मंगलवार, 6 जून 2017

लंदन कालिंग

भारत और पाकिस्तान के बीच चैंपियन ट्राफी मैच से एक दिन पहले इंग्लैंड की राजधानी लंदन में आतंकी हमले ब्रिटेन के साथ-साथ भारत के लिए भी कडी चेतावनी है। इस हमले में सात लोग मारे गए  और 48 घायल हो गए । दो माह के अंदर  लंदन में यह दूसरा आतंकी हमला है। इस साल मार्च में लंदन में संसद परिसर के समीप भी आतंकी हमला हुआ था। ताजा हमले की बर्बरता ने इंसानियत तो क्या, शैतानों को भी  शर्मसार किया  है। इस्लामिक आतंकियों ने शनिवार रात को पहले लंदन ब्रिज पर तेज रफ्तार से वाहन चलाकर लोगों को बुरी तरह जख्मी  किया  और फिर समीप की बोरो हाई स्ट्रीट पर छूरे से लोगों पर हमला कर दिया। हमले इतने जघन्य थे कि एक महिला की चौदह बार छूरा मारकर निर्मम  हत्या कर दी गई। पौडित दर्द  से कराह रहे थे और आतंकी अल्लाह को शर्मसार कर रहे थे। लंदन से मात्र 200 किलोमीटर की दूरी पर बर्मिंघम में इस हमले के अगले दिन भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच होना था। आतंकी हमले के  दृष्टिगत  जिस होटल में टीम इंडिया ठहरी थी, उसे लॉकआउट कर दिया गया। ब्रिटेन में 8 जून को संसद के लिए चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने संसद ( हाउस ऑफ कॉमन अथवा ब्रिटेन की लोकसभा) के मध्यावधि चुनाव कराए हैं यद्यपि मौजूदा संसद की मियाद अभी 7 मई, 2022 तक थी। आतंकी हमले के  बाद  राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार बंद कर दिया है। हमले की कडी भर्त्सना करते हुए प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने कहा है “अब बहुत हो गया“ मगर उन्होंने ने यह नहीं बताया गया कि सरकार आतंकियों से निबटने के लिए क्या करने जा रही है। अब तक पुलिस 12 संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है। तीन हमलावर  आतंकी पहले ही मारे जा चुके हैं। कहते हैं, “कहना आसान है मगर करना मुष्किल“। भारत समेत हर देश  आतंकी हमले के  बाद यही कहता है“ बहुत हो गया, अब और नहीं“ मगर आतंकी हमले रुकने क बजाए बढते जाते हैं। इग्लैंड में भी मुसलमानों, खासकर युवाओं को कट्टरपंथी की घुटी पिलाई जा रही है। वहां मुसलमानों की खासी आबादी है। पूरे ब्रिटेन मे मुसलमानों की आबादीं तीस लाख से ज्यादा है। लंदन में ही मुसलमानों की आबादी 607,083 है और 2011 की जनगणना के अनुसार यह ग्रेटर लंदन की कुल आबादी का 12,4 फीसदी है।  इसका मतलब यह हुआ कि लंदन का हर बारहवां नागरिक मुसलमान है। लंदन के मेयर साजिद खां भी मुसलमान हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  ने इस बात पर तंज भी कसा है। हाई बर्थ रेट के कारण मुसलमानों की आबादी अन्यों की तुलना मे तेजी से  बढ रही है। अगर आबादी ऐसे ही बढती रही तो 2050 में ब्रिटेन में मुसलमानों  2.6 करोड तक हो जाएंगे  जबकि तब ब्रिटेन की कुल आबादी सात करोड के आसपास होगी। यानी  2050 में ब्रिटेन का हर तीसरा नागरिक मुसलिम समुदाय का होगा। ब्रिटेन के लिए यही सबसे बडी चुनौती है कि मुसलमानों को कटटरपंथी बनने से कैसे रोका जाए? और अगर ब्रिटिश  सरकार ऐसा नहीं कर पाई तो एक जमाने में पूरी दुनिया पर राज करने वालों अग्रेंजो को अपना अस्तित्व बचाना भी  मुश्किल  हो जाएगा। ब्रिटेन के ताजा आतंकी हमले ने अमेरिकी राष्ट्रपति  ट्रम्प  को फिर अपने “मुसलमान विरोधी तेवर“ दिखाने का मौका मिल गया है। पूरी दुनिया इस समय आतंक से डरी-सहमी है। आतंक ने मध्य-पूर्व एशिया को तबाह करके रख दिया है और अब अरब भी इस मामले पर बंट गया है। सोमवार को सउदी अरब, मिस्त्र और युएई समेत छह अरब देशों  ने कतर से आतंकियों स संबंध रखने के कारण संबंध तोड दिए । अब पाकिस्तान की बारी है। भारत को इस मामले में पहल करनी चाहिए।