तमाम पेट्रोल पंप अगर रविवार को बंद रहें, तो इससे देश को फायदा ही होगा। फ्यूल की बचत होगी, कॉस्ट कटिंग भी होगी और फीलिंग स्टेशन पर काम करने वालों को भी साप्ताहिक अवकाश मिल पाएगा। आम के आम, गुठ्लियों के भी दाम। फ्यूल भी बचेगा और प्रदूषण से भी निजात मिलेगी। कंसोर्टियम ऑफ इंडियन पेट्रोलियम डीलर्स ने 10 मई से देश भर के सभी फीलिंग स्टेशन रविवार को बंद रखने और बाकी दिन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक काम करने की धमकी दी है। पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि ऑयल कंपनियां उनका मार्जिन बढा नहीं रही हैं जबकि पंप को चलाने की लागत उतरोत्तर बढती ही जा रही। जनवरी में भी पेट्रोल पंप मालिकों ने हडताल की धमकी दी थी और तब ऑयल कंपनियों ने डीलर्स को मार्जिन बढाने का आश्वासन देकर इसे टाल दिया था, मगर अभी तक बढाया नहीं है। इस स्थिति के दृष्टिगत कॉस्ट कटिंग के लिए डीलर्स के पास रविवार को पंप फीलिंग स्टेशन बंद रखने और अन्य दिन सीमित समय के लिए काम करने के सिवा कोई चारा नहीं रह गया है। लेकिन पेट्रोल पंप के डीलर्स इस धमकी को लेकर एकमत नहीं है। कंसोर्टियम ऑफ इंडियन पेट्रोलियम डीलर्स रविवार को फीलिंग स्टेशन बंद रखने के पक्ष में है तो ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन इसका विरोध कर रहा है। बहरहाल, पेट्रोल पंप मालिकों की यह धमकी काबिलेगौर है और इससे देश का हित ही होगा। पूरे देश में इस समय 56,190 फीलिंग स्टेशन हैं। इनमेंसे 52,604 साार्वजनिक सेक्टर की तेल कंपनियां- इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम एवं भारत पेट्रोलियम- के हैं। बकाया निजी कंपनियों के। 2014-15 के दौरान देश में लगभग 1650 लाख टन फ्यूल (पेट्रोल-डीजल, एविएशन फ्यूल) की खपत हुई थी मगर 2015-16 में यह बढकर 1830 लाख टन को भी पार कर गई थी। 2016-17 में फ्यूल की खपत 2100 लाख टन को भी पार कर सकती है। खपत की तुलना में देश में कच्चे तेल का उत्पादन बहुत कम है। पिछले चार साल में तेल का घरेलू उत्पाद लगातार कम हो रहा है। 2015-16 में फ्यूल की 1830 लाख टन खपत की तुलना में घरेलू उत्पादन मात्र 369 लाख टन रहा। 2015-16 में भारत को अपनी फ्यूल खपत का 81 फीसदी से भी अधिक आयात करना पडा जबकि 2014-5 में आयात 78.5 फीसदी था। 2015-16 में भारत ने 2000 लाख टन कच्चे तेल का आयात किया था। देश की काफी विदेशी मुद्रा तेल के आयात पर खर्च हो रही है। देश को अगर अपनी विदेषी मुद्रा बचानी है, तो पेट्रोल-डीजल की बचत करनी होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2022 तक फ्यूल आयात को 67 फीसदी तक घटाने का लक्ष्य तय कर रखा है। अगर रविवार को देश भर के पेट्रोल पंप रविवार को बंद रहते हैं, तो इसमें बुरा ही क्या है। आपतकालीन सेवाओं के लिए अलग से व्यवस्था की जा सकती है। देश में हर दिन लगभग औसतन 3,660,000 बैरल (581940000 लीटर) पेट्रोल-डीजल की खपत होती है और अगर रविवार को फीलिंग स्टेशन बंद रहते हैं तो हर माह कम-से-कम एक लाख बैरल की बचत की जा सकती है। कंसोर्टियम ऑफ इंडियन पेट्रोलियम डीलर्स ने रविवार को फीलिंग स्टेशन बंद रखने के लिए प्रधानमंत्री के ”फ्यूल बचाओ” अभियान का हवाला दिया है पर माना यही जा रहा है कि डीलर्स ऑयल कंपनियों पर दबाव डालने के लिए रविवार को पेट्रोल पंप बंद रखने की धमकी दे रहे हैं। ऐसी धमकी डीलर्स पहले भी दे चुके है पर इस पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है। देश में फ्यूल को बचाने के लिए दिल्ली की सम-विषम (ऑड-ईवन) स्कीम से कहीं ज्यादा रविवार को पेट्रोल पंप बंद रखना प्रभावी साबित हो सकता है।
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