नकल करके परीक्षा उर्तीण करना देश में शिक्षा के गिरते स्तर का |¨rd है, तो धांधली करके नौकरी पा लेना इसकी इंतहा है। रविवार को सेना भर्ती परीक्षा का पर्चा लीक हो जाने से पश्चिम भारत के छह केन्द्रों पर परीक्षा रद्द करनी पडी। 18 “मुन्नाभाइयों“ को गिरफ्तार किया गया। लगभग 350 परीक्षार्थियों से पूछताछ की गई। सेना के विभिन्न पदों की भर्ती के लिए रविवार को पूरे देश में 52 केन्द्रों पर परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा शुरु होने से पहले महाराष्ट्र पुलिस को परीक्षा का पर्चा लीक होने की सूचना मिली थी । इस पर कई जगह छापे मारे गए और पर्चा लीक करने के लिए एक कोचिंग सेंटर संचालक और कुछ पूर्व सैनिकों को पर्चे समेत रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। सेना ने छह केन्द्रों की परीक्षाए रद्द कर दी हैं। जांच के बाद कुछ और केन्द्रों की परीक्षाए भी रद्द की जा सकती हैं। जिन प्ररीक्षार्थियों ने इस टेस्ट के लिए कडी मेहनत की थी, उन्हें चंद “मुन्नाभाइयों“ के कारण खामख्वाह हताश होना पडेगा। इस प्रकरण ने परीक्षा से जुडी खामियों को फिर उजागर किया है। भ्रष्ट के कारण सिविल परीक्षा का पर्चा लीक होना तो समझ में आता है मगर सेना भर्ती के प्रश्न पत्रों का लीक होना चिंता का विषय है। इतना तो तय है कि बगैर अंदरुनी सांठगांठ के पर्जा लीक होना संभव नहीं है। इसके यह अभिप्राय निकलते हैं कि दाखिलों और भर्ती के अवैध धंधे की जडें इस कद्र फैल गई हैं कि अब सेना भर्ती को भी इसने अपनी चपेट में ले लिया है। इस प्रकरण में गिरफ्तार “दलालों“ से पूछताछ में पता चला है कि प्रत्येक प्रत्याशी से चार से पांच लाख रु वसूलने जाने थे। जाहिर है इस रकम मेंसे दलालों के अलावा सेना भर्ती बोर्ड से जुडे सूत्रों को भी उनका हिस्सा दिया जाना था। पुलिस को संदेह है कि पर्चा प्रिटिंग प्रैस अथवा प्रश्न पत्र वितरण केद्र से लीक किया गया है। बहरहाल, धन अथवा रसूख के बल पर होनहार और मेहनती छात्रों एवं युवाओं के भविष्य से खिलवाड करने वाली गतिविधियां देश की जडों को खोखला कर रही है। छात्र और युवा देश का निर्माण करते हैं और अगर निर्माण की बुनियाद ही कच्ची हो तो भवन का ढहना तय है। सेना की भर्ती में किसी भी तरह की जरा सी कोताही देश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। प्रतिभा की बजाय धन के बल पर सेना में भर्ती होने वाले सीमा के प्रहरी नहीं बन सकते। ऐसे लोग देश की सुरक्षा से भी समझौता कर सकते हैं। सच कहा जाए तो परीक्षा पर आधारित मौजूदा भर्ती पद्धति में ही खोट है। रविवार को सेना में जिन पदों के लिए भर्ती की जानी थी, उनमें सोल्जर कलर्क, स्ट्रांगमैन तथा सोल्जर ट्रेड्समैन शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा परीक्षा पद्धति में परीक्षार्थी की प्रतिभा का सही-सही आकलन करने की जगह उसे किताबी ज्ञान को ज्यादा तरजीह दी जाती है। स्कूल अथवा कॉलेजों मे भी परीक्षाओं से उसकी प्रतिभा का आकलन किया जाता है। और इन परीक्षाओं में उर्तीण होने अथवा अव्वल आने के लिए परीक्षार्थी का ज्ञान पुस्तकों तक ही सीमित रह जाता है। स्कूल और कालेज के बाद किसी परीक्षार्थी की फिर से परीक्षा क्यों ली जाए? और अगर मूल परीक्षा के बाद भर्ती अथवा दाखिले के लिए अभ्यर्थी को फिर परीक्षा देनी पडे, तो ऐसी व्यवस्था का क्या औचित्य जो बार-बार अभ्यर्थी की परीक्षा देने के लिए विवश करे? आजादी के बाद शुरु में विश्वविधालय अथवा बोर्ड की परीक्षा के आधार पर साक्षात्कार लेकर मेरिट पर दाखिले अथवा भर्ती की जाती थी। जैसे-जैसे देश आगे बढता गया, इस पद्धति को नकार दिया गया। मौजूदा दाखिला और भर्ती पद्धति ने भ्रष्ट तौर-तरीकों और पूरी व्यवस्था के व्यापारीकरण को ही बढाया है। इसे बदलने की जरुरत है।
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