पूृरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र की जय-जयकार हो रही है। ऐसा लोकतंत्र में ही संभव है कि घर-बार छोडकर सन्यासी बने महंत योगी आदित्यनाथ दुनिया के पांचवे सबसे बडे राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाएं। पांच बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं और अब सीधे देश के सबसे बडे प्रांत के मुख्यमंत्री। उनके मुख्यमंत्री बनने से पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। पाकिस्तान बुरी तरह से तिलमिलाया हुआ है और इस मुल्क के हर अग्रणी अखबार में योगी आदित्यनाथ को मुस्लिम विरोधी और कट्ट्रपंथी हिंदू बताकर भारत के मुसलमानों को डराया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ भाजपा के फायरब्रांड और हार्डलाइनर लीडर हैं। मुसलमानो के खिलाफ जमकर आग उगलते हैं। विदेशी मीडिया ने भी टिप्पणी की है कि योगी आदित्यनाथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुस्लिम विरोधी बयानों और मुसलमानों की अमेरिका में एंट्री प्रतिबंध करने की जमकर तारीफ करते रहे हैं। इसके क्या अभिप्राय निकाले जाएं? क्या योगी आदित्यनाथ भी ट्रंप की तरह मुसलमान विरोधी दृष्टिकोण अपनाएंगे और अमेरिका की ही तरह योगी की युवा वाहिनी अथवा उनके समर्थक अल्पसंख्यको के खिलाफ आग उगलेंगे़? वैसे आंकडे इस बात के गवाह हैं कि जब-जब भी भाजपा सत्ता में आई है, सांप्रदायिक तनाव कम हुआ है और सदभाव बडा है हालांकि कटटरपंथी मुस्लिम नेता माहौल को खराब करने की हरचंद प्रयास करते रहे हैं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही उनके खिलाफ जिस तरह का प्रदूषित प्रचार किया जा रहा है, ठीक उसी तरह 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी “जहर” उगला गया था। सच यह है कि मोदी सरकार के अढाई साल के शासन में जितने सुरक्षित मुस्लिम समुदाय रहा है, उससे पहले ऐसा कभी नहीं था। किसी पार्टी विशेष के सत्ता में आने से देश के अल्पसंख्यक असुरक्षित हो जाएं, इस बात में कोई वजन नहीं है। ऐसा प्रचार करके राजनीतिक दल अपनी सियासी रोटियां सेंक रहे हैं। सरकार और शासन संविधान से चलता है, किसी पार्टी के हिंदू अथवा मुसलमान विरोधी एजेंडे से नहीं। भाजपा का फायरब्रांड और हार्डलाइनर भगवावस्त्रधारी पहली बार मुख्यमंत्री नहीं बना है। इससे पहले भगवा वस्त्रधारी सुश्री उमा भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं है और उनके शासन में राज्य के मुसलमानों को कोई परेशानी नहीं हुई। बहरहाल, योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की कमान दिए जाने से भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अपने “हिदुं एजेंडे“ को संजीदगी से कार्यन्वित कर रही है। इससे यह भी साफ है कि पार्टी की राजनीति में अगर लॉग इन “ डवलपमेंट“ है, तो पासवर्ड “हिन्दुत्व“ है। पार्टी की प्रमुख पहचान क्योंकि “हिन्दुत्व“ में है, इसलिए योगी आदित्यनाथ, उमा भारती, मनोहर लाल खट्टर और सर्बानंद सोनेवाल सरीखे नेताओं के लिए विशेष स्थान है। यह कोई नई बात नहीं है। भाजपा विकास की बातें करतीं है मगर उसका पूरा फोक्स हिन्दुत्व पर रहता है। और इसी मकसद से सबसे पहले शिक्षा के साथ-साथ जनमानस की जीवनशैली का भी भगवाकरण किया जा रहा है। उतर प्रदेश को हिन्दुत्व एजेंडे की प्रयोगशाला बनाने के पीछे भाजपा का मिशन 2019 और मिशन गुजरात भी काम कर रहा है। इस साल गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव होने है। गुजरात मे भाजपा ने 150 सीटें हासिल करना का लक्ष्य रखा है और इसमें भी “हिन्दुत्व“ एजेंडे की प्रमुख भूमिका रहेगी। बहरहाल, योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी नहीं बन सकते। उनके पास न तो मोदी जैसी सोच है और नही वैसा प्रशासनिक अनुभव। उत्तर प्रदेश में सुशासन लाना बेहद चुनौतीपूर्ण है और इसे पूरे देश पर शासन करने से ज्यादा कठिन माना जाता है। योगी आदित्यनाथ, इस कसौटी पर कैसे खरे उतरते हैं, समय ही इसका जवाब देगा।
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