पुरानी कहावत है “बेशर्म के सिर में पेड उगने पर, वह खुशी से उछलता हुआ बोला " अच्छा हुआ छांव तो मिलेगी“। पाकिस्तान सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे मुहम्मद अली दुर्रानी के 2008 के मुंबई नर संहार पर ताजा वक्तव्य को लेकर पाकिस्तान की नीयत और सीरत भी इस कहावत जैसी ही है। मुंबई नर संहार हो या पठानकोट या उडी आतंकी हमला, भारत द्धारा ठोस प्रमाण दिए जाने के बावजूद पाकिस्तान बहाना-दर- बहाने लगाकर आतंकियों पर कार्रवाई टालता रहा है। और उसके इस रवैए को देखकर यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि हाफिज सईद और मसूद अजहर अगर खुद भी कहे कि भारत पर आतंकी हमले उन्होंने ही करवाए हैं, पाकिस्तान तब भी नहीं मानेगा । दुर्रानी के ताजा वक्तव्य की कोई ज्यादा प्रासंगिकता नहीं है। दुर्रानी यही बात मुंबई हमले के तुरंत बाद 2009 में भी कह चुके हैं। पाकिस्तान ने न तो तब इसे गंभीरता से लिया था और न ही अब इस पर कोई ध्यान देगा। इसके विपरीत पाकिस्तानी फिर वही रटा-रटाया आरोप लगाएंगे कि दुर्रानी भारत की जुबान बोल रहें हैं । 2009 में पाकिस्तान ने दुर्रानी के वक्तव्य पर कार्रवाई करने की बजाए उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पद से ही हटा दिया था। भारत लाख प्रमाण दे मगर पाकिस्तान इन्हें मानने से रहा। दुर्रानी ने क्योंकि यह मत दिल्ली में रक्षा अनुसंधान और रक्षा विश्लेषण संस्थान के संबोधन के दौरान जाहिर किया है, लिहाजा इस स्थिति के दृष्टिगत इसे बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। पाकिस्तान के सियासतदान अक्सर जो बातें देश के बाहर जाकर करते हैं, स्वदेश लौटते ही पलटी मार जाते हैं। निसंदेह, दुर्रानी के वक्तव्य मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जमात-उद-दावा और लश्कर -ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद और पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड की घेराबंदी के लिए भारत के काम आ सकता है। इसके साथ ही जमीनी सच्चाई यह है भी कि अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तान छोटी-मोटी कार्रवाई कर भी ले, इस्लामाबाद हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकी सरगनाओं को कडी सजा देने का दुस्साहस नहीं कर सकता। हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकी सरगना इस सच्चाई से भली-भांति वाकिफ है। हाफिज सईद हालांकि इस समय नजरबंद है । पाकिस्तान का अवाम भी मानता है कि यह कोई सजा नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब उन्हे जेल में मुफ्त में बरियानी मिल रही है। तथापि, दुर्रानी का यह वक्तव्य चीन को आइना दिखाने के काम आ सकता है। चीन अपनी वीटो पॉवर इस्तेमाल करके मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी घोषित नहीं होने दे रहा है। चीन इस बात के लिए ठोस प्रमाण मांग रहा है। भारत द्वारा दिए गए सबूतों को पाकिस्तान की तरह चीन भी नहीं मानता है। पर दुर्रानी के वक्तव्य को चीन आसानी से खारिज नहीं कर सकता। मुंबई हमले में मसूद अजहर का भी हाथ बताया जाता है। दो जनवरी, 2016 को पठानकोट आतंकी हमले का मास्टरमाइंड भी मसूद अजहर ही है। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बाकायदा मसूद अजहर को हमले का सरगना नामित कर रखा है। बहरहाल, दुर्रानी का यह कथन काबिलेगौर है कि आतंकी हमलों में पाकिस्तान सरकार का कोई हाथ नहीं है। सवाल यह है कि अगर आतंकी हमलों में पाकिस्तान का हाथ नहीं है तो इस्लामाबाद हाफिज सईद और मसूद अजहर और उनके आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित क्यों नहीं करता? दुर्रानी के इस कथन के यह मतलब भी निकाले जा सकते हैं कि पूर्व सुरक्षा राष्ट्रीय सलाहकार दिल्ली आकर पाकिस्तान सरकार की पैरवी कर रहे हैं। बहरहाल, इस सारे घटनाक्रम का सुखद पहलू यह है कि आतंक की भीषण आग में बुरी से झुलस रहे पाकिस्तान को कहीं-न-कहीं इस सच्चाई का अहसास हो रहा है कि भारत के साथ वार्ता सिलसिला जारी रहना चाहिए। इससे उम्मीद बंधती है कि देर-सबेर पाकिस्तान हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे दुर्दांत भारत विरोधी आतंकियों पर नकेल कस सकता है।
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