दुनिया में सबसे तेज अर्थव्यवस्था की रफ्तार नोटबंदी ने रोक दी है। केन्द्रीय सांख्यिकी विभाग द्वारा बुधवार को जारी आंकडों के अनुसार इस साल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ग्रोथ की दर 7.1 फीसदी रही है जबकि पिछले साल यह 8 फीसदी थी। वित्तीय वर्ष 2016-17 की जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 7.1 फीसदी से गिरकर 6.1 फीसदी पर आ गई है। अंतिम तिमाही में यह 2014 के बाद अब तक की सबसे बडी गिरावट है। विकास दर में एक फीसदी गिरावट के कारण भारत ने दुनिया की सबसे तेज गति से बढती अर्थव्यवस्था होने का गौरव भी खो दिया है। अब चीन ने भारत को फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनॉमी के मामले में भारत को फिर पीछे छोड दिया है। इस साल की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में चीन की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.9 फीसदी रही है। असल में जीडीपी में गिरावट और भी ज्यादा हो सकती है अगर असंगठित क्षेत्र और छोटे व्यवसायियों के आंकडे भी जीडीपी में शामिल किए जाते। नोटबंदी का सबसे बुरा असर असंगठित क्षेत्र और आंचलिक छोटे व्यवसायियों पर पडा है। भारत में ये तबके नकदी कारोबार पर पूरी तरह से आश्रित हैं। जीडीपी की गणना में असंगठित क्षेत्र और आंचलिक छोटे व्यवसायियों को शामिल नहीं किया जाता। नोबल पुरुस्कार विजेता नामचीन अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन सहित अधिकांश आार्थिक विशेषज्ञों का आकलन था कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पडेगा। भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में नब्बे फीसदी से ज्यादा कारोबार नगदी पर चलता है । नोटबंदी ने सबसे ज्यादा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। नगदी पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था दो महीने तक पूरी तरह से पंगु बनी रही और आम आदमी का रोजगार जाता रहा। नगदी संकट के कारण मांग में अप्रत्याशित गिरावट आने से उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री में खासी कमी आई । इसी वजह विनिर्माण, मैन्युफेक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के उत्पादन भी गिरा। कृषि को छोडकर लगभग हर सेक्टर में गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक आठ कोर सेक्टर में बहुत बडी गिरावट दर्ज हुई है। अप्रैल में इन सेक्टर्स का उत्पादन 8.7 फीसदी से गिरकर 2.6 तक गिर चुका था। उधोग जगत ने भी नोटबंदी के चलते नगदी संकट के कारण जीडीपी में गिरावट की आशंका जताई थी। वीरवार को जारी आंकडों में बताया गया है कि मई माह में औधोगिक उत्पादन तीन माह के न्यूनतम स्तर पर आ चुका था। इससे पता चलता है कि नोटबंदी का असर अभी भी जारी है। ताजा आंकडों ने मोदी सरकार के इन दावों की कलई खोल दी है कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पडा है। मोदी सरकार ने 26 मई को अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर लिए हैं और सरकार अभी भी यही कह रही है कि नोटबंदी से जीडीपी पर कोई
असर नहीं पडा है। इसके विपरीत सरकार का दावा है कि नोटबंदी से टैक्स अदा करने वालों की संख्या बढी है। इससे डिजिटाइजेशन बढा है और नकदी में लेन-देन कम हुआ है जबकि सरकार के अपने आंकडे इस बात की ताकीद नहीं कर रहे हैं। तथापि, नोटबंदी का बुरा दौर गुजर चुका है। रेटिंग एजेंसी मूडीज का ताजा आकलन है कि नोटबंदी के प्रतिकूल असर से अर्थव्यवस्था उभर चुकी है। इस रेटिंग एजेंसी के अनुसार सरकार के आर्थिक और वित्तीय साल 2017.18 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी से भी आगे निकल जाएगी और अगले चार सालों में यह 8 फीसदी को पार कर जाएगी। नोटबंदी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटलस अभी भी काफी मजबूत हैं और इनमें छोटे-मोटे झटके सहने की पूरी क्षमता है। पॅालिटिक्ल स्टेबिलिटी और चुनावों में सतारुढ दल की लगातार जीत से आउटलुक भी बेहतर है। अगले माह जुलाई में जीएसटी लागू होने से अर्थेव्यवस्था में तेजी लौट सकती है।
असर नहीं पडा है। इसके विपरीत सरकार का दावा है कि नोटबंदी से टैक्स अदा करने वालों की संख्या बढी है। इससे डिजिटाइजेशन बढा है और नकदी में लेन-देन कम हुआ है जबकि सरकार के अपने आंकडे इस बात की ताकीद नहीं कर रहे हैं। तथापि, नोटबंदी का बुरा दौर गुजर चुका है। रेटिंग एजेंसी मूडीज का ताजा आकलन है कि नोटबंदी के प्रतिकूल असर से अर्थव्यवस्था उभर चुकी है। इस रेटिंग एजेंसी के अनुसार सरकार के आर्थिक और वित्तीय साल 2017.18 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी से भी आगे निकल जाएगी और अगले चार सालों में यह 8 फीसदी को पार कर जाएगी। नोटबंदी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटलस अभी भी काफी मजबूत हैं और इनमें छोटे-मोटे झटके सहने की पूरी क्षमता है। पॅालिटिक्ल स्टेबिलिटी और चुनावों में सतारुढ दल की लगातार जीत से आउटलुक भी बेहतर है। अगले माह जुलाई में जीएसटी लागू होने से अर्थेव्यवस्था में तेजी लौट सकती है।






