सिक्किम के दोका ला इलाके में गत दो सप्ताह से भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। चीनी सैनिकों ने जून के पहले सप्ताह भारतीय सीमा में घुसकर उसके बंकरों को तोड डाला और इस दौरान सैनिकों के बीच हाथापाई भी हुई। चीन ने सिक्किम के नाथू ला रास्ते को कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी रोक लिया है। चीन ने चेताया है कि वह कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता तभी खोलेगा जब भारत अपनी गलतियां सुधारेगा। चीन तिब्बत में भारतीय सीमा के पास युद्ध टैंक भी तैनात कर चुका है। इस पर बीजिंग का कहना है कि 35 टन वजनी लाइट वेट बैटल टैंक का परीक्षण किया जा रहा है। यह परीक्षण उस समय किया रहा है जब भारतीन सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत सिक्किम सीमा के दौरे पर हैं। जाहिर है यह सब भारत को आंखें दिखाने के लिए किया जा रहा है। चीन का यह पुराना पैंतरा है। चीन ने यह आरोप भी लगाया है कि भारत भूटान के कहने पर सिक्किम सीमा पर चीन को सडक का निर्माण में अडंगा डाल रहा है जबकि इस सडक का निर्माण चीनी सीमा के भीतर किया जा रहा है। चीन ने इसके लिए 1890 की सीनो-ब्रिटिश ट्रीटी का हवाला दिया है। चीन के साथ भारत का सीमा विवाद 64 साल पुराना है। भारत लगभग 4000 किलोनीटर क्षेत्र को विवादित मानता है। इसमें अकसाई चीन का वह विवादित क्षेत्र भी शामिल है, जो पाकिस्तान चीन के सुपुर्द कर चुका है। चीन 2000 किलोमीटर क्षेत्र को ही विवादित मानता है। बाकी 2000 किलोमीटर क्षेत्र को चीन अपना इलाका बताता है। भारत और चीन के बीच सीमा का निर्धारण मैकमोहन लाइन के आधार पर किया गया है। भारत तो मैकमोहन लाइन को मानता है मगर चीन इसे “उपनिवेशवादी “ एकपक्षीय बताकर आज तक मानने से इंकार करता रहा है। चीन का हर मामले में “चीत भी मेरी पट भी मेरी, सिक्का मेरे मामू का“ जैसा रवैया रहता है। जो बात उसके हित में हो, गलत होते हुए भी उसे सही बताता है। आतंकी हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन और मसूद अजहर जैसे आतंकियों को “देशभक्त“ बताकर उनकी पैरवी करता है। पूरी दुनिया मान रही है पाकिस्तान आतंक को अधिकृत तौर पर बढावा दे रहा है पर चीन कह रहा है पाकिस्तान आतंक को रोकने की हर संभव कोषिष कर रहा है। मैकमोह्न लाइन को मानता नही है मगर सिक्किम में विवादित क्षेत्र पर अपना हक जताने के लिए 1890 की सीनो-ब्रिटिश ट्रीटी का हवाला दे रहा है। चीन से ताजा विवाद सिक्किम और भूटान के मध्य स्थित 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को लेकर है। यह क्षेत्र भूटान का है मगर चीन इस पर कब्जा जमाए हुए है। 1984 से अब तक चीन और भूटान के बीच वार्ताओं के लगभग 24 दौर हो चुके है, मगर विवाद सुलझ नहीं पाया। सच यह है कि चीन किसी भी देश के साथ सीमा विवाद सुलझाना नहीं चाहता है और दादागिरी दिखाकर दूसरों की जमीन पर कब्जा करने की मंशा पाले हुए है। पहले तिब्बत को हथिया। इससे पहले कि ड्रैगन सिक्किम को हडप जाता, इसका भारत में विलय हो गया। इस विलय को चीन आज तक नहीं पचा पाया है। चीन ने अब भारत को चेताया है कि उसे इतिहास से सबक लेना चाहिए और चीन के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए “सार्थक“ पहल करनी चाहिए। चीन का मूल मकसद भारत को अमेरिका से दूर रखना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच आत्मीयता से बौखलाया चीन भारत को पहले ही सलाह दे चुका है कि वह अमेरिका ट्रैप में फंसने से बचे। बीजिंग यह भी धमकी दे चुका है कि चीन को घेरने के लिए भारत का अमेरिका से गठजोड उस पर भारी पड सकता है। भारत को चीन के मामले में फूंक-फूंक कदम बढाने की जरुरत है।
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