शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

दहेज कानून का दुरुपयोग

दहेज कानून के दुरुपयोग को लेकर  सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था से उन परिवारों, खासकर बुजुर्ग  दंपत्तियों, को राहत की उम्मीद जगी है, जो अब तक बेवजह दहेज कानून के बेजा इस्तेमाल से प्रताडित होते रहे हैं।  वीरवार को सुप्रीम कोर्ट  ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि दहेज प्रताडना की  शिकायतमात्र  पर आरोपियों को बगैर पुख्ता सबूत के गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। अभी तक दहेज प्रताडना की  शिकायत दर्ज  होते ही पुलिस तुरंत आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल  में बंद कर देती है। मौजूदा एक्ट के तहत दहेज प्रताडना के आरोपियों को न तो जमानत मिलती है और नही मामला कंपाउंड योग्य है।  बाद में अगर अदालत में दहेज प्रताडना की  सही शिकायत झूठी निकलती है, तो उस अपराध की सजा की भरपाई नहीं की जा सकती जो आरोपी ने किया ही नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (दहेज प्रताडना एवं घरेलू हिंसा) का सदुपयोग की बजाए इसका दुरुपयोग ज्यादा किया जा रहा है। निसंदेह, दहेज लोभियों को कतई बख्शा  नहीं जाना चाहिए और इन्हें कडी से कडी सजा मिलनी चाहिए। मगर कानून को “ ससुराल अथवा पति  प्रताडना “ के लिए हथियार बनाना भी गलत है। 1983 में अस्तित्व में आए दहेज प्रताडना एवं घरेलू हिंसा के तहत मात्र पीडिता की  शिकायत पर ससुराल पक्ष के आरोपियों को बगैर प्राथमिक जांच के हिरासत में लेने का प्रावधान है। और इसी प्रावधान का देश  में सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया गया है। ससुराल पक्ष से बदला लेने अथवा उन्हें दबाकर रखने के लिए अक्सर विवाहिता पुलिस में दहेज प्रताडना की  शिकायत करती है। मौजूदा कानून के तहत अन्य मामलों की तरह दहेज प्रताडना मामले की पुलिस को प्राथमिक जांच भी  नहीं करनी पडती। इस स्थिति में आरोपियों को भारी जिल्लत उठानी पडती है। उनका कई बार सामाजिक बहिष्कार  तक किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट  ने कहा है कि यह कोई  नैसर्गिक इंसाफ नही है। नेशनल क्राइम रिकार्ड  ब्यूरो ( एनसीआरबी) के अनुसार  दहेज प्रताडना और घरेलू हिंसा के तहत हर साल 90,000 से एक लाख के करीब सही शिकायतें दर्ज  की जाती हैं और इनमेंसे दस हजार से अधिक  झूठी पाई जाती हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि  दहेज प्रताडना एवं घरेलू हिंसा एक्ट का देश  में सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया जाता है। ब्यूरो द्वारा जारी आंकडें बताते हैं कि भारत में आत्महत्या करने चालों में 66 फीसदी विवाहित पुरुष  होते हैं। 2014 में  18,623 विवाहित पुरुषों  ने “ अन्य पारिवारिक समस्या“ को लेकर आत्महत्या की थी और इस “अन्य पारिवारिक समस्या“ में दहेज प्रताडना से जुडी  सही शिकायत का प्रमुख हाथ होता है। वीरवार को सुप्रीम कोर्ट  ने  दहेज प्रताडना एवं घरेलू हिंसा एक्ट के तहत किसी भी आरोपी की बगैर प्राथमिक जांच किए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अब गिरफ्तारी से पहले पुलिस को ठोंक-पीटकर  शिकायत की जांच करनी पडेगी। सुप्रीम कोर्ट  ने निर्देश  दिए हैं कि देश  भर में हर जिले में फैमली वेल्फेयर कमेटी बनाई जाए। समिति दहेज प्रताडना की प्रत्येक शिकायत की जांच करेगी। और समिति की रिपोर्ट के बाद ही मजिस्ट्रेट  के आदेश  से  ही आरोपी की गिरफ्तारी की जा सकेगी। न्यायालय ने जिला समिति के गठन की प्रकिया भी साफ तौर पर निर्धारित की है। इससे पहले जुलाई, 2014 में न्यायालय 41 बिदुंओं की चेक लिस्ट भी जारी कर चुका है। तब न्यायालय ने व्यवस्था दी थी कि दहेज प्रताडना के आरोपी को न्यायालय की अनुमति के बगैर पुलिस गिरफ्तार नहीं कर स्कती। सुप्रीम कोर्ट  ने  इस एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए  केन्द्र सरकार को इसमें यथावत संशोधन का सुझाव भी दिया था। केन्द्र इस सुझाव पर विचार भी कर रही है और  498ए के तहत अपराध को कंपाउंड योग्य बनाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, दहेज प्रताडना एवं घरेलू हिंसा कानून को महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने की प्रभावशाली शील्ड  होनी चाहिए, हथियार नहीं।