मंगलवार, 23 मई 2017

ऐसे तो हादसे कम नहीं होंगे

भारत में सडक दुर्घटनाएं आतंकी घटनाओं से भी अधिक जानलेवा साबित हो रही हैं। आए दिन हो रही सडक दुर्घटनाओं में औसतन प्रतिदिन 425 अथवा सालाना लगभग डेढ लाख लोग मारे जाते हैं। देश  की राजधानी दिल्ली में ही प्रतिदिन पांच लोग और सोलह बच्चे सडक दुर्घटनाओं का  शिकार होते हैं। पंजाब में हर रोज 10 लोग, हरियाणा में 11 और हिमाचल प्रदेश  में 4 लोग सडक दुर्घटनाओं का  शिकार हो रहे हैं। 2015 में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश  और जम्मू-कश्मीर  में 11,000 लोग विभिन्न सडक दुर्घटनाओं में मारे गए थे। देश में कुल सडक दुर्घटनाओं में मरने वालों मेंसे  8.3 फीसदी इन चार राज्यों  से होते हैं।  हरियाणा और पंजाब सडक हादसों के मामलों में  शीर्ष  पर हैं।  पंजाब रोड सिविरिटी ( सौ में 73) में मिजोरम के बाद दूसरे टॉप  स्थान पर है। सडक हादसों में तमिल नाडु शीर्ष   पर है मगर  पंजाब और हरियाणा भी पीछे नहीं है। पंजाब में हर साल पांच हजार, हरियाणा में चार हजार और हिमाचल में एक हजार लोग सडक हादसों में मारे जाते हैं। रविवार को पंजाब में 11 लोग, हिमाचल और हरियाणा में 3-3 और जम्मू-कश्मीर  में दो लोग सडक हाद्सों में मारे गए। ज्यादातर हादसे तेज गति (ओवर-स्पीडिंग) और चालक की लापरवाही से होते हैं। रविवार को पंजाब के ब्यास में एक तेज गति वाहन ने रिक्शा  और खडी कार को टक्कर मार कर सात लोगों को बेमौत मार डाला। एक अन्य हादसे में तेज गति के दो वाहनों में भिडंत होने से चार लोग मारे गए। पंजाब और हरियाणा में तेज गति सडक दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण  हैं। देश  में  राष्ट्रीय  उच्च मार्गों अथवा अन्य सडकों पर गति की अधिकतम सीमा निर्धारित है मगर अमल में इनका पालन कम, उल्लघंन ज्यादा किया जाता है। यातायात नियमों की धज्जियां उडाने में वीवीआईपीज और उनके परिजन सबसे आगे रहते हैं। सडक हादसों के तुरंत बाद सरकार इन्हें कम करने के लिए अविलंब कारगर उपाय उठाने का संकल्प दोहराती है। आजादी के बाद से यही हो रहा है मगर न तो सडक हादसे कम हुए और न ही तेज गति और लापरवाह ड्राइविंग। केद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय अपनी तरफ से सडक दुर्घटनाओं को टालने के लिए हर मुमकिन प्रयास कर रहा है। देश  के  राष्ट्रीय  उच्च मार्गों पर कुल मिलाकर 726 “ब्लैक स्पॉट“ चिंहित किए गए हैं जो सडक हादसों के लिए जाने जाते हैं। इनमें दस दिल्ली में है, 350 पंजाब में और  157  हरियाणा में हैं। चंडीगढ पुलिस ने 15 और मोहाली में 40 सडक हादसों को न्यौता देने वाले स्पॉट माना हैं।  केद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय  ने इन खतरनाक स्पॉटस को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए अगले पांच सालों के लिए 11,000 करोड रु का बजट आवंटित कर रखा है। सडक सुरक्षा सप्ताह नियमित रुप से चलाया जा रहा है। रोड सेफ्टी जागरुकता अभियान चलाने के लिए स्वंयसेवी (एनजीओ) की मदद ली जा रही है। सरकार  रोड सेफ्टी नीति को भी संजीदगी से लागू कर रही है। केन्द्र सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश  कर रही है मगर भ्रष्ट  सरकारी तंत्र, कानून असम्मत जनमानस और कुछ हद तक राज्यों की रोड सेफ्टी के प्रति उदासनीता के कारण सडक हादसे कम होने की बजाए बढते ही जा रहे हैं। केन्द्र राज्यों को रोड सेफ्टी काउंसिल और जिला रोड सेफ्टी कमेटियां गठित करने को कई बार कह चुका है मगर अधिकतर राज्य ऐसा अभी तक ऐसा नहीं कर पाएं हैं। तेज गति पर अंकुष लगाने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है और न ही सीट बेल्ट और हेलमेट लगाने के प्रति सख्ती बरती जा रही है। इन हालात में सडक हादसे तो होंगे ही। सडक हादसों से बचना है तो प्रषासन के साथ-साथ लोगों को खुद भी सजग होना चाहिए।