पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सैनिकों के शवों को क्षत-विक्षत किए जाने के कृत्य पर पूरे देश में जबरदस्त गुस्सा है। यह तो अमानवीयता की इंतहा है और केवल जंगली जानवरों ही इस तरह का कृत्य करते हैं। पाकिस्तान के इस कृत्य ने सभ्यता के सारे मानदंड लांघ दिए हैं। पाकिस्तान सेना ने भारत की सीमा में 200 मीटर अंदर घुसकर यह कृत्य किया। यह भारत के लिए और भी शर्मनाक बात है कि पाकिस्तानी सेना भारत की सीमा में घुसकर उसके जवानों को मारकर शवों को क्षत-विक्षत कर जाए और सेना देखती रह जाए। क्या यह पाकिस्तान की सर्जिक्ल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई नही है? पहली बार भारत ने पाकिस्तान की बार्डर एक्शन फोर्स का नाम लिया है। इससे साफ है कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान की यह सुनियोजित साजिश थी। ताजा सूचना यह भी है कि सेना ने आतंकी संगठन लश्कर के साथ यह कृत्य किया है। देश को सबसे ज्यादा इसी बात का गुस्सा है। पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई के लिए देश भर में जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी पाकिस्तान ऐसा अमानवीय कृत्य कर चुका है। 2013 में पाकिस्तान ने भारत के सैनिक लायंस नाइक हेम राज के शव के साथ बर्बरता की थी और उसका सिर धड से अलग कर दिया था। पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान ने भारत के तीन सैनिकों को मार डाला था और एक सैनिक के शव को भी क्षत-विक्षत कर डाला था। कारगिल युद्ध के दौरान भी सैनिकों के शवों से भारी छेडछाड की गई थी। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार शवों से किसी भी तरह की छेडखानी नहीं की जा सकती। इस बारे में स्पष्ट दिशा -निर्देश जारी किए गए हैं। जेनेवा कन्वेंशन से लेकर ऑक्सफोर्ड मैनुअल तक में साफ-साफ कहा गया है कि सैनिकों के शवों से किसी भी तरह की बदसलूकी नहीं की जा सकती है। सैनिकों के शवों के साथ किसी भी तरह की छेडखानी नहीं हो, इसके लिए काफी पहले 1907 में हेग कनवेन्शन अपना लिया गया था। बाद में इसे जेनेवा कनवेन्शन में शामिल कर लिया गया। जेनेवा कनवेन्शन में साफ हिदायत दी गई है कि सैनिक अथवा किसी भी मानव शव से छेडछाड नहीं की जा सकती। युद्ध के दौरान सैनिकों का मारा जाना स्वभाविक है और एक-दूसरे को पराजित करने के लिए हर तरह की रणनीति भी अपनाई जाती है मगर मानवीय मूल्यों को दरकिनार कर जानवरों जैसा सलूक करने की कतई अनुमति नहीं होती है। इस्लाम में भी शवों से छेडछाड जैसे कृत्य को नापाक माना गया है। बहरहाल, पाकिस्तान की सेना को न तो मानवीय मूल्यों से सरोकार है और न ही ध्रर्म-ईमान से। पाकिस्तान को इस तरह का कृत्य करके नाक कटने के अपमान की भी परवाह नहीं है। पूरा देश अब इस सवाल का जवाब चाहता है कि सरकार कब तक पाकिस्तान की अमानवीय कृत्यों को सहन करती रहेगी? 2013 में जब सैनिक हेमराज का शव क्षत-विक्षत किया गया था, तब भी यही कहा गया था कि पाकिस्तान को इस कृत्य का माकूल जवाब दिय जाएगा और चार साल बाद अब वही कहा जा रहा है। आखिर यह माकूल जवाब दिया कब जाएगा? जनमानस पाकिस्तान और भारत के बीच इस कृत्य को लेकर डीजीएमओ स्तर की वार्ता से जनता को संतुष्ट नहीं किया जा सकता । पाकिस्तान सफेद झूठ बोल रहा है कि उसकी सेना ने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया है। वह पहले भी यही कह चुका है। पाकिस्तान के ताजा कृत्य से डीजीएमओ तो क्या किसी भी स्तर की वार्ता के कोई औचित्य नहीं है। सैनिक भी यही चाहते हैं कि बार-बार बेमौत मरने की बजाए, देष के लिए एक बार शहादत पाना कहीं ज्यादा बेहतर है। भारतीय सेना को पाकिस्तान से निपटने के लिए खुली छूट मिलनी चाहिए। भाजपा जब विपक्ष में थी, तब इस बात को पुरजोर उठाया करती थी। मोदी सरकार को अब इसे पूरा करना चाहिए।
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