मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

फसल बीमा योजना

किसानों के लिए फसल बीमा योजना उतनी ही जरुरी है, जितनी फसल उगाने के लिए बीज, खाद और पानी। किसान खून्-पसीना बहाकर फसल तैयार करता है पर कुदरत की मार पडने पर पलक झपकते ही उसका सब कुछ तबाह हो जाता है। बेचारा किसान, किस्मत का मारा हताशा  में आत्महत्या तक करने पर विवश  हो जाता है। देश  की यह सबसे बडी त्रासदी है कि आजादी के सात दशक बाद भी “अन्नदाता” किसान आज भी उतना ही लाचार है, जितना वह आजादी से पहले था। किसानों की इस पीडा को समझते हुए मोदी सरकार ने किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू तो की है मगर यह  कारगर साबित नहीं हुई है। आपदा के समय किसानों को अविलंब मदद की दरकार होती है मगर निजी कंपनियां तत्काल क्लेम नहीं देती। क्लेम लेने के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पडती है। किसान यह सब नहीं जानता। तरह-तरह की खामियों के कारण  पूर्व   शिरोमणि अकाली दल नीत बादल सरकार ने इस फसल बीमा योजना को नामंजूर कर दिया था। मगर बादल सरकार किसानों के लिए तसल्लीबख्श  फसल बीमा योजना तैयार नहीं कर पाई।  अब पंजाब में कैप्टन अमरेन्द सिंह सरकार ने राज्य के किसानों के लिए पुख्ता फसल बीमा योजना लागू करने की पहल की है। नई सरकार ने अपनी बीमा कंपनी बनाने का फैसला किया है ताकि किसानों की पक्की फसल को नुकसान होने पर उसे समय पर समुचित मुआवजा मिल सके। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सबसे बडी खामी यही है कि इसमें किसानों के हितों का जरा भी ध्यान नहीं रखा गया है। बीमा कंपनियों की कोई जबावदेही तय नहीं है। अभी तक यह भी पता नहीं है कि किसान कैसे क्लेम करे और अगर क्लेम नहीं मिलता है, तो अपील कहां करे। प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत पूरे गांव को यूनिट बनाया गया है। यानी अगर पूरे गांव की फसल खराब हुई है तो ही क्लेम मिलेगा। किसानों को  शिकायत है कि अक्सर ओलावृष्टि  जैसी आपदा पूरे गांव की बजाए आंशिक  अथवा कुछ एक खेतों में पडते हैं। इस स्थिति में नुकसान का आकलन नहीं किया जाता। दस फीसदी से ज्यादा नुकसान का पैमाना जरा भी किसान के हित में नहीं है जबकि सरकार भी यह सच्चाई जानती है कि औसतन नुकसान दस फीसदी से कम रहता है। इस स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित की बजाए बीमा कंपनियों का ही हित साध रही है। केन्द्रीय फसल योजना के तहत प्रीमियर का पैसा सीधे बैंक से कटता है और कई बार दो या तीन दिन बार क्योंकि किसानों के एक से ज्यादा अकांउट होते हैं। जाहिर है इस स्थिति से किसानों की बजाए बीमा कंपनियां को ज्यादा फायदा हो रहा है। फसल बीमा योजना की सबसे बडी खामी यह है कि बीमा कंपनियां केवल अपना मुनाफा देखती हैं और क्लेम देने में सौ तरह की मीन-मेख निकालती हैं। इन सब बातों के  दृष्टिगत  अमरेन्द्र सरकार का अपनी बीमा कंपनी बनाने का फैसला काबिलेतारीफ है। इसका सबसे बडा फायदा यह होगा कि कंपनी की जवाबदेही राज्य सरकार के प्रति होगी और कंपनी वही करेगी जो सरकार कहेगी। सरकार की कंपनी का मूल मकसद मुनाफा कमाना नहीं होगा और वह निजी कंपनियों की तुलना में कहीं ज्यादा किसानों के हितों का ख्याल रखेगी। प्रीमियर का पैसा भी बाहर नहीं जाएगा और आपदा के समय तत्काल किसानों की मदद हो पाएगी। बहरहाल, कर्ज  और आर्थिक बदहाली में डूबे पंजाब के किसानों को कर्ज  माफी और आपदा में मददगार फसल बीमा योजना बडी राहत दे सकती है। इन योजनाओं को अगर सफल अंजाम दिया जाता है, राज्य का किसान  अमरेन्द्र सरकार  की बल्लियां लेगा।