एक जमाने में शराब उद्योग को नया आयाम देने वाले उधोगपति और खेल प्रेमी विजय माल्या के सितारे इन दिनों गर्दिश में है। और इसके लिए माल्या खुद जिम्मेदार हैं। किसी भी कारोबार को कुशाग्र और समयबद्ध निर्णय से ही आगे बढाया या डूबोया जा सकता है। इसी कारण “किंग ऑफ गुडस टाइम्स“ के तखलुस्स से नवाजे गए विजय माल्या अब “ किंग ऑफ बैड टाइम्स“ के प्रतीक बन गए हैं। अति महत्वाकांक्षी विजय माल्या को अपना कारोबार बढाने का जनून था। माल्या हमेशा अपने कारोबार का दायरा बढाने में लगे रहते। उन्होंने कई व्यवसायों को शामिल कर अपने कारोबार का दायरा बढाया भी। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से उन्हें प्रतिभाशाली लोगों को चुन-चुन कर अपने साथ मिलाया और अपनी शराब कंपनी किंगफिशर को बुलदियों पर पहुंचाया। तथापि, भारत में शराब व्यवसाय को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है। इसलिए विजय माल्या इससे पीछा छुडाना चाहते थे। माल्या ने मैन्युफेक्चरिंग, फर्टिलाइजर, टेलिविजन और नागरिक विमानन में निवेश भी किया। उन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस को ऐसे समय में शुरु किया जब यह उधोग बुरे दौरे से गुजर रहा था। शराब कारोबार में 40 से 50 फीसदी मुनाफे की तुलना में एयरलाइंस में एक से दो फीसदी भी बमुश्किल मुनाफा कमाया जा सकता है। माल्या का एक और जनून थाः नई-नई कंपनियां खरीदना। और कई बार बगैर ठोंक-पीट कर कंपनियां खरीदते। यही उनकी सबसे बडी गलती थी। किंगफिशर को अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनी बनाने के चक्कर में माल्या ने भीषण घाटे में चल रही एयर डेकन को मुंहमांगे दाम पर खरीदा। माल्या ने एयर डेक्न की बैंलेस शीट तक नहीं देखी जबकि हर कारोबारी सबसे पहले यही करता है। उस समय माल्या का कारोबार बुलंदियों पर था। इतना ही नहीं विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस पर दोनों हाथों से खूब पैसे उडाए। किसी यात्री की फ्लाइट छूट गई तो वे उसे फौरन कंपनी के खर्चे पर दूसरी एयरलाइंस की फ्लाइट से भिजवाते। किंगफिशर के लिए उन्होंने महंगी से महंगी विदेशी पत्रिकाएं मंगवाई मगर इस बात पर जरा भी ध्यान नहीं दिया कि क्या वे कंपनी के गोदामों से बाहर भी निकलीं। किंगफिशर के प्रचार के लिए महंगी से महंगी मांडल को हायर कर उनपर डटकर पैसे लुटवाए। इन सब बातों का कंपनी के मुनाफे पर बुरा असर तो पडना ही था। जिस उधोग में मुनाफ का मार्जिन बहुत ही कम हो, वहां कोई भी कारोबारी पैसे इस तरह से बर्बाद नहीं करता। नतीजतन, माल्या के पास न तो किंगफिशर शराब कंपनी रही और न ही किंगफिशर एयरलाइंस चल पाई। किंगफिशर चलाने के लिए बैंकों से भारी-भरकम कर्जा लिया मगर कंपनी भी डूबी और माल्या भी। लगभग 9000 करोड डकार जाने के बाद वे गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेश भाग गए और अब भारतीय बैंकिग उधोग की “नॉन-परफॉर्मिंग एसेट” के सिंबल बने हुए हैं। भारत के प्रत्यर्पण आग्रह पर मंगलवार को स्काटलैंड यार्ड ने माल्या को गिरफ्तार किया तो सही मगर तीन घंटे के भीतर उन्हें कोर्टे से जमानत भी मिल गई। माना जा रहा है कि औपचारिकता निभाने के लिए माल्या खुद पुलिस के सामने पेश हुए और इस दौरान उनके वकील न्यायालय में उनके लिए जमानत की कार्रवाई करते रहे। इससे साफ है कि भारत सरकार के लिए माल्या का प्रत्यर्पण करवाना आसान नहीं है। इससे पहले भी भारत ललित मोदी, अजय प्रसाद खेतान, आनंद कुमार जैन, विजयेन्द्र कुमार रस्तोगी, रवि शंकरण सरीखे कई क्रिमिनल भगोडों का प्रत्यर्पण कराने में कामयाब नहीं हो पाई है। इंग्लैंड में प्रत्यर्पण की प्रकिया बेहद लंबी न्यायिक प्रकिया है। आरोपी को अपील का अधिकार होने के कारण, वह इसे लंबा खींच सकता है। इसीलिए, इंग्लैंड के साथ प्रत्यर्पण संधि होने के बावजूद माल्या को भारत लाना आसान नही है। विजय माल्या इस स्थिति से बखूबी परिचित हैंे, इसीलिए इग्लैंड भाग गए।
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