिषद ने साफ-साफ  शब्दों में कहा कि अधिकांश  गोभक्त कानून के रखवाले हैं और इनका सम्मान किया जाना चाहिए। अगर कुछ लोग अपराध करते हैं तो सम्पूर्ण गोरक्षकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। विहिप काफी समय से गोहत्या बंदी के लिए केन्द्रीय कानून बनाए की मांग कर रहा है। प्रधानमंत्री की फटकार के बाद विहिप और ज्यादा मुखर हो गई है। विहिप का कहना हे कि महात्मा गांधी और विनोबा भावे गोहत्या रोकने के लिए कानून बनाने के पक्ष में थे। विनोबा भावे ने तो इसके लिए अनशन तक भी किया था। बहरहाल, गोरक्षकों
की इस माग में कोई वजन नहीं है कि गोहत्या रोक्ने के लिए केन्द्रीय  कानून बनाया जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 48 में पहले ही व्यवस्था है कि देश  में गाय, बछडे और अन्य दुधारु पशुओं का वध करना गैर-कानूनी है।  अक्टूबर, 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संवैधानिक व्यवस्था को वैध बताया था। देश  के  29 मेंसे 21 राज्यों में अभी भी गोहत्या अथवा बीफ पर प्रतिबंध के लिए कानून बना रखे हैं। केरल, पश्चिम  बंगाल, अरुणाचल प्रदेश , मिजोरम, नगालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और सिक्किम ऐसे राज्य हैं जहां इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है।  मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में कभी गोतस्करी तो कभी बीफ खाने के नाम पर मुसलमानों की हत्याएं की जा रही हैं और यह सिलसिला उतरोत्तर बढता ही जा रहा है। इसे अविलंब रोकने की जरुरत है। गोरक्षा के लिए मुसलमान भाईयों को भी समझाने की जरुरत है। महात्मा गांधी भी यही चाहते थे।