गुरुवार, 9 मार्च 2017

आईएस का खौफ

मंगलवार (सात मार्च) को मध्य प्रदेश  और उत्तर प्रदेश  में आतंक से जुडी तीन घटनाओं ने देश  को फिर झकझोर डाला है। मंगलवार सुबह भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में दो धमाके हुए और इसमें दस यात्री जख्मी हो गए। दोनों बम निम्न तीव्रता क्षमता के थे, इस वजह नुकसान ज्यादा नहीं हुआ।  इस आतंकी हमले के कुछ घंटों बाद तेलगांना पुलिस ने आतंकियों के नाम और उनके संभावित ठिकानों की सूचना फ्लैश  कर दी और उनके कानपुर, लखनऊ औतर उन्नाव में छिपे होने की आशंका जताई। पुलिस फौरन हरकत में आई और कानुपुर से तीन, उन्नाव से दो और इटावा से एक आतंकी को गिरफ्तार कर लिया गया। इन गिरफ्तारियों से पुलिस को पता चला कि एक आतंकी राजधानी लखनऊ के एक घर में छिपा हुआ है। पुलिस उसे पकडने पहुंची मगर वह मुकाबला करता रहा। लगभग नौ घंटे की मुठभेड के बाद  वह मारा गया। उसके पास से 8 गन और 600 गोलियां बरामद हुईं हैं। आतंकी सैफुल्लाह के घर से आईएसआईएस का फ्लैग और साहित्य भी बरामद हुआ है।  पुलिस ने इस आतंकी को जिंदा पकडने का हरसंभव प्रयास किया मगर वह इसमें कामयाब नहीं हुई। उसके दो साथियों की तलाश  जारी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मंगलवार की आतंकी घटनाओं के लिए अरब के दुर्दांत आतंकी संगठन आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया)  को जिम्मेदार माना जा रहा है। आतंकी सैफुल्लाह आईएसआईएस के खुरासान मोड्यूल से जुडा हुआ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कथित खुरासान मोड्यूल से  भारत के 13 आतंकी जुडे हुए है। इन मेंसे छह  पकडे जा चुके हैं। एक मारा जा चुका है और छह अभी फरार हैं। आतंकियों ने भोपाल-उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट की तस्वीरें सीरिया में अपने आकाओं को भी भेजी है। खुफिया एजेंसियों की सूचनाओं के अनुसार आईएसआईएस ने दावा किया है कि  भोपाल-उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट  तो मात्र ट्रेलर था। इसके बाद और घातक बम विस्फोट किए जा सकते हैं। भारत में आईएसआईएस का यह पहला हमला है। पुलिस का कहना है कि आतंकियों ने इंटरनेट से बम बनाना सीखा था। इसलिए अभी तक आतंकी निम्न तीव्रता (लो-इन्टंेस्टि) का बम बना पाए थे। भोपाल-उज्जैन में भी लो-इन्टंेस्टि के बम प्लांट किए गए थे। इसी कारण जान-माल का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। बुधवार को पुलिस ने  स्पष्टीकरण  दिया कि कथित खुरासान मोड्यूल और इसके मेंबर सीधे तौर पर  आईएसआईएस के संपर्क में नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट से प्रेरित होकर खुद आईएस के मेंबर बने है और ये घर  बैठेै (होम ग्रोन, सेल्फ रेडिक्लाइजाइड) ही आईएसआईएस के स्वंयभू सदस्य हैं। खुद ही बम बनाने और घातक हथियारों को चलाने का प्रषिक्षण लिया और वित्तीय स्त्रोत भी खुद ही  जुटाए ।  भोपाल-उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट पुलिस की इस बात की गवाई देता है। रक्षा  विशेषज्ञ  भी यह बात को मानते हैं कि  आईएसआईएस जैसा दुर्दांत आतंकी संगठन को अगर भारत में आतंकी हमला कराना ही था, तो वह निम्न तीव्रता वाले बमों से हमला नहीं करवाता। बहरहाल, युवकों का घर बैठे इंटरनेट से प्रेरित होकर आतंकी बन जाना और देश  में हिंसा फैलाने की प्रवृति बेहद खतरनाक है। यह कोई नई बात नहीं है। बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और सामाजिक अन्याय इसके लिए प्रमुख रुप से जिम्मेदार है। देश  को आजाद हुए सात दशक हो गए हैं मगर इस दौरान बेरोजगारी बढी है। अमीर और गरीब के बीच की खाई और चौडी होती जा रही है। देश  में बेरोजगारी जितनी ज्यादा बढेगी, युवाओं में उतनी ही ज्यादा हताशा  पनपेगी और वे राष्ट्रीय  मुख्यधारा से  अलग होते जाएंगे। पंजाब इस पीडा को झेल चुका है और अब  कश्मीर  भी इस मर्ज से पीडित है, पूर्वोतर भारत तो सालों से  इस मकडजाल में उलझा हुआ है। सच कहा जाए तो  आईएसआईएस, लश्कर , अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन भारत की अखंडता के लिए इतना बडा खतरा नहीं है, जितनी बेरोजगारी, आर्थिक विषमता और सामाजिक अन्याय से उपजी समस्याएं। सरकार को इनका अविलंब हल निकालना पडेगा।