शुक्रवार, 19 मई 2017

“स्पाई“ पर लडाई

अंतरराष्ट्रीय  अदालत ने  पाकिस्तानी जेल में बंद  भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी को फिलहाल रोक दिया है। नीदरलैंड में हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की 11 जजों की पंचाट ने पाकिस्तान से कहा है कि वह अदालत का अंतिम फैसला आने तक जाधव को फांसी न दे। अदालत ने पाकिस्तान की इस दलील को नहीं माना कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अदालत ने कहा है कि कुलभूषण यादव को काउंसलर मदद मिलनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान ने जिन  हालात में कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया था, उन पर अभी विवाद है। वर्ल्ड  अदालत का फैसला भारत के लिए बडी कूटनीतिक  जीत है। पाकिस्तान के लिए अब जाधव को सूली पर लटकाना इतना आसान नहीं होगा हालांकि भारत को आशंका है कि इस्लामाबाद जाधव को जल्द से जल्द फांसी देने पर आमादा है। दस अगस्त को कुलभूषण को मिली राहत की मियाद खत्म हो रही है। कुलभूषण जादव को भारत की विदेशी  स्पाई एजेंसी रॉ (रिसर्च एंड एनालेसिस) का जासूस बताते हुए पाकिस्तान ने ईरान में गिरफ्तार किया था। पाकिस्तान की दलील है कि जाधव ने अपने कबूलनामे में माना है कि वह 2013 से रॉ के लिए काम रहा था और पाकिस्तान में विध्वंसक गतिविधियों में संलिप्त था। इस साल दस अप्रैल को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण यादव को जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाई थी। भारत ने इस फैसले के खिलाफ  इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले भारत और पाकिस्तान 1999 में भी वर्ल्ड  कोर्ट मेें भिड चुके हैं। तब पाकिस्तान ने भारत पर पाकिस्तान नौसेना के हवाईजहाज को मार गिराने का आरोप लगाया था। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। अदालत ने तब पाकिस्तान की याचिका को इस बिला पर खारिज कर दिया था कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि हेग  अदालत इस बार भारत की याचिका को भी इसी बिला पर खारिज कर देगी। मगर ऐसा हुआ नहीं। अदालत ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुई विभिन्न संधियों का हवाला देते हुए कहा है कि 1977 से दोनों देश  वियना संधि का हिस्सा है और इसे लागू करना दोनों  मुल्कों की जिम्मेवारी है। विएना संधि के आर्टिकल 36 में साफ-साफ कहा गया है कि किसी भी विदेशी  को आपराधिक अथवा अवैध प्रवेश  के लिए गिरफ्तार किए जाने पर उसे काउंसर मदद दी जानी चाहिए। पाकिस्तान ने जाधव को यह कहकर  काउंसर मदद  नहीं दी कि आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के लिए गिरफ्तार व्यक्ति विएना संधि के तहत नहीं आता है। मगर अदालत ने पाकिस्तान की इस दलील को भी नहीं माना। बहरहाल, पाकिस्तान के लिए कुलभूषण जाधव को आतंकी साबित करना उसकी नाक बचाने का सवाल  है। इसीलिए, इस्लामाबाद विएना संधि को भी तोड-मरोड कर पेश  कर रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि जाधव को भारत ने बलूचिस्तान में बगावत फैलाने के लिए भेज रखा था। यह पाकिस्तान का नया पैंतरा है। इस्लामाबाद भारत में विध्वंसक कार्रवाइयां करने वाले पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस सबूतों को भी नाकाफी बताता है मगर कुलभूषण जाधव को जबरी कबूलनामे पर भी आतंकी ठहरा रहा है। भारत में आतंक को फैलाने के लिए दुनिया भर में बदनाम पाकिस्तान लंबे समय से  बलूचिस्तान मे बगावत के लिए नई दिल्ली को जिम्मेवार ठहराने की साजिश  रचने में लगा हुआ है। कुलभूषण जाधव प्रकरण भी इसी साजिश  का हिस्सा है। जाधव प्रकरण से दोनों देशों  के संबंधों पर कोई असर नहीं होने वाला है। इस समय द्धिपक्षीय संबंध पहले ही इतने खराब हैं कि इससे ज्यादा खराब होने की कोई गुजाइंश ही  नहीं बची है।