पाकिस्तान चौकियों पर 22 सेकेंड में 21 वार की भारतीय सैन्य कार्रवाई से देशवासियों का सीना फूलकर “56 इंच“ का हो गया है। यही तो देश चाहता है। भारतीय सैनिकों से बर्बरता और बार-बार सीजफायर का उल्लंघन कर रहे पाकिस्तान को धूल चटाने का यही सही समय है। सेना की अब तक की यह सबसे बडी कार्रवाई है। इस कार्रवाई में दस से ज्यादा पाकिस्तान सैनिक भी मारे गए। सेना ने जम्मू-कश्मीर के नौशहरा सेक्टर में नियंत्रण रेखा पास पाकिस्तानी सेना की छह चौकियों को मिसाइलों से ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तान सेना की इन चौकियों को आतंकियों ने भारत में घुसपैठ का लांचिंग पैड बना रखा था। पाकिस्तान बार-बार नौशहरा सेक्टर में सीज फायर का उल्लघंन कर रहा है। आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने के लिए ऐसा किया जा रहा था। गर्मियों में बर्फ पिघलते ही नियंत्रण रेखा से आतंकियों की घुसपैठ बढ जाती है। बर्फ पिघलने से घुसपैठ के पारंपरिक रास्ते भी खुल जाते हैं। पहली बार सेना ने देशवासियों को इस ऑपरेशन का वीडियो भी दिखाया। इस ऑपरेशन की सबसे बडी विशेषता भी यह रही कि तोपखानों से गोलीबारी की बजाए मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। अब तक आम तौर पर तोपखानों से गोलीबारी की जाती रही है। मिसाइलों से गोलीबारी की रेंज तोपखाने से काफी ज्यादा होती है और एक सेंकेड में चार गोले गिराए जा सकते हैं। बहरहाल, देश को इस बात का सुकून है कि सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सबसे बडी कार्रवाई की है। सितंबर, 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के लगभग आठ माह ही सही मगर सेना ने कार्रवाई की तो सही । आठ माह लंबी अवधि होती है और अब लोगों के सब्र का बांध टूटने की कगार पर था। मगर जिस तरह से इस कार्रवाई को दिखाया गया, उस पर सवाल उठाया जा रहा है। इस माह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के तीन साल पूरे हो रहे है। 26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार सर्जिक्ल स्ट्राइक की तरह सेना की ताजा कार्रवाई को भी राजनीतिक फायदे के लिए भुनाना चाहती है। पाकिस्तान के प्रति सरकार की नर्म नीति से जनमानस में आक्रोश बढ रहा था। इसी आक्रोश को शांत करने के लिए सेना की ताजा कार्रवाई का वीडियो तक दिखाया गया जबकि अब तक सैन्य ऑपरेशन का प्रचार नहीं किए जाने की रिवायत रही है। देेशवासियों को प्रधानमंत्री से बडी उम्मीदें हैं और विभिन्न सर्वेक्षण बता रहे है कि 61 फीसदी से ज्यादा जनमानस उनके कामकाज से संतुष्ट है हालांकि इस तरह के सर्वेक्षणों पर अब ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता। मगर पाकिस्तान को करारा जवाब नहीं देने के लिए जनमानस प्रधानमंत्री से भी संतुष्ट नहीं है। संप्रग सरकार के समय नरेन्द्र मोदी और भाजपा पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री को “नपुंसक“ बताया करते थे और अब यही आरोप कांग्रेस प्रधानमंत्री पर लगा रही है। सच्चाई यह है कि जनमानस के तुष्टिकरण के लिए देश को युद्ध मेँ नहीं झोंका जा सकता। युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। भारत और पाकिस्तान का तीन बार जंग के मैदान में आमना-सामना हो चुका है मगर इनसे कोई भी द्धिपक्षीय विवाद सुलझ नहीं पाया है। भारत से कहीं ज्यादा पाकिस्तान इस कडवी सच्चाई को जानता है। इसीलिए वह भारत के खिलाफ छदम युद्ध छेडे हुए है। भारत के समक्ष इस छदम युद्ध के चक्रब्यूह को तोडने की चुनौती है। इस स्थिति के दृष्टिगत को सीमा पार आतंकियों के ठिकानों को एक-एक करके ध्वस्त करने की कारगर नीति बनानी चाहिए। कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों का मजबूत गठजोड तोडना पडेगा। युवकों को अधिकाधिक रोजगार मुहैया कराकर उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोडना होगा। की कोई भी मां कश्मीर अपने लाल को आतंकियों और अलगवादियों के “निहित स्वार्थी एवं सत्ता लोलुपता“ के लिए बलि चढते नहीं देख सकती।
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