सोमवार, 10 अप्रैल 2017

“भगवा गणतंत्र“

क्या हम “भगवा गणतंत्र“ की ओर जा रहे हैं? केन्द्र और विभिन्न राज्यों  में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से बदस्तूर जारी भगवा पार्टी से जुडे संगठनों और उनके कार्यकर्ताओं की मानसिकता से यही अहसास होता है। गौ-तस्करों  की सरेआम पिटाई करना, गौ-मांस सेवन के संदेह मात्र पर किसी को जलाकर मार डालना और  दलितों को पकडकर उन्हें निर्वस्त्र करने जैसे कृत्य आए दिन की बात हो गई है। गत दिनों राजस्थान के अलवर में गौ-रक्षकों ने एक आदमी को तस्करी के संदेह में जान से मार डाला।  और-तो-और  भगवा संगठनों से जुडे लोग वेलेंटाइन डे पर प्रेमियों को अपमानित करने अथवा महिलाओं की स्वतंत्रता पर टोका-टोकी  करने में भी कोई कसर नहीं छोडते हैं। धर्मांतरण का मामला हो या सहिष्णुता , यह सब भी भगवा संगठनों की मनमाफिक किया जाना चाहिए, वरना आप “पाकिस्तानी“ करार कर दिए जाएंगे।  अवैध मंदिर तोडे जाने पर भगवावस्त्रधारी आसमान सिर पर उठा लेते हैं मगर  मस्जिद तोडने में जरा भी गुरेज नहीं करते। हालिया घटनाएं साफ-साफ कह रहीं हैं कि भगवा संगठनों को  देश  में कानून को अपने हाथ में लेने का जैसे लाइसेंस मिल गया हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश  को तीव्र विकास , डिजिटल इंडिया और “मेक इन इंडिया“ के सपने दिखा रहे हैं पर भगवा संगठन भारत को अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में धकलने पर आमादा हैं। गौ-रक्षकों की खडमस्तियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट  में याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने  शुक्रवार को इस याचिका पर केन्द्र और उत्तर प्रदेश , राजस्थान समेत 6 राज्यों को नोटिस भी जारी किया है। वीरवार को सुप्रीम कोर्ट  ने अयोध्या में विवादित ढांचे पर कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में न्याय नहीं हुआ है। सीबीआई ने भी इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ  नेता लाल कृष्ण  आडवानी, मुरली मनोहर जोशी  और सुश्री उमा भारती समेत 13 पर आपराधिक मामला बहाल करने का आग्रह किया है। 25 साल से यह मामला लंबित पडा है। भाजपा राम मंदिर के मुद्दे को लंबा खींचकर इसे राजनीतिक फायदे के लिए भुनाना चाहती है। और अब जब भगवा पार्टी को लग रहा है कि राम मंदिर का मुददा ज्यादा समय तक भुनाया नहीं जाया सकता, गौ रक्षा के मुद्दे को उछाला जा रहा है। निसंदेह, गौ माता भारत की अस्मिता से जुडी है मगर इस सच्चाई को भी नकारा नहीं जा सकता कि “ गौ-माता“ के प्रति हमारी श्रद्धा ने पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचाया है। ताजा अध्ययन से पता चलता है कि गाय जितनी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करती हैं, उतनी पेट्रोल-डीजल पर चलने वाले वाहन भी नहीं करते हैं। धरती के वायुमंडल को जहरीला बनाने में मीथेन गैस को प्रमुख तौर पर जिम्मेदार माना जाता है। मीथेन गैस के ग्रीनहाउस प्रभाव को वायुमंडल के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक माना जाता है। ग्रीन गैस सूर्य की गर्मी को सोखती है और धरती को गर्म करती हैं। नासा की रिपोर्ट के अनुसार गाय, भेड-बकरियां बडी मात्रा में मीथेन गैस छोडती है। अनुमान है कि 90 ंमीलियन टन मीथेन गैस पालतु जनवरों से उत्सर्जित होती हैं। जानवरों की पाचन प्रकिया जुगाली के कारण मीथेन गैस बनती है। ईंधन जलाने से लेकर दुधारु पशु  पालन तक सभी कामों में मीथेन गैस उत्सर्जन का बडा हाथ है। भारत में विकसित देशों  की तरह गाय को नकारा नहीं जाता, बल्कि उसकी ताउम्र सेवा की जाती है। इसी कारण  गौ-वंश की आबादी  उतरोतर बढती ही जा रही है। तथापि, भारत दुनिया में बीफ का सबसे बडा निर्यातक है। 2015 में भारत से 2081 हजार मीट्रिक टन बीफ का निर्यात किया गया था। यह अमेरिका के 1167 हजार मीट्रिक टन निर्यात से लगभग दोगुना  है। बहरहाल, कानून को अपने हाथ में लेकर गौ-रक्षा करना कोई जिम्मेदारी का काम नहीं है। इससे देश  की अखंडता पर ही प्रहार हो रहा है।