आतंक और अलगाववादी हिंसा में झुलस रहे जम्मू-कश्मीर में आए रोज कोई-न-कोई ऐसी घटना हो जाती है या करा दी जाती है, जिससे सेना और स्थानीय लोगों के बीच की दूरी बढती ही जाए और अलगाववादियों के नापाक मंसूबे फले-फूले। इस माह की 9 तारीख को श्रीनगर लोकसभाई सीट के लिए हुए मतदान के दौरान सेना द्वारा मानव आवरण (ह्यूमन शील्ड) के रुप में एक व्यक्ति को जीप से बांधने की घटना पर इन दिनों कश्मीर घाटी में बवाल मचा हुआ है। इस घटना का वीडियो वायरल होते ही सेना के खिलाफ घाटी में गुस्सा और भडक गया है। सोमवार को राज्य की पुलिस ने इस मामले में सेना के खिलाफ प्राथमिक (एफआईआर) दर्ज की । इस वीडियो को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। जाहिर है इस वीडियो को किसी खास मकसद से तैयार करने के बाद इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। इस वीडियो में आरोप लगाया गया है कि सेना ने मतदान के दौरान हिंसक भीड़ से निपटने के लिए स्थानीय व्यक्ति को जीप में बांध कर उसे मानव आवरण के तौर पर इस्तेमाल किया। जिस व्यक्ति को जीप में बंधा दिखाया गया है, उसने बाद में खुद माना कि वह अपना वोट डालने के बाद जब घर लौट रहा था, उसे गिरफतार कर लिया और प्रद्रशनकारियों निपटने के लिए जीप के फ्रंट से बांध दिया। सुरक्षाकर्मियों ने बाद में जांच टीम को बताया कि मतदान के समय उपचुनाव का बहिष्कार करने वाले अलगाववादी एक पोलिंग बूथ को घेर कर वहां तैनात पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को जिंदा जलाने की फिराक में थे। सेना को इन सुरक्षाकर्मियों का एसओएस मिला और सैनिक तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। लेकिन अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि क्या सेना ने वाकई ही प्रद्रशनकारियों से निपटने के लिए मानव आवरण का इस्तेमाल किया ? सेना के खिलाफ दर्ज एफआईआर से इस बात की पुष्टि हो रही है। मगर अब तक का अनुभव इस बात की गवाही नहीं देता है। सेना ने आज तक कभी भी हिंसक प्रद्रशनकारियों से निपटने के लिए मानव आवरण को ढाल नहीं बनाया। मूलतः, प्रद्रशनकारियों से निपटने का यह कवच इसराइली सेना द्वारा फलीस्तीनियों खिलाफ प्रयोग किया जाता रहा है। सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरबाजी की प्रैक्टिस भी फलीस्तीन से ही कश्मीर में आई है। फलस्तीनी युवक इसराइली सैनिकों को पत्थर फेंक कर भगाने की कोशिश करते थे । इसराइली सैनिकों द्वारा फलीस्तनी प्रद्रशनकारियों के खिलाफ 7 साल के बालक को ह्यूूमन शील्ड बतौर इस्तेमाल करने की घटना के सार्वजनिक हो जाने के बाद 2016 में वहां भी इस प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इससे पहले 2009 में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायल पर 11 साल के बालक को ह्यूूमन शील्ड बतौर इस्तेमाल करने की पुष्टि हुई थी। बहरहाल, भारतीय सेना इजराइल की तरह किसी व्यक्ति को मानव आवरण बतौर प्रयोग करे, इस पर सहज में विश्वास करना कठिन है। सेना लंबे समय से कश्मीर मेँ तैनात है और सरकार ने आर्म्ड फोर्सिस स्पेशल पॉवर एक्ट के तहत सुरक्षाकर्मियों को बेतहाशा अधिकार दे रखे हैं। किसी व्यक्ति को जीप में बांधकर सेना कश्मीर को आतंक और हिंसा की भठ्ठी में झोंकने वाले अलगाववादियों से निपटने के लिए ऐसी बचकानी हरकत नहीं कर सकती। कश्मीर में आतंकी इतने भी नौसिखिए नहीं हैं कि वे जीप में बंधे हट्टे-कटटे व्यक्ति को देखकर संयम बरतें। दिन-रात निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों के खिलाफ इस तरह की सामरिक नीति जरा भी प्रभावी नहीं हो सकती। और भारतीय सेना इतनी भी कच्ची नहीं है कि वह इस तरह की किसी घटना का वीडियो बनने देती। जाहिर है यह सब सेना को बदनाम करने के लिए किया गया है। दुखद यह है कि सियासी नेता वोट की खातिर किसी भी हद तक जा सकते हैं।
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