राजधानी दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईएमवी) में छेडछाड प्रमाणित काने के लिए विधानसभा का सहारा लिया है। मंगलवार को सदन की बैठक जीएसटी (गुडस एंड सर्विसिस टैक्स) बिल को अनुमोदित करने के लिए बुलाई गई थी मगर केजरीवाल एंड पार्टी ने सदन में ईएमवी में छेडछाड का लाइव डेमो पेश कर देश के निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रकिया में तैनात लाखों कर्मचारियों की निष्पक्षता और विश्सनीयता को खुली चुनौती दी है। आप के सोफ्टवेयर इंजीनियर विधायक सौरभ भारद्धाज ने विधानसभा में नकली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन लाकर यह प्रमाणित करने की कोशिश की कि इसके साथ आसानी से छेडछाड की जा सकती है। सौरभ भारद्धाज ने यह दावा भी किया है कि अगर उन्हें निर्वाचन आयोग असली ईवीएम दे दें तो वे नब्बे सेकेंड (यानी डेढ मिनट) में इसका मदर बोर्ड बदलकर परिणाम हैक करके दिखा सकते हैं। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए “आप“ ने विधानसभा के भीतर डेमो दिया। बाहर देते तो लपेटे जाते। सदन में लॉमेकर्स कुछ भी कर सकते हैं। किसी की भी छीछालेदारी कर सकते हैं। संवैधानिक बॉडी की विश्वसनीयता को भी तार-तार कर सकते है, जैसा कि मंगलवार को विधानसभा में किया गया। सब कुछ पहले से तय था। ईवीएम से छेडछाड का मुद्दा उछाल कर केजरीवाल ने पार्टी के बर्खास्त मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा लगाए गए घूसखोरी के गंभीर आरोपों से देश का ध्यान बंटाने की कोशिश की है। अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार सुबह ही टवीट कर दिया था “ देश में चल रहे एक बडे षडयंत्र का सच आज सदन में सौरभ भारद्धाज देश के सामने रखेंगे। उन्हें जरुर सुनिएगा। सत्यमेव जयते“। आम आदमी पार्टी की सदन में भी केजरीवाल ने मिश्रा के आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया। अगर तोडा बहुत बोले तो सिर्फ ईएवीएम से छेडछाड पर बोले। मौजूदा परिवेश में यह अप्रासंगिक था। मगर जनता बहुत सयानी है। वह सब जानती है। टवीटर पर भी इस डेमो की खिल्ली उडाई जा रह है। एक काबिलेगौर प्रतिक्रिया है “सौरभ भारद्धाज ने साबित कर दिया है कि पार्टी ने दिल्ली में 70 मेंसे 67 सीटें कैसे जीतीं“। वैसे आप की इस बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि जिस पार्टी को दो साल पहले इन्हीं मशीनों के दम पर प्रचंड जनादेश मिला हो, वही पार्टी अब उस सिस्टम में खोट निकाल रही है। इस समय पूरा देश उस शख्स से दो करोड रु की कथित घूसखोरी का सच जानना चाहती है, जो खुद तीन साल पहले शीर्ष उधोगपतियों और राजनेताओं पर संगीन आरोप लगाकर उनसे तत्काल जवाब मांगा करता था। और अब वही शख्स अपने ऊपर लगाए गए गंभीर आरोपों पर बगले झांक रहा है। आरोप लगाने वाला कोई विपक्षी दल का नेता या राजनीतिक विरोधी नहीं है, बल्कि उनकी पार्टी का वरिष्ठ नेता है। माना, कपिल मिश्रा मंत्री पद से हटाए जाने से क्षुब्ध होकर बदले की भावना से काम कर रहे हैं और विरोधी दल उन्हें उकसा रहे हैं मगर देश को आरोपों का जवाब मिलना चाहिए। बहरहाल, सौरभ भारद्धाज के डेमो को भी सहज में दरकिनार नहीं किया जा सकता है । निर्वाचन आयोग भी इस बात को जानता है और इसी सिलसिले में 12 मई को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है और आम आदमौ पार्टी को इसमें विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है। बैठक में आम आदमी पार्टी को मशीनों में गडबडी साबित करने का मौका दिया जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने साफ-साफ कहा है कि चुनाव में इस्तेमाल की जा रही मशीनों से किसी भी सूरत में छेडछाड नहीं की जा सकती। इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। आप के डेमो ने देश की निष्पक्ष चुनाव प्रकिया की विश्वसनीयता और लोकतंत्र की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया है। इसका हर हाल में माकूल जवाब मिलना चाहिए।
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