बुधवार (22 मार्च) को इग्लैंड की राजधानी लंदन में एक आतंकी ने पांच निर्दोष लोगों को मारा डाला और 40 से अधिक लोगों को घायल कर दिया। जुलाई, 2005 के बाद लंदन में यह सबसे बडा हमला है। तब चार आतंकियों ने लंदन की भूमिगत रेल सेवाओं में और टावस्टॉक स्कवायर में एक बस में श्रृंखलाबद्ध बम फोडे थे। 7/7 के इन आत्मघाती आतंकी हमले में 55 लोग मारे गए थे। बुधवार को हमलावर ने अपरान्ह टेम्स नदी के वेस्टमिंस्टर ब्रिज पर तेजी से कार दौडाकर दो लोगो को मार डाला और कई अन्य को घायल कर दिया। इसके बाद अनियंत्रित कार संसद परिसर के बार की रेलिंग से जा टकराई। हाथ में चाकू लिए आतंकी कार से बाहर निकला और संसद में घुसने की कोशिश की। रोके जाने पर हमलावर ने एक पुलिसकर्मी को चाकू घोंप दिया जिसकी मौत हो गई। इसके बाद हथियार बंद पुलिसवालों ने हमलावर को गोली मार दी। घायलों में समारोह से लौट रहे तीन पुलिसकर्मी भी हैं जो वेस्टमिंस्टर ब्रिज पर पैदल चल रहे थे। घायलों मे ही दक्षिण कोरिया के पांच और रोमानिया के दो पर्यटक, लंकाशायर यूनिवर्सिटी के चार छात्र और फ्रांस से लंदन घूमने आए तीन स्कूली बच्चे भी हैं। इस हमले के एक दिन बाद अभी तक हमलावर आतंकी की पहचान नहीं हो पाई है। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे तक को भी आतंकी हमलावर की पूरी जानकारी नहीं है। कहा जा रहा है कि आतंकी हमलावर एशियाई मूल का ब्रिटेन का नागरिक है। कुछ साल पहले देश की खुफिया एजेंसी ने उसकी पृष्ठभूमि को खंगाला था मगर वर्तमान में उस पर खुफिया नजरें नहीं थी। इससे साफ जाहिर है कि पुलिस को हमलावर की आईडेंटी का पता है मगर उसे सार्वजनिक नहीं किया गया । जाहिर है यह सब हमलावर के समूचे नेटवर्क कीधड-पकड के दृश्टिगत किया जा रहा है। देर रात उसकी पहचान को जाहिर किया गया। वीरवार को पुलिस ने बर्मिघम, लंदन और कुछ अन्य जगहों पर छापेमारी करके आठ लोगों को हिरासत में लिया है। प्रधानमंत्री मे के अनुसार हमलावार अकेला ही था और इस बात के कोई कारण नजर नहीं आ रहे हैं कि और आतंकी हमले भी हो सकते हैं। पुलिस इस हमले को आईएस से भी जोडकर देख रही है। ब्रिटेन में आतंकी हमले कोई नई बात नहीं है। इस श शताबदी में अब तक 15 से भी ज्यादा बडे हमले हो चुके हैं। पिछले साल (2016) 16 जून को लेबर पार्टी की सांसद जो कॉक्स को कटटरवादियों ने वेस्ट यॉकशायर के ब्रिस्टल में दिन-दहाडे मार डाला। हमलावर “ब्रिटेन फर्स्ट“ चिल्ला रहा था। कॉक्स की मदद करने आए 77-वर्षीय वृद्ध को भी बुरी तरह से जख्मी किया गया। अदालत ने इस हमले को “आतंकी “ घटना बताया है। 2015 में लेटोनस्टोन ट्यूब स्टेशन पर 29 वर्षीय युवक ने ब्रेड काटने के काम आने वाले चाकू से तीन लोगों को बुरी तरह जख्मी कर डाला। हमलावर चाकू लहराकर अन्य यात्रियों को यह कहकर डरा रहा था , “यह मेरे सीरियाई मुस्लिम बंधुओं के लिए है। अभी तो और खून बहेगा“। मई, 2013 में दो इस्लामिक आतंकियों ने एक ब्रिटिश सैनिक को गोलियों से भून डाला। उसी साल अप्रैल में यूक्रेन के एक कट्टरफ्ंथी छात्र ने बर्मिघम के एक नागरिक को मार डाला और पूछताछ में माना कि वह नस्लीय युद्ध शुरु करना चाहता है । बाद में इसी छात्र ने तीन बार मस्जिदों पर बम फोडे। पावलो लैपशिन नाम के इस आतंकी को बाद में अदालत ने 40 की कैद की सजा सुनाई है। बुधवार के हमले ने लंदन की सुरक्षा व्यवस्था को फिर तार-तार कर दिया है। पुलिस ने माना है कि लंदन पर आतंकी हमलों की आशंका कहीं ज्यादा है। इस मामले में भारत ब्रिटेन की मदद कर सकता है। भारत को आतंकियों से निपटने का लंबा अनुभव है।
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