महिला सशक्तिकरण के जमाने में लडकियों का लडकों को पछाडना अच्छा लगता है। बेट्टियां अगर आगे बढती हैं, तो समझ लीजिए देश वाकई ही तरक्की कर रहा है। इतिहास इस बात का गवाह है कि जिस समाज में बेट्टियों का सम्मान होता रहा है, वह तेजी से आगे बढा है। आए दिन महिलाओं से बलात्कार, छेडखानी, सामाजिक शोषण और तिरस्कार के खबरें पढते-सुनते कान पक जाते हैम, आँखे दुखती है । बहरहाल सीबीएसई एवं सीआईएससई की परीक्षा परिणामों में बेट्टियों की अभूतपूर्व सफलता से देश गोरवान्वित हुआ है। रविवार को सीबीएसई की बाहरवीं परीक्षा का परिणाम निकला, तो सोमवार को काउंसिल फॉर दी इंडियन स्कूल सर्टिफेक्ट एग्जामिनेशन ( सीआईएससई) ने दसवीं (आईसीएसई) और बाहरवीं (आईएसई) के रिजल्ट का ऐलान किया। सीबीएसई में पहले तीन स्थान पर बेट्टियां अव्वल रहीं और सीआईएससई की दसवीं और बाहरवीं परीक्षा में लडकियों ने पहला स्थान हासिल करके लडको को पीछे छोड दिया। सीबीएसई बाहरवीं परीक्षा की टॉपर नोएडा की रक्षा गोपाल ने तो कमाल ही कर दिया। आटर्स के तीन विषयों में सौ-सौ अंक और दो में 99.2 फीसदी अंक। 15 साल में पहली बार आटर्स का स्टूडेंट सीबीएसई परीक्षा में पूरे देश में टॉपर रहा है। कुल मिलाकर 500 मेंसे 498 अथवा 99.6 फीसदी अंक। यानी परफेक्ट सौ फीसदी से मात्र दो अंक कम। आटर्स स्ट्रीम में सौ मेंसे सौ अंक हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण है मगर नोएडा की बेटी ने यह कमाल भी कर दिखाया है। रक्षा गोपाल ने यह भी दिखाया है कि टॉपर बनने के लिए स्ट्रीम की कोई दीवार नहीं होती। टॉपर किसी भी स्ट्रीम का हो सकता है। इस तरह के रिजल्ट लाना वास्तव में बेमिसाल है। दूसरा स्थान पाने वाली चंडीगढ की साइंस स्ट्रीम की छात्रा भूमि सांवत ने 99.4 फीसदी और तीसरा स्थान पाने वाली चंडीगढ की ही कॉमर्स स्ट्रीम की मन्नत लूथरा ने 99.2 फीसदी लेकर भी कम कमाल नहीं किया है। सोमवार को सीआईएससई की बाहरवीं परीक्षा की टॉपर कोलकता की अनन्य मैती ने 99.5 फीसदी अंक लेकर और दसवीं की परीक्षा में पुणे की मुस्कान ने 99.4 फीसदी अंक लेकर लडकियों का जलवा दिखाया। ज्यादा से ज्यादा अंक पाने के लिए छात्रों को वाकई ही कडी मेहनत करनी पडती है। और देश की बेट्टियों ने साबित कर दिया है कि वे परिश्रम करने में लडकों से कम नहीं हैं, अलबत्ता उनसे आगे ही हैं। देस के लिए यह गर्व की बात है कि अब लडकियां हर क्षेत्र में लडकों का मुकाबला कर रही हैं और पढाई के मामले में तो उनसे आगे हैं। इससे पता चलता है कि देश तेजी से आगे बढ रहा है। विभिन्न अध्ययन बताते हैं कि परीक्षा में अव्वल आने के लिए आत्म-अनुशासन (सेल्फ डिसिपलिन), रेगुलेशन और एकाग्रता बहुत जरुरी है। सीबीएसई की बाहरवीं की टॉपर रक्षा ने भी छात्रों को अव्वल आने का यही मूल-मंत्र दिया है। उनका कहना है कि एकाग्रता से पढो और सोशल मीडिया से दूर रहो। पढाई के समय किताब और अध्ययनकर्ता के बीच कोई नहीं आना चाहिए। लडकियों के आगे रहने की एक वजह यह भी है कि वे लडकों की अपेक्षा वे जल्द ही परिपक्व हो जाती हैं और भारतीय परिवेश में अपने तथा परिवार के प्रति जिम्मेदारियों से ज्यादा सजग रहती हैं। लडकों की अपेक्षा लडकियों का आत्म-नियंत्रण भी कहीं अच्छा होता है। समाजशास्त्रियों का आकलन है कि स्कूलों का समकालीन पाठयक्रम लडकियों को लडकों की अपेक्षा ज्यादा कुशाग्र बनाता है। अध्ययन से यह भी पता चलता है कि लडकिया बालवाडी (किंडरगार्टन) से लेकर कॉलेज की पढाई तक लडकों की अपेक्षा ज्यादा आत्म-नियंत्रित होती हैं। निर्देशों को अच्छी तरह से सुनना, उनका पालन करना और कडा परिश्रम करना लडकियों के लालन-पालन का अहम हिस्सा होता है। इन्ही सब गुणों के कारण लडकियां, लडकों की अपेक्षा बेहतर परिणाम लाने में सक्षम होती हैं। बेट्टियों का आगे रहना देश की खुशाहली को और अधिक मजबूत करता है।
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