मंगलवार, 20 जून 2017

शर्मनाक हार

चैपिंयन ट्राफी के फाइनल में टीम इंडिया की शर्मनाक हार से करोडों क्रिकेट प्रेमी बेहद निराश  हैं । हार तो हार है और धरती पर इंसान तो क्या कोई भी जीव हार को आसानी से निगल नहीं पाता है। खेल मे हार-जीत बेशक बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती  है पर  अगर हार पाकिस्तान के हाथो हों, तो भारत का हर नागरिक अपमान का घूंट पीकर रह जाता है। और हार इतनी शर्मनाक कि पाकिस्तानी सेना भी इस पर बार-बार तंज कस रही है। जिस टीम को 14 दिन पहले ही इसी टूर्नामेंट में भारत ने 124 रन से हराया हो, उसी टीम से फाइनल में 180 रनों से हार जाना वाकई ही अपमानजनक है। चैंपियन ट्राफी फाइनल के इतिहास में यह अब तक सबसे बडी हार है। इससे पहले भारत 2003 के वर्ल्ड कप के फाइनल में  आस्ट्रलिया से 124 रनों से हार चुकी है। इस हार ने भारत की मजबूत बैंटिंग की कलई भी खोल कर रख दी है। भारत अपनी मजबूत बैटिंग पर खूब इतरा रहा था। पाकिस्तानी गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को गेंद की लाइन और लैंथ को जांचने परखने का मौका तक नहीं दिया। पारी की तीसरी गेंद में रोहित शर्मा मोहम्मद आमिर की गेंद पर आउट हो गए। और एक ओवर बाद कप्तान विराट कोहली “ तू चल, मैं आया“ की तर्ज पर आउट हो गए। आउट होने से एक गेंद पहले कोहली को जीवनदान मिल चुका था मगर उन्होंने इसका कोई फायदा नहीं उठाया। कोहली का  चेंजिग में बेहतरीन रिकॉर्ड  रहा है और उन्होंने बडी पारियां खेलकर भारत को कई मैचों में जीत दिलाई है। पाकिस्तान के खिलाफ पहले मैच में कोहली ने 81 रनों की  शानदार पारी खेली थी। कोहली के आउट होते ही साफ हो गया था कि टीम इंडिया के लिए 339 रनों को चेज करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। और यही हुआ भी। इसके बाद युवराज सिंह ने थोडी देर के लिए  शिखर धवन के साथ मोर्चा  संभाला मगर दोनों ही जल्द आउट हो गए। मिस्टर कूल महेन्द्र सिंह धोनी और केदार जाधव भी जल्द ही चलते बने। भारतीय बल्ले बाजों के जल्द आउट होने से साफ लग रहा था कि वे पाकिस्तानी गेंदबाजों से खौफजदा हैं। मगर हार्दिक पंडया की  शानदार बैटिंग ने जता दिया कि पाकिस्तानी गेंदबाजों को आराम से खेला जा सकता है। उनके रन आउट होते ही हार  निश्चित  हो गई थी और पूरी भारतीय टीम 30.3 ओवर्स  में ही आउट हो गई। फाइनल में इससे ज्यादा शर्मनाक हार हो ही नहीं सकती। पाकिस्तान गेंदबाजों ने साबित कर दिया कि उसके  गेंदबाज श्रेष्ठ  से  श्रेष्ठ  बल्लेबाज को ध्वस्त कर सकते है़ं। टूर्नामेंट के षुरु में पाकिस्तानइ टीम को हल्के में लिया जा रहा था मगर इसी टीम ने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, श्री लंका और अंत में भारत को बुरी तरह हराया। यह भी दावा किया जा रहा था कि भारत की गेंदबाजी पहले की अपेक्षा कहीं ज्यादा धारदार है। मगर पाकिस्तानी खिलाडियों ने इसे भी ध्वस्त कर दिया। दुनिया के नंबर बन गेंदबाज रविचंद्रन  आश्विन  की पाकिस्तानी खिलाडियों ने बहुत ज्यादा ठुकाई की। कमजोर भारतीय गेंदबाजी के कारण ही पाकिस्तान विशाल स्कोर खडा करने में कामयाब रहा। जसप्रीत बुमराह ने बार-बार नो बाल फेंककर सारी हदें पार कर दीं ।  फाइनल में बार-बार नो बाल करना कमजोर गेंदबाजी की निशानी है। बुमराह ने चौथे ओवर में फखर जमान को चलता कर दिया था मगर उनके नो बाल ने मैच का रुख ही पलट दिया। पाकिस्तानी की सधी और पैनी गेंदबाजी के समक्ष भारतीय गेंदबाजी एकदम बौनी साबित हुई। भारत की फील्डिंग भी बेअसर रही । शुरु में रन आउट के दो अवसर मिले थे मगर दोनों ही गंवा दिए गए।  खेल में जो टीम बेहतरीन खेलती है, वही जीतती है। पाकिस्तान फाइनल में भारत की तुलना में कहीं ज्यादा अच्छा खेली और इसीलिए जीत गई। क्रिकेट प्रेमी कालांतर मे भले ही भारत की इस  शर्मनाक हार को भूल जाएं मगर इतिहास कभी  नहीं भूलता।