लोकतंत्र में अगर यह भावना सर्वोपरि हो जाए कि पूरी दुनिया हमारी मर्जी से चले और बाकी सब खत्म हो जाएं, तो समझ लो इसका पतन शुरु हो गया है। देश की राजधानी दिल्ली यूनिवसर्सिटी के रामजस कॉलेज में दो छात्र संगठनों के विवाद के मामले में यही हो रहा है। अलग-अलग विचारधाराओं से जुडे छात्र चाहते हैं कि उच्च शिक्षा के मंदिर में सब कुछ उनकी मर्जी से चले। मूल मुद्दा पीछे छूट गया है और विवाद ने पूरी तरह से राजनीतिक रंगत अख्तियार कर ली है। और अब यह दक्षिणपंथी बनाम वामपंथी विचारधारा का शीत युद्ध बन गया है। रामजस कालेज के एक सेमिनार में जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र को आमंत्रित करना इस विवाद की जड है। दिल्ली यूनिवर्सिटी दक्षिणपंथी भाजपा से सम्बद्ध अखिल भारतीय विधार्थी परिषद (एबीवीपी) का गढ है और जेएनयू वामपंथी दलों से सम्बद्ध छात्र संगठओं का । एबीवीपी के गढ में वामपंथी का आमंत्रित किया जाना भगवा छात्र संगठन को जरा नहीं सुहायां। एबीवीपी का आरोप था कि जिन दो छात्रों को आमंत्रित किया गया उन पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है, इसलिए सेमिनार स्थल की तालाबंदी की गई और विरोध प्रदर्शन किया गया। जबाव में वामपंथी छात्र सडक पर उतर आए और दोनों में जबरदस्त जूतम-पैजार हो गई और अब तक जारी है। सोमवार को एवीबीपी ने “तिरंगा यात्रा“ निकाल कर धमकी दी कि अगर प्रशासन ने “देशद्रोहियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं कि तो यह छात्र संगठन उन्हें सजा देगा। मंगलवार को दिन में वामपंथी छात्रों (आइसा) ने जलूस निकाला तो शाम को कांग्रेस से सम्बंद्ध एनएसयूआई ने मशाल जलूस निकाला। इससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो रहा है। इस विवाद में कारगिल युद्ध के शहीद की बेटी को भी बेवजह निशाना बनाया गया। एवीबीपी के खिलाफ आवाज उठाने का दुस्साहस करने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर को कई दिग्गजों ने सोशल मीडिया में निशाने पर लिया है। क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग और पहलवान योगेश्वर दत्त ने तल्ख टिप्पणियां की हैं। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी छात्रा को निशाने पर लेते हुए पूछा है कि इस लडकी का दिमाग कौन गंदा कर रहा है। इस पर कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां तक कह दिया कि इस भद्र पुरुष को संसद में भी नहीं होना चाहिए मगर दुर्भाग्य है कि यह सब सरकार की तरफ से हो रहा है। रिजिजू की टिप्पणी से क्षुब्ध जाने-माने फिल्मकार जावेद अख्तर ने तंज कसा है कि मंत्रीजी आपका दिमाग किसने गंदा किया मुझे पता है। कर्नाटक के भाजपा सांसद ने तो यह कहकर हद ही कर दी कि माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम ने भी अपने पिता का सहारा नहीं लिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वामपंथी छात्र संगठनों का पक्ष लेते हुए एवीबीपी की “गुंडागर्दी“ के खिलाफ कार्रवाई की मंग की है। ट्रोलिंग से क्षुब्ध शहीद की बेटी का संघर्ष का मादा टूट गया और मंगलवार को छात्रा गुरमेहर ने मार्च से किनारा कर लिया । एवीबीपी और भगवा संगठनों ने इस विवाद को राष्ट्रवाद बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा बना लिया है। एवीबीपी और भगवा संगठनों का आरोप है कि जेएनयू देशद्रोही गतिविधियों का अडडा बन चुका है जबकि वामपंथियों का कथन है कि यूनिवर्सिटी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मुक्त आचार-विचारों का स्थल होती है। इस मामले में इग्लैंड की आॉक्सफोर्ड और कैंम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की मिसाल दी जा रही है। भारत की आजादी पर इन नामी यूनिवर्सिटीज में खुलकर विचार व्यक्त किए जाते थे। तथापि इन आरोपों में वजन है कि यूनिवर्सिटीज को देशद्रोह गतिविधियों का अडडा नहीं बनाया जा सकता। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह कतई मतलब नहीं कि इसका देशद्रोही अभिव्यक्ति के लिए दुरुपयोग किया जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए जरुरी है कि यूनिवर्सिटीज को राजनीतिक दलों का अखाडा नहीं बनाया जाए।
बुधवार, 1 मार्च 2017
Indian Students Are Now More Deeply Rooted In Politics Than Studies
Posted on 7:31 pm by mnfaindia.blogspot.com/






