सोमवार, 22 मई 2017

मुबारक हो! जीएसटी लागू हो रहा है , खुशियां मनाओ

आतंक और अलगाववाद की भीषण आग में जल रही  कश्मीर  घाटी की राजधानी ने लंबे समय बाद देश  को बहुत बडी खुशखबरी दी है।  श्रीनगर में चली जीएसटी परिषद की दो-दिवसीय बैठक ने अततः गुडस और सर्विसिस की सभी श्रेणियों की प्रस्तावित टैक्स दरें तय कर ली । परिषद ने 1205 वस्तुओं पर लगने वाले जीएसटी की सूची गत  वीरवार रात को जारी कर दी  और पांच श्रेणियों पर जीएसटी दरों को को  शुक्रवार  को अंतिम रुप दिया गया। सिर्फ सोना एकमात्र ऐसी वस्तु है, जिस पर सहमति नहीं बन पाई और फैसला परिषद की अगली बैठक के लिए छोड दिया गया है।    जीएसटी परिषद ने इससे संबंधित सात नियमों को को भी अंतिम रुप दे दिया है और दो नियमों को लीगल कमेटी के सुपुर्द  कर दिया ।  यही बहुत बडी बात है कि आजादी के बाद देश के सबसे महत्वाकांक्षी  कर सुधार (टैक्स रिफॉर्म) को अब पहली जुलाई से अमली जामा पहना दिया जाएगा। लंबे समय से जीएसटी को लेकर देश  के लॉमेकर्स संसद के भीतर और बाहर माथा-पच्ची कर रहे थे। सरकार कांग्रेस नीत संप्रग की रही हो अथवा भाजपा की अगुवाई वाली राजग की, राजनीतिक दलों में जीएसटी को लेकर खूब “तू-तू, मैं-मैं“ होती रही है। इससे देश  को कितना नुकसान हुआ, इसकी किसी को परवाह नहीं रही। मोदी सरकार इस बात के लिए बधाई की पात्र है कि आखिरकार, जीएसटी को संसद से भी पारित करवा लिया गया और  जीएसटी परिषद से विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाली दरें भी निर्धारित करवा लीं गईं । परिषद ने 5 से 28 फीसदी टैक्स की अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं।  19 फीसदी वस्तुओं पर  28 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। 43 फीसदी पर 18 प्रतिशत, 17 फीसदी वस्तुओं पर  12 प्रतिशत,  और 14 फीसदी वस्तुओं पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा। 7 फीसदी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त रखा गया है। इनमें अनाज, दूध-दही, फल-सब्जी जैसी  रोजमर्रा  की जरुरी  चीजें  शामिल हैं। इन पर अभी भी कोई टैक्स नहीं है मगर कुछ राज्य  गेंहूं  और चावल पर वैट लगाते हैं। अब यह भी खत्म जो जाएगा।  शिक्षा और हैल्थकेयर को भी जीएसटी से मुक्त रखा गया है। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने परिषद की बैठक के बाद  शुक्रवार को इस आशय  की घोषणा की। इससे यूनिवर्सल  शिक्षा को बढावा मिलेगा। पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है क्योंकि फ्यूल प्राइस अंतराष्ट्रीय  तेल कीमतों ले अनुसार निर्धारित की जाती हैं। अभी भी पेट्रोल-डीजल पर वैट नहीं लगाया जाता मगर केन्द्र सरकार को इन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को एडजस्ट करना पडेगा।  पैट्रोलियम उत्पादों को लेकर डयूल जीएसटी नीति से काफी असुविधा हो सकती है। कस्टम डयूटी का जारी रखा जाना तो समझ में आता है मगर लोकल बॉडीज के करों के जारी रहने से “ एक देश , एक समान कर“ जैसी स्थिति नहीं रह पाएगी। बहरहाल, विशेषज्ञों  का आकलन है कि  जीएसटी के लागू होने से देश  के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में खासा इजाफा हो सकता है। पूरी दुनिया में लगभग 160 देश  जीएसटी अथवा वैट जैसी एकीकृत टैक्स व्यवस्था लागू कर चुके हैं। और अधिकांश  देशों  को इसका फायदा भी हुआ है। कनाडा एकमात्र ऐसा देश  है, जहा डयूल जीएसटी मॉडल लागू है और इसके लागू होने से इस देश  की जीडीपी ग्रोथ में एक फीसदी की गिरावट आई थी। कनाडा के अलावा जापान, सिंगापुर, मलेशिया  और आस्ट्रेलिया में भी जीएसटी जैसी कर व्यवस्था लागू होते ही इनकी जीडीपी ग्रोथ गिरी थी। सिंगापुर की जीडीपी में सबसे ज्यादा तीन फीसदी की गिरावट आई थी।  1954 में फ्रांस ने सबसे पहले जीएसटी (वैट) जैसी कर व्यवस्था लागू की थी। और इसके उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए थे। भारत को भी यही उम्मीद है।