सोमवार, 17 जुलाई 2017

ड्रैगन का नया पैंतरा

दुनिया को आंखें दिखाकर दबाना और अपनी हेकडी चलाना ड्रैगन (चीन) की पुरानी फितरत है। कहते हैं “ पुरानी आदतें  बमुश्किल  जाती हैं- ओल्ड हैबिट्स डाई हार्ड“। जमाना बदल गया है और कूटनीति की परिभाषा   भी बदल गई है। कूटनीति के पुराने नुस्खे अप्रासंगिक हो चुके हैं और वैश्विक  परिदृश्य  भी मगर चीन की फितरत नहीं बदली है। अपने घरेलू मामलों में किसी का रत्ती भर भी दखल मंजूर नहीं, पर दूसरों के घरेलू मामले में टांग अडाने की चीन को जैसे लत लगी हुई है। तिब्बत को अपना घरेलू मामला बताकर चीन निर्वासित तिब्बती नेता दलाई लामा की यात्रा पर भी लाल-पीला हो जाता है मगर  खुद बार-बार भारत को कश्मीर  मसले में दखल की धमकी देता है। कश्मीर  मसले पर पाकिस्तान और भारत के बीच मध्यस्थता की पेशक़श  चीन का भारत को घेरने का ताजा पैंतरा है। भारत ने पूरी दुनिया को बता रखा है कि कश्मीर  समस्या पाकिस्तान के साथ उसका द्धिपक्षीय मामला है और संयुक्त  राष्ट्र   समेत पूरी दुनिया अब इस स्थिति को मानती है। चीन भी भारत के इस स्टैंड से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। सिक्किम में सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन में काफी ठनी हुई है। भारत को इस मुद्दे पर दबाने के लिए चीन ने कश्मीर  में मध्यस्थता का नया पैंतरा चला है। दसों दिशाओं से घिरा चीन भारत को भी इसी तर्ज पर घेरने की फिराक में है। मगर उसका यह कदम उस पर उल्टा  पड सकता है। अपने सबसे बडे विद्रोही नेता लू श्याबाओ  की दुखद मौत से चीन की दुनिया भर में तीखी आलोचना हो रही है। नोबेल पुरुस्कार विजेता 61 वर्षीय  लू श्याबाओ   की वीरवार को चीन के अस्पताल में कैंसर से  मौत हो गई।  चीन की तानाशाहों  ने उन्हें इलाज के लिए विदेश  जाने की अनुमति तक नहीं दी।  श्याबाओ  माकूल उपचार के बगैर अस्पताल में तिल-तिल कर मर रहे थे, चीन को इस बात की फिक्र थी कि देश  से बाहर जाने पर  नोबेल पुरुस्कार विजेता तानाशाही की सारी सच्चाई उगल देंगे।  लू श्याबाओ चीन में लोकतंत्र स्थापित करने के लिए शांतिपूर्ण  संघर्ष   कर रहे थे। 11 साल से वे जेल में बंद थे। उनकी पत्नी भी नजरबंद है। 1989 के नियानमेन विद्रोह और चीनी सेना का नरसंहार भी उनकी सामाजिक चेतना का परिणाम था। इसीलिए विद्रोही नेता को इलाज के लिए बाहर नहीं जाने दिया गया। कम्युनिस्ट पार्टी के पिंजरे में कैद तोता “मीडिया“ लू श्याबाओ   को “राजसत्ता को उखाडने के लिए सजायाफ्ता“ बता रहा है। तो क्या चीन के  शासक इतने कमजोर हैं कि एक अदद विद्रोही नेता से ही डर गए?  2010 में  लू श्याबाओ  को नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित करने वाली समिति ने  स्पष्ट शब्दों  में कहा है कि उनकी ंमौत के लिए चीन प्रमुख रुप से जिम्मेदार है। क्रवार को चीन के छह बमर हवाई जहाजों ने  जापान के मियाको द्धीप पर उडाने भरीं और  टोक्यों को धमकाया कि उसे इस तरहें की उडानें के लिए तैयार रहना चाहिए। उत्तर कोरिया प्रकरण के बाद चीन का यह दुस्साहस स्थिति को और तनावपूर्ण  बना सकता है। दक्षिण चीन सागर में  चीन, विएतनाम के अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया फिलीपिंस और बू्रनी से उलझा हुआ है। दक्षिण चीन सागर के रास्ते हर साल  पांच खरब डॉलर का व्यापार होता है, इसलिए अधिकतर देश  इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय  व्यापार क्षेत्र बनने के पक्ष में है मगर चीन इसके लिए तैयार नहीं है। बहरहाल, भारत और चीन के बीच मौजूदा सीमा विवाद का कूटनीतिक हल दोनों देशों  के हित में है। 26 जुलाई को बीजिंग में ब्रिक्स देशों  के राष्ट्रीय  सुरक्षा सलाहकारों की बेठक हो रही है। भारत के  राष्ट्रीय  सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इसमें भाग ले रहे हैं। इस दौरान चीन और भारत के  राष्ट्रीय   सुरक्षा सलाहकारों के मध्य सीमा विवाद पर बातचीत हो सकती है।