मंगलवार, 9 मई 2017

अन-कलीन मानदंड

केन्द्र सरकार द्वारा वीरवार को जारी स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट की प्रामणिकता पर सवाल खडे किए जा रहे हैं। भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने जनवरी-फरवरी 2017 में देश  के 434 शहरों में करवाए गए स्वच्छता सर्वेक्षण में जो मानदंड अपनाए गए हैं, उन्हें न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। इस सर्वेक्षण के अनुसार इस बार मध्य प्रदेश  का इंदौर शहर पहले और राज्य की राजधानी भोपाल दूसरे स्थान पर रहा है। हरियाणा के करनाल को देश  का स्वच्छतम मेडीकम सिटी और फरीदाबाद को “सबसे तेज मूवर“  बताया गया है। हरियाणा के लिए यह बडी उपलब्धि है। करनाल हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का पैतृक शहर है। पंजाब के लिए सर्वेक्षण बुरी खबर लेकर आया है। इसके 16 मेंसे 7  शहर सबसे गंदे शहरों की श्रेणी में  दर्शाए  गए हैं। पंजाब का “पवित्र“ शहर मुक्तसर और  अबोहर भी सबसे निचले स्थान पर है। जम्मू एवं कश्मीर  का लेह देश  के लघु शहरों में स्वच्छतम बताया गया है और हिमाचल प्रदेश  की राजधानी  शिमला सबसे स्वच्छ पहाडी शहर है। स्मार्ट  सिटीज की दौड में पिछडने के बाद  सही शिमला के लिए यह सुखद स्थिति है। देेश  का सबसे खूबसूरत शहर चंडीगढ इस बार 11वें स्थान पर है तो कर्नाटक का मैसूर  शहर  पांचवें स्थान पर । मैसूर पिछले दो सर्वेक्षणों में लगातार पहला स्थान हासिल करता रहा है। चंडीगढ पिछले सर्वेक्षण में दूसरे स्थान पर था। इन दोनों  शहरों का काफी नीचे  फिसलना यह  दर्शाता  है कि सर्वेक्षण के मानदंडो में कुछ तो गडबड है।  वैसे भी सरकारी मानदंडों को सौ फीसदी  विश्वनीय  नही माना जा सकता। स्वच्छता सर्वेक्षण की विधि (मैथडॉलॉजी) को सटीक नहीं माना जा सकता। सर्वे में साढे सात लाख लोग  शामिल हुए, 12000 स्थानों का सर्वे किया गया और 2600  शौचालय का निरीक्षण किया गया। मंत्रालय ने  जनता से छह  प्रश्न   भी किए थे। इनमें खुले में षौच, सोलिड बेस्ट मैनेजमेंट जैसे सवाल  शामिल थे।  इसके प्रत्युतर में 37 लाख लोगों ने अपने जवाब भेजे।  निर्धारित  मानदंडों पर स्वच्छता परखने के लिए कुल किलाकर 2000 अंक रखे गए थे। इन मेंसे 600 अंक जनता की फीडबैक के लिए थे। जाहिर है जिन  शहरों के लोगों ने ज्यादा फीडबैक भेजा, वे बाजी मार गए। चंडीगढ  इसीलिए पिछड गया क्योंकि इस  शहर के लोगों ने बहुत कम फीडबैक भेजा जबकि सोलिड बेस्ट मैनेजेमेंट में शहर को इंदौर और भोपाल से ज्यादा अंक मिले थे। ऑब्जरवेशन के आधार पर भी चंडीगढ,  इंदौर और भोपाल से कहीं आगे था मगर नागरिकों के फीडबैक में चंडीगढ, इंदौर और भोपाल से काफी पिछड गया। पिछले दो सर्वेक्षणों में पहले नंबर पर आने वाले मैसृर को भी इसी कारण पिछडना पडा। सर्वेक्षण के इन मानदंडों से साफ है कि अगर सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट और डायरेक्ट ऑब्जरवेशन के दम पर चयन होता तो चंडीगढ इंदौर और भोपाल को पछाड कर पहले नंबर पर आता। इस बात के  दृश्टिगत , सरकार की रैकिंग को न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।  शहरों की स्वच्छता को परखने के लिए साफ-सफाई वाले मानदंड ही पर्याप्त होने चाहिए। लोगों के फीडबैक इसमें जोड्ने से छोटे षहरों से अन्याय हो सकता है। अमूमन, सर्क्षेक्षण में हर चयनित  शहर को हर लिहाज से बराबर होना चाहिए। देश  के 434 शहर आबादी और नागरिक फीडबैक के मामले में एक समान नहीं हो सकते। मुंबई, दिल्ली, चैन्नई, इंदौर  जैसे महानगरों की  चंडीगढ,  शिमला और करनाल से तुलना नहीं की जा सकती। ्बहरहाल, देश  को स्वच्छ और स्मार्ट बनाने के लिए मोदी सरकार के प्रयास सराहनीय है। मौजूदा परिवेश  में यही बहुत बडी बात है कि छोटे-बडे सभी शहर स्वच्छता अभियान में बढ-चढ कर भाग ले रहे हैं। देश  को “खुले में शौच  करने की गंदी आदत से निजात दिलाने में मोदी सरकार का बडा हाथ है। घर-घर, गली-गली स्वच्छता फैले, देश  का हर नागरिक सेहतमंद हो, हर बालक-बालिका को अच्छी  शिक्षा मिले और प्रत्येक वयोवृद्ध को सामाजिक सुरक्षा मिले, लोकप्रिय सरकार का यही एजेंडा होता है। मोदी सरकार इस मामल में अच्छा काम कर रही है।