गुरुवार, 18 मई 2017

छापों की राजनीति

लोक नायक जयप्रकाश  नारायण (जेपी) आंदोलन (“सम्पूृर्ण क्रांति“) की उपज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समकालीन राजनीति के दोगले आचरण की नुमाइंदगी करते हैं। बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और। सामाजिक न्याय के नाम पर काली कमाई करने की “राजनीति“ ज्यादा देर तक नहीं चलती। अततः, कानून अपना काम करता है।  देश  की यह सबसे बडी त्रासदी है कि कांग्रेस के “परिवारवाद“ के खिलाफ संघर्ष   करने का संकल्प लेकर राजनीतिक अखाडे में उतरे  क्षत्रप इस मामले में ग्रांड ओल्ड  परिवार से भी बदतर निकले। वह चाहे बिहार में लालू परिवार हो, या उत्तर प्रदेश  में मुलायम सिंह परिवार अथवा पंजाब में बादल परिवार या महाराष्ट्र  में  बाल ठाकरे परिवार। सभी एक ही थैली के चटटे-बट्टे हैं। सत्तर के दशक में कांग्रेस के  कुशासन के खिलाफ  “जेपी“ आंदोलन को पूरे देश  में जबरदस्त रिस्पांस मिला था।  कांग्रेस के   भ्रष्ट  शासन से आजिज बेरोजगार युवाओं ने इस आंदोलन में बढ-चढ कर भाग लिया था। 1974 में इस आंदोलन की  शुरुआत बिहार से हुई थी मगर जल्द ही यह आंदोलन पूरे देश  में फैल गया था। लालू प्रसाद यादव तब बिहार छात्र संघर्ष  समिति के मुखिया थे और तब वे राजनीति को  भ्रष्ट लोगों  से मुक्त करने की बडी-बडी बातें किया करते थे। विडबना देखिए कि उसी लालू प्रसाद यादव परिवार को आज अवैध तरीके से अकूत संपति अर्जित करने का केन्द्रबिंदु माना जा रहा है। मंगलवार को लालू प्रसाद की बेटी मीसा और दामाद की बेनामी संपत्ति की जांच के लिए  आयकर विभाग के छापे पडे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के समय वायदा किया था कि अगली कार्रवाई “ बेनामी संपत्ति के खिलाफ की जाएगी। समाचारों के अनुसार आयकर विभाग को दिल्ली से सटे गुरुग्राम (गुडगांव) में लालू परिवार की हजार करोड रु की संपत्ति का पता चला है। इन्हे लालू की बेटी और दामाद ने कौडियों के भाव तब खरीदा था जब लालू प्रसाद संप्रग सरकार में रेल मंत्री थे। लालू प्रसाद के  अलावा कांग्रेस के  सीनियर  नेता पी चिदंबरम  के पुत्र कार्ति के घर और व्यवसायिक ठिकानों पर भी आयकर के छापे पडे। आयकर छापों पर लालू प्रसाद और कांग्रेस का क्षुब्ध होना स्वभाविक है। मगर कानून किसी को नहीं बख्शता । यह बात कांग्रेस और लालू दोनों ही भली-भांति समझते हैं। अगर लालू और चिदंबरम निर्दोष  हैं, तो उन्हें किस बात का डर है? राजनीतक विद्धेष  अथवा:बदले की कार्रवाई“ के डर से कानून को काम करने से नहीं रोका जा सकता। लालू प्रसाद दूध के धुले नही हैं। चारा घोटाले में लालू प्रसाद पहले ही सजायाफ्ता हैं और अब सुप्रीम कोर्ट ने उन पर इस मामले में और आपराधिक मुकदमें दर्ज करने के आदेश दे रखे  हैं। देश  में सियासी नेता अब तक कानून को तोड-मरोड कर बचते रहे हैं पर मोदी सरकार ने इच्छाशक्ति दिखाई है। बहरहाल, लालू प्रसाद के खिलाफ आयकर विणाग की ताजा कार्रवाई से देश , खासकर, बिहार की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड सकता है। लालू प्रसाद ने यह कहकर कि बीजेपी को नया एलायंस पार्टनर मुबारक हो, इस ओर इशारा भी कर दिया है। उनका इशारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश  कुमार की तरफ था। नीतिश  कुमार हालिया कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री को बेनामी संपत्ति के खिलाफ अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए। इससे पहले नीतिश  नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री की तारीफ कर चुके हैं। बिहार में  राष्ट्रीय  जनता दल और जनता दल (यू) का महागठबंधन सत्ता में है। लालू प्रसाद और नीतिश  कुमार ने भगवा पार्टी को धूल चटाने के लिए मिलकर चुनाव लडा  था। बिहार के दोनों क्षत्रप नदी के दो किनारे हैं। कभी एक नहीं हो सकते, फिर भी पॉवर के लिए एक मंच पर हैं। सत्ता का यह महागठबंधन देर-सबेर “अनैतिकता“ के बोझ से गिरना तय है। बहरहाल, देश  यह जरुर चाहता है कि बेनामी संपत्ति के खिलाफ जारी मुहिम में ऊंच-नीच नहीं होनी चाहिए।